देश के माल ढुलाई नेटवर्क के लिए मंगलवार का दिन बड़ा बदलाव लेकर आया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के अहम सेक्शन का उद्घाटन किया और इसके साथ ही देश का पूरा 2,843 किलोमीटर का डीएफसी नेटवर्क ऑपरेशनल हो गया ₹20,700 करोड़ से ज्यादा की लागत से बने करीब 326 किलोमीटर के आखिरी तीन सेक्शन के शुरू होने के बाद 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) भी पूरी तरह चालू हो गया है.
JNPT से दादरी तक WDFC ऑपरेशनल
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से दिल्ली के पास दादरी तक फैला है. गुजरात और महाराष्ट्र के बीच न्यू साणंद (एन)-न्यू मकरपुरा, न्यू उम्बरगांव-न्यू सफले और न्यू सफले-जेएनपीटी सेक्शन के शुरू होने के साथ इस कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क ऑपरेशनल हो गया है. वैतरणा (सफले) से JNPT तक का आखिरी हिस्सा भी अब मालगाड़ियों के लिए उपलब्ध है. इस कनेक्टिविटी से JNPT के अलावा मुंबई पोर्ट, पिपावाव, मुंद्रा और कांडला जैसे प्रमुख बंदरगाहों से आने-जाने वाले माल को दिल्ली और उत्तर भारत के बड़े बाजारों तक तेज रफ्तार से पहुंचाने में मदद मिलेगी.
नमक-कोयला से सीमेंट तक की तेज ढुलाई
डब्ल्यूडीएफसी पर JNPT, मुंबई पोर्ट, पिपावाव, मुंद्रा और कांडला पोर्ट से आने वाले ISO कंटेनरों की ढुलाई होती है. ये कंटेनर तुगलकाबाद, दादरी, ढंडारी कलां और खाटूवास जैसे इनलैंड कंटेनर डिपो (ICDs) तक पहुंचते हैं. इसके अलावा इस नेटवर्क पर फर्टिलाइजर, खाद्यान्न, नमक, कोयला, लौह अयस्क, स्टील और सीमेंट जैसे सामान की ढुलाई भी बढ़ने की उम्मीद है.
WDFC पुराने रेल नेटवर्क पर घटाएगा दबाव
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि देश के प्रमुख रेलवे रूट लंबे समय से माल और यात्री ट्रेनों के भारी दबाव में चल रहे थे. मुंबई-दिल्ली और हावड़ा-दिल्ली जैसे ट्रंक रूट पर लाइन क्षमता 115 से 150 फीसदी तक पहुंच गई थी. ऐसे में मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर तैयार करने का फैसला किया गया, ताकि यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों को अलग-अलग रूट मिल सके और दोनों की रफ्तार बढ़ाई जा सके.
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ऑपरेशनल
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) देश का दूसरा बड़ा फ्रेट नेटवर्क है. करीब 1,337 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक फैला है और मुख्य रूप से पूर्वी भारत के कोयला और खनिज ट्रैफिक को संभालता है. EDFC में सोननगर-दादरी के बीच 936 किलोमीटर का इलेक्ट्रिफाइड डबल लाइन सेक्शन है, जबकि लुधियाना (साहनेवाल)-खुर्जा के बीच 401 किलोमीटर का इलेक्ट्रिफाइड सिंगल ट्रैक सेक्शन है.
अक्टूबर 2023 में पूरी तरह ऑपरेशनल हुए EDFC का एक बड़ा फायदा यह है कि यह घनी आबादी वाले कई शहरों को बायपास करता है. इसमें मिर्जापुर, प्रयागराज, कानपुर, इटावा, फिरोजाबाद, टूंडला, हाथरस, अलीगढ़, हापुड़ और मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, अंबाला, राजपुरा, सरहिंद, दोराहा और साहनेवाल जैसे इलाके शामिल हैं.
नेटवर्क पर रोज 426 से ज्यादा फ्रेट ट्रेनें
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क की वजह से मालगाड़ियों की औसत रफ्तार में भी बड़ा सुधार हुआ है. दोनों कॉरिडोर पर रोजाना करीब 426 फ्रेट ट्रेनें चल रही हैं. रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक डीएफसी पर मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रही है, जो नॉन-DFC नेटवर्क पर चलने वाली मालगाड़ियों की औसत रफ्तार की करीब दोगुनी है. अप्रैल और मई में EDFC पर औसत रफ्तार क्रमशः 44.9 और 44.7 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि WDFC पर यह 53.6 और 52.3 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई.
बिजनेस और लॉजिस्टिक्स को है फायदा
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पैसेंजर नेटवर्क से अलग रूट मिलने के कारण माल की आवाजाही का ट्रांजिट टाइम कम होता है. इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटाने और सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलती है. पोर्ट से इनलैंड कंटेनर डिपो और औद्योगिक क्षेत्रों तक माल की तेज आवाजाही से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. भारतीय रेलवे की कुल कमाई में माल ढुलाई की हिस्सेदारी 65 फीसदी से ज्यादा है. वहीं, DFC से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) देश के कुल सड़क नेटवर्क का करीब 0.5 फीसदी हैं, लेकिन ये सड़क माल ढुलाई का लगभग 40 फीसदी हिस्सा संभालते हैं.
रेलवे से माल ढुलाई बढ़ाने का है लक्ष्य
देश में कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 27 फीसदी है. नेशनल रेल प्लान के तहत 2030 तक इसे बढ़ाकर 45 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए सालाना करीब 3,000 मिलियन टन माल रेल नेटवर्क के जरिए ढोने का लक्ष्य है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,670 मिलियन टन की रिकॉर्ड माल लोडिंग दर्ज की थी. DFC नेटवर्क के पूरा होने से पोर्ट, कंटेनर और लॉजिस्टिक्स कारोबार से जुड़े उद्योगों के लिए तेज और अपेक्षाकृत कम लागत वाला रेल रूट उपलब्ध हुआ है. खास तौर पर JNPT से उत्तर भारत तक सीधी कनेक्टिविटी मिलने से पश्चिमी तट के बंदरगाहों से आने वाले माल की आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद है.
2005 में शुरू हुई प्रोजेक्ट की प्लानिंग
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर पहली गंभीर चर्चा अप्रैल 2005 में भारत और जापान के बीच हुई बैठक के दौरान हुई थी. बाद में इसे दोनों देशों के कोऑपरेशन डिक्लेरेशन में भी शामिल किया गया. अक्टूबर 2007 में इसकी फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट तैयार हुई और कंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) का गठन किया गया. प्रोजेक्ट की फंडिंग में वर्ल्ड बैंक से करीब ₹14,900 करोड़, जापान कोऑपरेशन इंटरनेशनल एजेंसी (JICA) से करीब ₹38,722 करोड़ और बाकी राशि ग्रॉस बजटरी सपोर्ट के जरिए जुटाई गई.
2014 तक 1KM भी कमीशन नहीं था
यूपीए सरकार के आखिरी सालों तक जमीन अधिग्रहण, कुछ सेक्शनों के कॉन्ट्रैक्ट और शुरुआती निर्माण का काम आगे बढ़ चुका था, लेकिन मार्च 2014 तक EDFC और WDFC पर एक भी किलोमीटर कमीशन नहीं हुआ था. उस समय परियोजना पर करीब ₹10,357 करोड़ खर्च हो चुके थे. इसके बाद केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनी. 2014-2026 के दौरान डीएफसी प्रोजेक्ट की रफ्तार काफी तेज हुई. जनवरी 2023 तक ही 1,724 किमी DFC कमीशन हो चुका था, जबकि मार्च 2014 में यह आंकड़ा शून्य था. दिसंबर 2023 तक 1,337 किमी लंबे EDFC का निर्माण पूरी तरह पूरा हो गया था. अब सितंबर 2026 में WDFC के आखिरी 326 किमी के तीन सेक्शन के उद्घाटन के साथ 1,506 किमी WDFC भी पूरा हो गया है. इसके साथ देश का पूरा DFC नेटवर्क करीब 2,843 किमी का हो गया है.
अब तीसरे फ्रेट कॉरिडोर की तैयारी
दो बड़े डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के ऑपरेशनल होने के बाद अब नजर देश के तीसरे बड़े फ्रेट कॉरिडोर पर है. इस साल के बजट में पश्चिम बंगाल के डानकुनी (Dankuni) से गुजरात के सूरत (Surat) तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की प्लानिंग सामने आई है. इस प्रस्तावित कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है. DFC नेटवर्क के विस्तार का मकसद सिर्फ मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाना नहीं है, बल्कि रेलवे के जरिए देश के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को अधिक तेज, कुशल और प्रतिस्पर्धी बनाना भी है.