15 अक्टूबर से UPI से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब ₹2000 से ज्यादा के हर UPI लेनदेन पर बड़े व्यापारियों को 0.4% की मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR चुकानी होगी. सरकार का कहना है कि इसका असर आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों पर नहीं पड़ेगा, यह सिर्फ बड़े ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़ी रिटेल चेन जैसे मर्चेंट के लिए है. इस पूरे मुद्दे को समझने के लिए बिजनेस टुडे टेलीविजन की साक्षी बत्रा ने MobiKwik की सह संस्थापक और सीईओ उपासना टाकू से बातचीत की. पेश है उसी बातचीत का सवाल जवाब के रूप में विस्तृत ब्यौरा.
सवाल: यह कदम पेमेंट इंडस्ट्री के लिए क्यों जरूरी था और इससे पूरे इकोसिस्टम के लिए क्या बदलेगा?
जवाब: उपासना टाकू ने बताया कि पिछले कई सालों से सभी पेमेंट कंपनियां, बड़े पेमेंट बिजनेस वाले बैंक, पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन फिनटेक फोरम जैसे सभी पेमेंट बॉडी लगातार इस बदलाव की मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि UPI लॉन्च होने के महज 10 साल के भीतर ही डिजिटल पेमेंट में जो बड़ा बदलाव आया है, उसका सारा बोझ पेमेंट कंपनियों और बैंकों के मुनाफे नुकसान वाले खाते पर पड़ा है. उन्होंने एक अहम आंकड़ा साझा करते हुए कहा कि लगभग सभी पेमेंट कंपनियों के हिसाब से एक ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने की सर्वर लागत ही करीब 20 पैसे बैठती है, जबकि इस पर कमाई शून्य रही है. यही वजह है कि लोग मजाक में कहते हैं कि पेमेंट कंपनियां पैसा नहीं कमातीं, क्योंकि यही असली कारण है. उन्होंने बताया कि पेमेंट कंपनियां लगातार वित्त मंत्रालय, वित्त मंत्री और आरबीआई गवर्नर तक चिट्ठियां भेजती रहीं और मांग करती रहीं कि कम से कम UPI के किसी हिस्से को मॉनेटाइज किया जाए ताकि आगे का ग्रोथ मुमकिन हो सके. उनके मुताबिक अभी भी हर भारतीय UPI का इस्तेमाल नहीं करता, इसलिए बाजार को अभी और बढ़ना है, और अगले 10 साल के इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्रॉड रोकथाम, इनोवेशन और साइबर सिक्योरिटी का खर्च कहीं से तो आना ही होगा. उन्होंने यह भी बताया कि पहले मिलने वाली UPI सब्सिडी भी कंपनियों की कुल लागत का सिर्फ 10 से 15 फीसदी ही कवर करती थी, जो पर्याप्त नहीं थी. उनके अनुसार नई MDR से भी सबकी पूरी भरपाई नहीं होगी, क्योंकि UPI के कई हिस्से 15 अक्टूबर के बाद भी मुफ्त रहेंगे, लेकिन इससे कंपनियों और बैंकों का घाटा जरूर कम होगा.
सवाल: ₹2000 से ऊपर के लेनदेन पर आखिर चार्ज कौन देगा, क्या यह ग्राहकों पर भी असर डालेगा?
जवाब: उपासना टाकू ने साफ कहा कि इस बारे में काफी गलत जानकारी और झूठा प्रचार फैलाया जा रहा है, जो कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि आम ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि जैसे डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर पैसा बचत खाते से जाता है, वैसे ही UPI से भी बचत खाते से ही पैसा जाता है. जब आप डेबिट कार्ड से मर्चेंट को पेमेंट करते हैं तो उस पर मर्चेंट को ही चार्ज देना पड़ता है, वीजा या मास्टरकार्ड डेबिट कार्ड पर ₹2000 से ऊपर के लेनदेन पर 0.9% और उससे नीचे पर भी 0.4% चार्ज लगता है. क्रेडिट कार्ड पर तो यह दर 1.65% से 1.85% तक जाती है. उन्होंने कहा कि अब तक केवल UPI ही ऐसा माध्यम था जो मर्चेंट के लिए भी मुफ्त था, इसलिए जो मर्चेंट पहले से क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर इतना ज्यादा चार्ज दे रहे हैं, उन्हें ₹2000 से ऊपर के UPI लेनदेन पर 0.4% देने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्राहकों के लिए UPI हमेशा मुफ्त रहेगा, यहां तक कि ईंधन, बीमा और बिल पेमेंट जैसी जरूरी सेवाएं भी इससे अछूती रहेंगी. उन्होंने बताया कि अगर कोई ₹10,000, ₹2,000 या ₹50,000 का क्रेडिट कार्ड बिल भरता है तो उस पर भी दाम पहले ही ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन तय कर दिए गए हैं, यानी वहां 0.4% का हिसाब लागू ही नहीं होगा, और वह ₹5 भी बिलर या मर्चेंट ही देगा, ग्राहक के लिए बिल पेमेंट पूरी तरह मुफ्त रहेगा. उन्होंने कहा कि असल असर सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M लेनदेन पर पड़ेगा. सब्जी, किराना, ₹300 की कॉफी या ₹300 से ₹400 की टैक्सी जैसे लेनदेन पर मर्चेंट को कोई चार्ज नहीं देना होगा, MDR शून्य ही रहेगा. यह चार्ज तभी लगेगा जब जूते, कपड़े या फ्लाइट टिकट जैसी कोई चीज ₹2000 से ज्यादा की खरीदी जाए. उन्होंने यह भी साफ किया कि छोटे मर्चेंट, जैसे बिना पक्की दुकान वाले विक्रेता, उन्हें मर्चेंट माना ही नहीं जाता इसलिए उन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. वहीं शॉप एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और जीएसटी वाली दुकान भी अगर महीने में ₹1000 से कम की बिक्री करती है तो उस पर भी लेनदेन की रकम चाहे जो भी हो, कोई MDR नहीं लगेगा. उन्होंने यह दलील भी खारिज की कि लोग अब नकद या कार्ड की तरफ लौट सकते हैं, क्योंकि जब डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर पहले से ही 0.4% से लेकर 1.85% तक चार्ज लगता है, तो मर्चेंट के लिए ऐसा करना फायदे का सौदा नहीं होगा. साक्षी बत्रा ने भी इस पर जोड़ा कि नकद रखने की भी अपनी लागत होती है और देश पहले ही मोबाइल फोन से पेमेंट करने की सुविधा को अच्छी तरह अपना चुका है. उपासना टाकू ने एक और उदाहरण देकर समझाया कि अगर कोई छोटा किराना दुकानदार महीने में ₹10,000 से ₹20,000 की बिक्री करता है, तो उसमें ₹2000 से ऊपर के लेनदेन बहुत कम, यानी कुल लेनदेन का करीब सिर्फ 5% ही होते हैं. इसलिए ऐसे एक दो लेनदेन पर 0.4% चार्ज लगने से उसकी कुल कमाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. उनके मुताबिक जो डर फैलाया जा रहा है वह पूरी तरह बेबुनियाद है और 15 अक्टूबर के बाद जब यह व्यवस्था असल में लागू होगी, तो एक महीने के भीतर ही यह हल्ला खुद ब खुद शांत हो जाएगा क्योंकि मर्चेंट को खुद एहसास होगा कि उन्हें इतनी चिंता करने की जरूरत ही नहीं थी.
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सवाल: इस नए MDR से MobiKwik की अपनी कमाई पर क्या असर पड़ेगा, क्या आगे चलकर यह दर और बढ़ सकती है?
जवाब: उपासना टाकू ने बताया कि यह बदलाव सभी पेमेंट कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित होगा और इसका सीधा असर MobiKwik पर भी पड़ेगा. उन्होंने बताया कि सर्कुलर के पूरे ब्यौरे रात में ही सामने आए हैं, इसलिए फिलहाल अनुमानित आंकड़ा यह है कि अगली साल यानी वित्त वर्ष 28 में सामान्य बिजनेस ग्रोथ से मिलने वाले राजस्व के अलावा, सिर्फ UPI MDR से ही कंपनी को कम से कम ₹150 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इसमें से कितना हिस्सा सीधे EBITDA में जाएगा, यह अभी बताना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह रकम अच्छी खासी होगी और तिमाही और सालाना आंकड़ों पर भी इसका असर दिखेगा. उन्होंने बताया कि MobiKwik जैसी ज्यादातर पेमेंट कंपनियां दोनों तरफ से काम करती हैं, यानी एक तरफ उनका कंज्यूमर ऐप है जिससे लोग क्यूआर कोड स्कैन कर UPI पेमेंट करते हैं, और इस मामले में MobiKwik देश की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंज्यूमर UPI ऐप रही है. इस पूरे GMV पर, यानी पर्सन टू पर्सन लेनदेन और ₹2000 से कम के लेनदेन को छोड़कर बाकी पर, कंपनी को TPAP यानी थर्ड पार्टी ऐप वाला MDR मिलेगा. वहीं दूसरी तरफ मर्चेंट साइड पर जहां कंपनी ने क्यूआर कोड, साउंडबॉक्स और ईडीसी मशीनें लगा रखी हैं, वहां अब तक जिन UPI लेनदेन पर कंपनी को घाटा हो रहा था, अब उन पर भी एक्वायरर साइड से कमाई शुरू होगी. उन्होंने समझाया कि 40 बेसिस पॉइंट का यह चार्ज पूरे इकोसिस्टम में बंटता है, जिसमें मर्चेंट का पेमेंट पार्टनर, उसके पीछे का बैंक, उसके पीछे एनपीसीआई, और ग्राहक की तरफ का ऐप व बैंक शामिल होते हैं. उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर पांच अलग अलग पक्ष इस चेन में शामिल होते हैं, और इनमें से जो कंपनियां दोनों तरफ मौजूद हैं, उन्हें दोनों तरफ से कमाई का मौका मिलेगा.
सवाल: ब्रोकरेज हाउस पूरे इकोसिस्टम के लिए ₹10,000 करोड़ से लेकर ₹21,000 करोड़ तक के सालाना राजस्व का अनुमान लगा रहे हैं, इसमें बैंकों और पेमेंट कंपनियों के बीच यह रकम कैसे बंटेगी?
जवाब: उपासना टाकू ने बताया कि इसमें बैंकों को तय तौर पर बड़ा हिस्सा मिलेगा. उन्होंने समझाया कि कंज्यूमर साइड पर जो बैंक खाता जारी करता है, यानी इश्यूइंग बैंक, और जो थर्ड पार्टी ऐप है, दोनों को हिस्सा मिलेगा, लेकिन बैंक का हिस्सा पेमेंट कंपनी से ज्यादा होगा. इसके बाद एनपीसीआई को भी अपना हिस्सा मिलेगा, और फिर मर्चेंट की तरफ जो एक्वायरिंग बैंक और पेमेंट कंपनी है, उसे भी अच्छा खासा हिस्सा मिलेगा. उन्होंने कहा कि जिन बैंकों का इस पूरे सिस्टम में बड़ा स्केल है, उन्हें ज्यादा हिस्सा मिलना तय है और इसके आंकड़े एनपीसीआई की वेबसाइट पर मौजूद हैं. वहीं पेमेंट कंपनियों को कंज्यूमर साइड पर करीब 5 से 10 बेसिस पॉइंट मिलने का अनुमान है, और मर्चेंट साइड पर भी लगभग उतना ही हिस्सा मिलेगा. जो कंपनियां दोनों तरफ मौजूद हैं, उन्हें एक ही लेनदेन पर दोगुना फायदा होगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ब्रोकरेज हाउस के अनुमान थोड़े गलत हो सकते हैं, क्योंकि बहुत बड़ी संख्या में लेनदेन बिजली बिल, क्रेडिट कार्ड बिल जैसी जरूरी सेवाओं के हैं, जिन पर सिर्फ ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन ही चार्ज लगेगा, इसलिए इन पर 0.4% का हिसाब लागू नहीं किया जा सकता और इन्हें कुल अनुमान से घटाना जरूरी है.
सवाल: इस बदलाव से पेमेंट और फिनटेक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा किस तरह बदलेगी, गूगल पे और फोनपे जैसी कंपनियों के मुकाबले MobiKwik जैसी कंपनियों की स्थिति कैसी रहेगी?
जवाब: उपासना टाकू ने बताया कि हर कंपनी की अपनी अलग ताकत है, कुछ सिर्फ मर्चेंट साइड पर काम करती हैं, कुछ सिर्फ कंज्यूमर साइड पर, और कुछ, जैसे MobiKwik, दोनों तरफ मौजूद हैं और नेटवर्क इफेक्ट बनाने की कोशिश करती हैं. उन्होंने बताया कि अभी कंज्यूमर साइड UPI बाजार का करीब 80 से 85% हिस्सा सिर्फ दो कंपनियों के पास है, और दोनों में बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों की हिस्सेदारी है. उनके मुताबिक इसकी वजह यह रही कि पिछले 10 साल तक इस पर कोई कमाई नहीं थी, इसलिए स्वतंत्र पेमेंट कंपनियां आक्रामक ग्रोथ का पीछा नहीं कर पाईं, क्योंकि जितनी ज्यादा ग्रोथ, उतना ज्यादा घाटा होता. कई बड़ी लिस्टेड कंपनियां और पूंजी बाजार में आने की तैयारी कर रही कंपनियां भी इतना घाटा झेलने की स्थिति में नहीं थीं, और MobiKwik भी ऐसा नहीं कर सकती थी. इसलिए अब तक सिर्फ गहरी जेब वाली कंपनियां ही बाजार हिस्सेदारी बनाए रख पाई हैं. लेकिन अब जब एक कमर्शियल मॉडल तैयार हो गया है, तो यह मैदान बराबर होगा और अलग अलग कंपनियां अपने उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से अपना बिजनेस मॉडल बना सकेंगी. उन्होंने माना कि इससे प्रतिस्पर्धा जरूर बढ़ेगी, लेकिन अब यह मैदान बराबरी का होगा जहां कमाई का मौका होगा तो कंपनियां बाजार हिस्सेदारी के लिए जरूर लड़ेंगी. उन्होंने बताया कि अब तक बाजार हिस्सेदारी की लड़ाई इसलिए कमजोर थी क्योंकि कंपनियां सिर्फ UPI यूजर जोड़कर बाकी वित्तीय उत्पाद बेचने की कोशिश करती थीं, क्योंकि सीधे UPI से कोई बुनियादी कमाई नहीं हो पाती थी. उन्होंने इसे खेल जगत की उस कहावत से जोड़ा कि अब असली माने में सबसे बेहतर खिलाड़ी जीतेगा, क्योंकि अब तक सिर्फ गहरी जेब वाला खिलाड़ी ही जीत पाता था. उनके मुताबिक लंबी अवधि में इससे बाजार हिस्सेदारी का बंटवारा ज्यादा मजबूत और संतुलित होगा.
सवाल: आने वाले सालों में इस नए रेवेन्यू स्ट्रीम से MobiKwik के टॉप लाइन और बॉटम लाइन पर कैसा असर दिखेगा?
जवाब: उपासना टाकू ने दोहराया कि अगले साल के लिए कंपनी को ₹150 करोड़ के अतिरिक्त राजस्व का अनुमान है. उन्होंने कहा कि बॉटम लाइन पर न्यूनतम असर कम से कम 20% होने का अनुमान है, हालांकि यह इससे ज्यादा भी हो सकता है, क्योंकि सर्कुलर सिर्फ एक दिन पहले ही आया है और इसमें अभी बारीक ब्यौरे समझने बाकी हैं जो आम आदमी के लिए आसानी से समझ में नहीं आएंगे, इसलिए अभी लागत का सटीक आंकड़ा देना मुश्किल है. उन्होंने बताया कि यह कम से कम कुल राजस्व का 20% रहेगा, और आने वाले दिनों में जब स्थिति और साफ होगी तो कंपनी अपने निवेशकों को बेहतर आंकड़े देगी. उन्होंने याद दिलाया कि MobiKwik पहले ही इस साल ₹40 करोड़ के PAT यानी शुद्ध लाभ का अनुमान दे चुकी है, और अगले साल इस आंकड़े को और मजबूत करने की उम्मीद जताई है. उनके मुताबिक यह नई UPI MDR इस अनुमान पर अतिरिक्त फायदे के रूप में जुड़ेगी.