जलवायु परिवर्तन अगले तीन दशकों में अमेरिकी हाउसिंग मार्केट की पूरी तस्वीर बदल सकता है. 'फर्स्ट स्ट्रीट फाउंडेशन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2055 तक जलवायु जोखिमों के कारण रिहायशी संपत्तियों की कीमत में लगभग $1.47 ट्रिलियन (करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर) का नुकसान हो सकता है, जहां एक तरफ खतरे वाले इलाकों में प्रॉपर्टी के दाम गिरेंगे, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षित इलाकों में लोगों के बसने से वहां संपत्तियों की कीमतें $244 बिलियन तक बढ़ सकती हैं.
आने वाले सालों में होम इंश्योरेंस का बढ़ता प्रीमियम प्रॉपर्टी बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बनेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, 2055 तक देश भर में औसत बीमा प्रीमियम 29.4% तक बढ़ सकता है. मियामी जैसे शहरों में इंश्योरेंस का खर्च 4 गुना से भी ज्यादा बढ़ सकता है, जबकि जैक्सनविले, टाम्पा और न्यू ऑर्लेअन्स में यह तीन गुना तक हो सकता है. कैलिफोर्निया में बीमा खर्च दोगुना होने का अनुमान है, बढ़ते प्रीमियम के कारण कई इलाकों में आम लोगों के लिए घर खरीदना और संभालना बेहद महंगा हो जाएगा.
जलवायु परिवर्तन के कारण बड़े पैमाने पर पलायन
अत्यधिक गर्मी, जंगलों की आग और बाढ़ जैसे खतरों के कारण अमेरिकी नागरिक अपने रहने की जगह बदलने को मजबूर हो रहे हैं. रिपोर्ट का अनुमान है कि अगले 30 सालों में लगभग 5.5 करोड़ लोग जलवायु परिस्थितियों के कारण अमेरिका के भीतर ही दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो सकते हैं. केवल इस साल ही करीब 50 लाख लोग सुरक्षित इलाकों की तलाश में पलायन कर सकते हैं. इस पलायन से देश में दो तरह के बाजार बन जाएंगे एक वे जो आबादी और प्रॉपर्टी वैल्यू खो रहे हैं, और दूसरे वे जो नए लोगों के आने से फल-फूल रहे हैं.
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सन बेल्ट राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा
कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा और टेक्सस जैसे प्रमुख 'सन बेल्ट' राज्यों पर प्राकृतिक आपदाओं का सबसे बड़ा असर पड़ा है. 1980 के बाद से अमेरिका में हुए $2.8 बिलियन के प्राकृतिक आपदा नुकसान में से 40% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं तीन राज्यों का रहा है. अध्ययन के अनुसार, 2055 तक इन राज्यों के कुछ काउंटी में प्रॉपर्टी के दाम 10% से 40% तक गिर सकते हैं. हाल ही में लॉस एंजिल्स के जंगलों में लगी भीषण आग, जिसमें दर्जनों लोगों की जान गई और हजारों इमारतें तबाह हुईं, यह दर्शाती है कि जलवायु संकट अब कोई भविष्य की बात नहीं बल्कि एक जमीनी हकीकत बन चुका है.