दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की लाइफस्टाइल और महंगे घरों की वजह से लोग छोटे शहरों की ओर देख रहे हैं, जिन लोगों को मौका मिल रहा है वो इन शहरों को छोड़कर भी जा रहे हैं. मुंबई की एक डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो बता रही है कि आखिर उसने क्यों शहर छोड़ दिया.
डॉक्टर की कहानी सोशल मीडिया पर लोगों के दिलों को छू रही है. तंग, महंगे घर और थका देने वाली ट्रेन यात्राओं को छोड़कर मुफ्त फ्लैट और अस्पताल द्वारा दी जाने वाली गाड़ी की सुविधा को चुनते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे बड़े शहर की भागदौड़ के बजाय मानसिक शांति को प्राथमिकता देने से उनकी जिंदगी बदल गई.
डॉ. गरिमा चौहान ने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, "एक ऐसे इंसान के तौर पर जो मुंबई से बेहद प्यार करती है, इसे छोड़ना मेरे सबसे कठिन फैसलों में से एक था, यह मेरा घर है. मेरा परिवार वहीं है और मेरे दिल का एक हिस्सा हमेशा वहीं रहेगा."
उन्होंने आगे लिखा, "लेकिन छह महीने बाद, मुझे आखिरकार समझ आ गया है कि मैंने यह फैसला क्यों लिया था. कभी-कभी सफलता का मतलब सबसे बड़े शहर में रहना नहीं होता, कभी-कभी इसका मतलब एक ऐसी जिंदगी चुनना होता है जो आपको सुकून, समय और संतुलन दे."
दूसरों को सलाह देते हुए उन्होंने लिखा, "वह जिंदगी चुनें जो आप चाहते हैं, वह नहीं जिसकी हर कोई आपसे उम्मीद करता है." एक वीडियो में, डॉक्टर ने एक टेक्स्ट मैसेज शेयर किया, जिसमें लिखा था, "पहली पीढ़ी की डॉक्टर होने के बावजूद मैंने एक छोटे शहर के लिए मुंबई क्यों छोड़ा? वीडियो में आगे वह कहती हैं कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि उन्होंने एक छोटे से गांव में बसने के लिए बड़े शहर को क्यों छोड़ दिया. वह बताती हैं कि वह अभी-अभी अपने काम के स्थान से अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराई गई कार से वापस आई हैं.
डॉक्टर ने बताया कि किसी भी इमरजेंसी में, अस्पताल की गाड़ी हमेशा उन्हें लेने के लिए भेजी जाती है. इसके बाद वह मुंबई में अपने पुराने सफर की तुलना इससे करते हुए याद करती हैं कि कैसे उन्हें बस एक ओवरक्रूडेड ट्रेन पकड़ने और पूरे सफर के दौरान खड़े रहने के लिए जल्दी उठना पड़ता था. स्थिति को और बदतर बनाते हुए, किसी भी अप्रत्याशित देरी के कारण उनकी पुरानी नौकरी में सैलरी कट जाती थी.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह थका देने वाली दैनिक भागदौड़ ही मुंबई छोड़ने का उनका प्राथमिक कारण थी, उन्होंने याद किया कि कैसे वह वहां अपने पति के साथ माचिस की डिब्बी जैसे छोटे से किराए के फ्लैट में रहती थीं, जिसका किराया ₹30,000 महीना था, इसके बिल्कुल विपरीत, उनकी नई नौकरी में उन्हें बिल्कुल मुफ्त में दो बालकनियों वाला एक बड़ा 2 BHK अपार्टमेंट मिला हुआ है.
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