उत्तर प्रदेश का शो विंडो कहे जाने वाला नोएडा अब विकास मॉडल को लेकर एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है. अब तक नोएडा विकास प्राधिकरण की कमाई का सबसे बड़ा जरिया जमीन का आवंटन रहा है, लेकिन अब यहां जमीन तेजी से कम होती जा रही है, ऐसे में सरकार यह जानना चाहती है कि भविष्य में शहर के रखरखाव और विकास के लिए धन की व्यवस्था कैसे होगी.
प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अधिकारियों को अगले कुछ दशकों के लिए ऐसा वित्तीय मॉडल तैयार करने को कहा गया है, जिससे शहर की आय लगातार बनी रहे और विकास कार्य प्रभावित न हों.
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दरअसल, नोएडा में सड़क, पार्क, सफाई, जलापूर्ति, सीवर और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. अब तक इन खर्चों की भरपाई मुख्य रूप से जमीन आवंटन से होने वाली आय से होती रही है, लेकिन जमीन का भंडार कम होने के बाद नए विकल्प तलाशना जरूरी हो गया है.
सूत्रों के अनुसार, प्राधिकरण कई नए राजस्व स्रोतों पर विचार कर रहा है, इनमें पानी, सीवर, पार्किंग और कूड़ा निस्तारण जैसी सेवाओं के शुल्क की समीक्षा भी शामिल हो सकती है, इसके अलावा शहर में विज्ञापन से होने वाली आय बढ़ाने और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर भी मंथन चल रहा है.
सबसे ज्यादा चर्चा नगर निगम गठन और हाउस टैक्स की संभावना को लेकर है. वर्तमान में नोएडा में नगर निगम व्यवस्था नहीं है, इसलिए यहां संपत्ति कर लागू नहीं है, अगर भविष्य में इस दिशा में कोई फैसला होता है तो प्राधिकरण को स्थायी आय का एक बड़ा स्रोत मिल सकता है. इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों के आसपास विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देने, निजी भागीदारी के जरिए सामुदायिक और खेल परिसरों के संचालन और बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बॉन्ड जारी करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है.
सरकार चाहती है कि नोएडा ऐसा मॉडल तैयार करे जो आने वाले 20 से 30 वर्षों तक शहर की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके. माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं.
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