सऊदी अरब सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए देश में प्रॉपर्टी खरीदने के नियमों को बेहद आसान बना दिया है. इसके लिए एक नया आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है, जो जनवरी 2026 से लागू हुए नए 'रियल एस्टेट ओनरशिप लॉ' (Real Estate Ownership Law) के तहत काम करता है.
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सऊदी अरब के भीतर या दुनिया में कहीं भी रहने वाले योग्य व्यक्ति और कंपनियां प्रॉपर्टी खरीदने की पूरी प्रक्रिया को घर बैठे ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं.
इसके ज़रिए अपनी योग्यता जांचने से लेकर आवेदन सबमिट करने, उसे ट्रैक करने और निवेश के बेहतरीन मौकों को देखने तक का सारा काम एक ही जगह हो जाता है.
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मक्का, मदीना, रियाद और जेद्दा के लिए विशेष गाइडलाइंस
रियल एस्टेट जनरल अथॉरिटी (REGA) ने साफ किया है कि दोनों पवित्र शहरों मक्का और मदीना में प्रॉपर्टी खरीदने का अधिकार केवल सऊदी अरब की कंपनियों और मुस्लिम नागरिकों को ही होगा, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रहते हों. इसके अलावा, रियाद और जेद्दा जैसे प्रमुख शहरों में विदेशी मालिकाना हक को एक तय कानूनी ढांचे के तहत रेगुलेट किया जाएगा.
यह व्यवस्था 'भौगोलिक क्षेत्र दस्तावेज' पर आधारित होगी, जिसे साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान आधिकारिक तौर पर घोषित किया जाएगा.
भारतीयों के लिए सऊदी अरब में प्रॉपर्टी खरीदने की शुरुआती प्रक्रिया
यदि कोई भारतीय नागरिक सऊदी अरब में प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है, तो उसे सबसे पहले आधिकारिक 'सऊदी प्रॉपर्टीज पोर्टल' पर जाकर अपनी योग्यता की जांच करनी होगी, इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनी गई प्रॉपर्टी उसी क्षेत्र में हो जहां विदेशियों को खरीदने की अनुमति है. इसके बाद, सरकारी सेवाओं का उपयोग करने के लिए एक 'डिजिटल आइडेंटिटी' हासिल करना अनिवार्य है, जिसके बिना कोई भी लेनदेन शुरू नहीं हो सकता. इस पहचान को वेरिफाई करने के लिए खरीदार को अपने स्मार्टफोन में सऊदी अरब का ऑफिशियल ऑथेंटिकेशन ऐप 'नफाथ' डाउनलोड करके लॉग-इन करना होगा.
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डिजिटल आईडी तैयार होने के बाद, खरीदार को सऊदी प्रॉपर्टीज पोर्टल पर जाकर 'Register a New Account' पर क्लिक करना होगा, जहां 'Individuals' और फिर 'Individual Beneficiary' का विकल्प चुनकर अपना डिजिटल आईडी नंबर डालना होगा. अकाउंट बनने के बाद, खरीदार सरकार द्वारा मंजूर किए गए क्षेत्रों में अपनी पसंद की प्रॉपर्टी सर्च कर सकते हैं. इस दौरान वे सही और सुरक्षित विकल्प चुनने के लिए वहां के लाइसेंस प्राप्त रियल एस्टेट ब्रोकर या डेवलपर्स से सीधे संपर्क भी कर सकते हैं.
प्रॉपर्टी फाइनल होने के बाद, खरीदार को पोर्टल पर अपने सभी जरूरी दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे, जिनकी सिस्टम द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से जांच की जाएगी. इसके बाद, मंजूर ऑनलाइन पेमेंट चैनलों के माध्यम से तय सरकारी फीस और ट्रांजैक्शन चार्ज का भुगतान करना होगा. फीस जमा होने पर पूरी खरीद प्रक्रिया का डिजिटल एग्रीमेंट तैयार होता है, जिसे सरकारी सिस्टम के ज़रिए ऑनलाइन ही नोटरी कर दिया जाता है, जिससे किसी कागज़ी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं पड़ती. ट्रांजैक्शन पूरा होते ही प्रॉपर्टी नेशनल रियल एस्टेट रजिस्ट्री में दर्ज हो जाती है और खरीदार को उनकी इलेक्ट्रॉनिक टाइटल डीड मिल जाती है.
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