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दिल्ली रहने के लिए दुनिया में सबसे सस्ती, लेकिन कमाई में क्यों है पीछे

किफायती और सस्ता होने के बाद भी दिल्ली 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' के मामले में दुनिया के टॉप 50 शहरों में भी जगह नहीं बना पाई. इस रैंकिंग में लोगों की क्रय शक्ति, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रदूषण, ट्रैफिक जाम में लगने वाला समय और मौसम जैसे कड़े मानकों को आधार बनाया गया था.

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रहने के लिए दुनिया का सबसे सस्ता शहर (Photo-Pexels)
रहने के लिए दुनिया का सबसे सस्ता शहर (Photo-Pexels)

देश की राजधानी दिल्ली को लेकर एक बेहद दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है. डॉयचे बैंक (Deutsche Bank) की 'मैपिंग द वर्ल्ड प्राइसेज 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में घर खरीदना और रोजमर्रा की जिंदगी जीना बेहद सस्ता है, लेकिन जब बात यहां के लोगों की कमाई की आती है, तो दिल्ली दुनिया के तमाम बड़े शहरों के मुकाबले काफी पीछे छूट जाती है.

इस रिपोर्ट में दुनिया भर के 69 बड़े शहरों की कीमतों, सैलरी और क्वालिटी ऑफ लाइफ की तुलना की गई है. रिपोर्ट का सबसे मजेदार पहलू यह है कि अगर आप दिल्ली में किसी रोमांटिक डेट पर जाते हैं, तो यह दुनिया के किसी भी बड़े शहर के मुकाबले आपकी जेब पर सबसे हल्की पड़ेगी. दिल्ली में एक 'चीप डेट' का औसत खर्च करीब 103 डॉलर यानी लगभग 9,920 रुपये आता है. इसके उलट, अगर आप दुनिया के सबसे महंगे शहर जिनेवा में डेट पर जाते हैं, तो आपको करीब 475 डॉलर (लगभग 45,750 रुपये) खर्च करने पड़ेंगे.

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प्रॉपर्टी की कीमतें

दुनिया के अन्य बड़े ग्लोबल शहरों की तुलना में दिल्ली में मकान या जमीन खरीदना अभी भी काफी किफायती है. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सिटी-सेंटर  में प्रॉपर्टी की औसत कीमत करीब 2.37 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है. इस लिहाज से दुनिया के सबसे महंगे रियल्टी मार्केट्स में दिल्ली 65वें पायदान पर आती है. दिलचस्प बात यह है कि डॉलर के मुकाबले पिछले एक दशक में दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतें 9.8% गिरी हैं, हालांकि साल 2019 के बाद से इनमें 15.7% की रिकवरी भी देखी गई है.

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न्यूयॉर्क से 90% कम कमाते हैं दिल्लीवाले

सस्ता घर और सस्ता रहन-सहन होने के बावजूद, दिल्ली में काम करने वालों की सैलरी दुनिया में सबसे कम आंकी गई है. इन हैंड  सैलरी के मामले में दिल्ली 69 शहरों की सूची में नीचे से तीसरे नंबर यानी 66वें स्थान पर है. दिल्ली में एक औसत नौकरीपेशा टैक्स कटने के बाद हर महीने करीब 538 डॉलर (यानी लगभग 51,800 रुपये) कमाता है.

यह कमाई न्यूयॉर्क की औसत सैलरी का सिर्फ 10 फीसदी ही है. रिपोर्ट में यह भी देखा गया कि साल 2012 में दिल्ली की औसत सैलरी जहां 633 डॉलर थी, वह 2026 में घटकर 538 डॉलर रह गई है. यानी बीते एक दशक में डॉलर के मुकाबले दिल्लीवालों की सैलरी 17.7% घटी है. इसके विपरीत, दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर में मिलती है, जहां एक कर्मचारी महीने में औसतन 8.05 लाख रुपये (8,363 डॉलर) घर ले जाता है.

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रोजमर्रा का खर्च बेहद कम, पर 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' में दिल्ली पीछे

सैलरी भले ही कम हो, लेकिन दिल्ली में रोजमर्रा के खर्चे आम आदमी के बजट में हैं. उदाहरण के लिए, दिल्ली में एक कप रेगुलर कैपुचिनो कॉफी की कीमत करीब 231 रुपये है, जो इसे कॉफी के लिए दुनिया के 10 सबसे सस्ते शहरों में शामिल करती है. वहीं, शहर के मुख्य हिस्से में 3-बेडरुम (3-BHK) का फ्लैट करीब 65,970 रुपये महीने के किराए पर मिल जाता है.

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