भारतीय बाजार के लिए ये हफ्ता काफी खराब होता हुआ दिख रहा है. सोमवार के बाद एक बार फिर भारतीय बाजार तेजी से बिखरा है. इंट्राडे के दौरान 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 1,147.15 अंक या 1.58 प्रतिशत गिरकर 71,333.14 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी50 390.40 अंक या 1.73 प्रतिशत गिरकर 22,230.05 पर पहुंच गया. हालांकि बाद के कारोबार के दौरान इसमें थोड़ी रिकवरी देखने को मिली.
कारोबार बंद होने तक सेंसेक्स 570.59 अंक टूटकर 71,909.70 पर था. वहीं निफ्टी करीब 200 अंक गिरकर 22,421 पर आ गया. मिडकैप और स्मालकैप इंडेक्स में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली. यह दोनों इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा टूटकर कारोबार करते हुए दिखाई दिए. बाजार की अस्थिरता का इंडेक्स इंडिया VIX 13.82 प्रतिशत बढ़कर 15.36 पर पहुंच गया.
बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) पिछले सत्र के 471.86 लाख करोड़ रुपये से लगभग 10.08 लाख करोड़ रुपये घटकर 461.77 लाख करोड़ रुपये हो गया, क्योंकि शेयरों में भारी गिरावट आई. लेकिन मार्केट क्लोज होने के बाद यह थोड़ी रिकवरी पर आ गया और कुल नुकसान 6 लाख करोड़ रुपये रहकर बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 466 लाख करोड़ पर आ गया.
क्यों हो रही गिरावट?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं. इन लोगों ने 30 सितंबर को 10,148 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे. सितंबर के अंतिम दो सत्रों में विदेशी निवेशकों ने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे हैं. इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बुधवार के सत्र में 11,271 करोड़ रुपये के शेयर खरीदा है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो जाने के बाद यह निवेश के लिए ज्यादा आकर्षक दिखाई दे रहा है. जिस कारण ज्यादातर निवेशक इस मार्केट में पैसा लगाने के बारे में विचार कर रहे हैं.
कच्चे तेल की कीमत में उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमतों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है. दिसंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट वायदा की कीमतें सुबह 11:03 बजे 96.55 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर दोपहर 1:07 बजे तक 100.20 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं.
रुपया प्रति डॉलर 96 के पार
भारतीय करेंसी लगातार दबाव महसूस कर रही है. रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे गिर गया है. आखिरी जांच में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.19 के निचले स्तर पर पहुंच गया है. रुपये में गिरावट विदेशी फंड़ों की निरंतर निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आई, जो गुरुवार को बाजार में हुई बिकवाली के प्रमुख कारक बने रहे.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)