शेयर बाजार (Share Market) में बीते सप्ताह तगड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. लेकिन कुल मिलाकर मार्केट के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट में रहे थे. जहां BSE Sensex सप्ताहभर में 194 अंक की गिरावट में रहा, तो वहीं NSE Nifty में 64 अंकों की कमी आई. इस बीच सेंसेक्स की टॉप-10 में से छह को घाटा, जबकि चार को फायदा हुआ.
कल सोमवार से शुरू होने वाले सप्ताह की बात करें, तो शेयर बाजार का चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी. इनमें चार सबसे आगे हैं. इनमें अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते बढ़ी ग्लोबल टेंशन से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तक शामिल हैं.
पहला फैक्टर: US-Iran युद्ध पर अपडेट
शेयर बाजार पर ग्लोबल टेंशन का असर अगले हफ्ते भी देखने को मिल सकता है. अमेरिका का ईरान (US Iran War) पर लगातार हमलों का सिलसिला जारी है और ईरानी सेना की ओर से भी लगातार पलटवार किया जा रहा है. इस बीच दुनिया की कुल तेल जरूरत के 20 फीसदी सप्लाई के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद (Hormuz Strait Closure) किए जाने की खबरें बाजार पर निगेटिव असर डाल सकती हैं.
दूसरा फैक्टर: कच्चे तेल की कीमतें
जहां एक ओर वेस्ट एशिया फिर से सुलग रहा है और अमेरिका-ईरान की बीच जंग तेज होती जा रही है. इस बीच बीते सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में युद्ध से जुड़े हर एक अपडेट के साथ बड़ा चेंज देखने को मिला था और अगले सप्ताह भी Crude Oil Price बाजार की चाल पर असर डाल सकता है.
बता दें कि तमाम उथल-पुथल के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (76 डॉलर प्रति बैरल), WTI Crude प्राइस 71 डॉलर प्रति बैरल और मर्बन क्रूड का दाम भी करीब 71 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था. इसकी कीमतों में उछाल दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है और ये बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ सकता है.
तीसरा फैक्टर: कंपनियों के तिमाही नतीजे
शेयर मार्केट की चाल पर असर डालने वाला अगला फैक्टर तमाम कंपनियों द्वारा जारी किए जा रहे तिमाही नतीजे हैं. पीटीआई की रिपोर्ट में रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च विभाग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा कि FY27 की पहली तिमाही में अर्निंग रिपोर्ट्स बाजार की चाल पर असर डालेंगी और कंपनियों के रिजल्ट्स पर मैनेजमेंट की टिप्पणियों की बड़ी भूमिका होगी. बता दें अगले हफ्ते HCL Tech, Tech Mahindra, Union Bank, Fedral Bank समेत अन्य दिग्गज कंपनियों के नतीजे आएंगे.
चौथा फैक्टर: FPIs की वापसी का असर
शेयर बाजार पर जहां तमाम ग्लोबल टेंशनों का बुरा असर पड़ता नजर आ रहा है, तो वहीं कई महीनों की लंबी बेरुखी के बाद अचानक भारतीय शेयर बाजार में हुई विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की वापसी का सकारात्मक असर दिख सकता है. चार महीने की तगड़ी बिकवाली के बाद आखिरकार एफपीआई ने जुलाई महीने में अब तक 15,157 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की है.
महंगाई के आंकड़े भी आएंगे
शेयर बाजार निवेशकों की नजर इन सब बड़े कारकों के साथ ही मानसून के रुझान पर भी टिकी हुई है. इसके अलावा अगले सप्ताह जारी किए जाने वाले CPI महंगाई दर के आंकड़े, थोक महंगाई दर के डेटा के साथ ही भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आने वाले उतार-चढ़ाव भी फोकस में रहेंगे.
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपार्ट्स की सलाह जरूर लें.)