अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर खत्म हो गया है और जंग फिर शुरू हो चुकी है, जिस कारण कच्चे तेल के दाम फिर से भागने लगे है और दुनिया एक बार फिर डर के साए में आ चुकी है. इस जंग के फिर शुरू होने से एशिया में ज्यादा डर फैला हुआ है, क्योंकि अब एनर्जी आने का रास्ता बंद हो चुका है और कारोबार का लेनदेन भी प्रभावित होने की आशंका है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता समाप्त हो गया है. इसके बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों की एक नई लहर शुरू की और उसके दक्षिणी तट पर स्थित ठिकानों को निशाना बनाया. ट्रंप ने कहा कि ये हमले मंगलवार को जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमले के 'प्रतिशोध' में किए गए थे. कुछ घंटों बाद, ईरान ने कहा कि उसने इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए नए अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है.
दोनों देशों के बीच जंग फिर से शुरू होने से भारत समेत विश्व के अन्य देशों के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है. पिछले कुछ महीनों में यह भी क्लियर हो चुका है कि इससे महंगाई बढ़ सकती है, सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. साथ ही एनर्जी का भी संकट आ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं भारत में कौन-कौन से सेक्टर प्रभावित होगी.
जंग जारी रहा तो क्या-क्या होगा असर?
एनर्जी: ग्लोबल यूज का ज्यादातर तेल और LNG का हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिसका इस्तेमाल ईरान ने अमेरिका के खिलाफ जंग में हथियार के रूप में किया है. ईरान ने आर्थिक संकट पैदा करने और अन्य देशों पर दबाव बनाने के लिए इस प्रमुख जलमार्ग को रोका ताकि अमेरिका ईरान की मांगों को मान ले. यह स्वाभाविक है कि ईरान अपनी पुरानी रणनीति पर लौटकर बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगा. इसका मतलब होगा जहाजों पर हमला करना और महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार को बाधित करना, जिससे आपूर्ति में बाधा आएगी और कीमतें बढ़ेंगी.
एविएशन सेक्टर: मिसाइल और सुरक्षा खतरों के कारण ईरान और आसपास के हवाई क्षेत्र में आवागमन प्रतिबंधित था. एयरलाइंस को लंबे मार्ग अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे ऑपरेटरों के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी लागत बढ़ गई. साथ ही उड़ान की अवधि भी बढ़ गई है.
इंश्योरेंस सेक्टर: जहाजों को होने वाले गंभीर खतरे के कारण समुद्री बीमा ग्लोबल व्यापार के लिए सबसे तेजी से बढ़ती लागतों में से एक बन गया है.
उर्वरक: विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र यूरिया, अमोनिया, सल्फर और अन्य उर्वरकों का प्रमुख सोर्स है. इस क्षेत्र में व्यवधानों के कारण आपूर्ति कम हो गई और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. भारत, ब्राजील, कनाडा और उप-सहारा अफ्रीका के किसानों पर न केवल उच्च लागत बल्कि आपूर्ति में व्यवधान का भी गहरा प्रभाव पड़ा है.
ऑटोमोबाइल सेक्टर: इस क्षेत्र पर दोहरी मार पड़ी है. ईंधन की ऊंची कीमतों ने उपभोक्ताओं की खरीदने के पावर को कम कर दिया, वहीं पुर्जों की आपूर्ति में व्यवधान ने ऑटोमोबाइल उत्पादन को प्रभावित किया है. लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण लागत में भी वृद्धि हुई है.
पर्यटन: वैश्विक स्तर पर, और विशेष रूप से इस क्षेत्र में, अनिश्चितता ने पर्यटन को प्रभावित किया. किराए में बढ़ोतरी, असुरक्षित हवाई क्षेत्र और अचानक हमलों के कारण पर्यटकों ने पश्चिम एशिया क्षेत्र की यात्रा से परहेज किया है.
डिफेंस सेक्टर : भविष्य में अनिश्चितता की आशंका के चलते सरकारों ने रक्षा खर्च और खरीद में बढ़ोतरी की, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ चुका है.