शेयर बाजार की निगरानी करने वाली संस्था सेबी ने गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी पर बड़ी कार्रवाई की है, क्योंकि एक ऐसा मामला सामने आया है, जो आपको हैरान कर देगा. सेबी का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट ने 15.15 लाख करोड़ रुपये का फर्जी एक्सपोर्ट दिखाया है. यह कुल फर्जी निर्यात 99 फीसदी का है.
कई सालों तक राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की सबसे बड़ी सफल कंपनियों में से एक मानी जाती रही है. बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने वैश्विक स्वर्ण उद्योग में अपनी एक अलग पहचान बनाई. यह कंपनी कीमती धातुओं को रिफाइन करती है और दुनिया भर में आभूषणों का निर्यात करती रही है. इसका सालाना रेवेन्यू इतना अधिक था कि यह अक्सर भारत की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों में शुमार थी. हालांकि, अब इस कंपनी के खिलाफ जांच और ऑडिट के आदेश जारी किए गए हैं.
सेबी ने क्या दिया आदेश?
3 जून को जारी एक अंतरिम आदेश में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर चेयरमैन राजेश मेहता को शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया. नियामक ने पांच वित्तीय वर्षों में फैले भारी वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया, जिसमें 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू की जानकारी फर्जी पाई गई है. आशंका है कि शेयर बाजार में हेरफेर करने के लिए यह आंकड़ा दिखाया गया है.
अभी ये अंतिम फैसला नहीं
यह संख्या इतनी बड़ी है कि यह कई देशों के सालाना आर्थिक उत्पादन से भी अधिक है. हालांकि जांच अभी जारी है और SEBI का फैसला अभी अंतिम नहीं हैं, लेकिन इन आरोपों ने शेयर बाजार में हलचल मचा दी है, जिससे कॉर्पोरेट खुलासे, निगरानी और निवेशक संरक्षण के बारे में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.
SEBI ने क्या आरोप लगाए हैं?
SEBI की अंतरिम जांच में आरोप लगाया गया है कि FY21 से FY25 के बीच कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़े राजस्व (Revenue) को बहुत बड़े पैमाने पर गलत तरीके से दिखाया. नियामक के अनुसार लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व आंकड़ा वेरिफाई नहीं हो सका और पैसों में भारी गड़बड़ियां दिखाई दीं.
शिकायत के बाद शुरू की थी कार्रवाई
यह विवाद 11 मार्च, 2024 को सेबी को मिले एक शेयरहोल्डर्स की शिकायत से शुरू हुआ. शिकायत में असामान्य तरीके से बड़ी मात्रा में बकाया राशि पर सवाल उठाया गया था, जो कथित तौर पर दो साल से अधिक समय से पेंडिंग थी. इस तरह की लंबी अवधि तक लंबित बकाया अमाउंट अक्सर चिंता का विषय होती हैं, क्योंकि वे पेमेंट मिलने में कठिनाइयों या संभावित अनियमितताओं का संकेत दे सकती हैं.
इस शिकायत के बाद सेबी ने जांच शुरू की. अक्टूबर 2024 में, नियामक ने एक जांच टीम नियुक्त किया. बाद में उसने कंपनी के खातों की जांच करने और समूह द्वारा किए गए वित्तीय खुलासों को वेरिफाई करने के लिए फोरेंसिक ऑडिटर बीडीओ को नियुक्त किया.
खबर आते ही बिखरे शेयर
SEBI की कार्रवाई होते ही इस राजेश एक्सपोर्ट के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. राजेश एक्सपोर्ट के शेयर लोअर सर्किट पर आ गए और 5 फीसदी टूटकर 103.92 रुपये पर कारोबार कर रहा था.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की ममद जरूर लें.)