भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली. BSE पर बैंक का शेयर 1.03% चढ़कर ₹1,096.05 पर बंद हुआ. शेयर में यह बढ़त जून तिमाही के मजबूत वित्तीय नतीजों के बाद आई. अप्रैल-जून तिमाही में SBI का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 13.73% बढ़कर ₹24,113 करोड़ हो गया. कोर इनकम में बढ़ोतरी ने बैंक के नतीजों को सपोर्ट किया.
एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, जून तिमाही में SBI का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 10.23% बढ़कर ₹21,121.22 करोड़ रहा. पिछले साल की इसी तिमाही यानी अप्रैल-जून 2025 में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹19,160.44 करोड़ था. बैंक की कोर नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी करीब 15% बढ़कर ₹46,992 करोड़ हो गई. NII में बढ़ोतरी के पीछे ग्रॉस एडवांस में 18.63% की ग्रोथ प्रमुख कारण रही. हालांकि, डोमेस्टिक नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3% पर रहा. इसके बावजूद तिमाही आधार पर इसमें 0.07% की बढ़ोतरी हुई.
नॉन-इंटरेस्ट इनकम में गिरावट
SBI की नॉन-इंटरेस्ट इनकम जून तिमाही में 9% घटकर ₹15,293 करोड़ रही. फॉरेक्स और डेरिवेटिव्स से होने वाली आय में करीब 70% की गिरावट इसका प्रमुख कारण रही. बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ 9.73% रही. वहीं, लो-कॉस्ट करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) का हिस्सा 0.12% घटकर 39.36% रह गया.
जून तिमाही में SBI के फ्रेश स्लिपेज ₹7,046 करोड़ रहे. यह आंकड़ा एक साल पहले की समान तिमाही के ₹7,945 करोड़ से कम है, लेकिन मार्च तिमाही के ₹5,521 करोड़ से ज्यादा रहा. वहीं, 31 से 89 दिन तक बकाया रहने वाले, लेकिन अभी NPA नहीं बने एडवांस का आंकड़ा जून के अंत में बढ़कर ₹4,174 करोड़ हो गया. मार्च के अंत में यह ₹3,350 करोड़ था.
ग्रॉस NPA में सुधार
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला. 30 जून तक SBI का ग्रॉस NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) अनुपात घटकर 1.47% रह गया. 31 मार्च को यह 1.49% और एक साल पहले 1.83% था. NPA के लिए बैंक ने जून तिमाही में ₹3,359 करोड़ का प्रावधान किया. यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹4,934 करोड़ से कम है, लेकिन मार्च तिमाही के ₹3,140 करोड़ से ज्यादा रहा.
FY27 में 14-15% क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य
SBI का कुल कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो 30 जून तक 15.67% रहा. इसमें कोर कैपिटल बफर 12.89% था. SBI के चेयरमैन सी. एस. सेट्टी ने कहा कि बैंक वित्त वर्ष 2027 में 14-15% की क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रहा है. उनके मुताबिक, 10-11% की डिपॉजिट ग्रोथ इस क्रेडिट विस्तार को फंड करने में मदद कर सकती है.
FCNR(B) से अब तक $6 बिलियन जुटाए
चेयरमैन सी. एस. सेट्टी ने बताया कि बैंक ने FCNR(B) विंडो के तहत अब तक करीब 6 बिलियन डॉलर जुटाए हैं. उनका अनुमान है कि सितंबर में स्पेशल विंडो बंद होने तक यह रकम बढ़कर 10 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. यह फंडिंग SBI की आगे की क्रेडिट ग्रोथ और लिक्विडिटी रणनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
निवेशकों के लिए क्या मायने?
SBI के तिमाही नतीजों में मुनाफे और कोर इनकम में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है. साथ ही ग्रॉस NPA अनुपात में सुधार बैंक की एसेट क्वालिटी को लेकर राहत देता है.