शेयर बाजार में बहुत सी कंपनियां निवेशकों को मोटा रिटर्न दे जाती हैं तो कई कंपनियां पैसा फंसा देती हैं. आज हम एक ऐसे ही शेयर के बारे में बता रहे हैं, जिसने निवेशकों का सारा पैसा डूबो दिया है और अब स्टॉक एक्सचेंज ने इसे मार्केट से डी-लिस्ट करने की मंजूरी दे दी है.
हालांकि, इस कंपनी के शेयर पहले से ही मर्केट में कारोबार नहीं कर रहे थे और अब स्टॉक मार्केट से बाहर कर दिए जाएंगे. मार्केट से बाहर होने के बाद 6.5 लाख निवेशकों का पूरा पैसा डूब जाएगा. किसी भी निवेशकों को एक रुपये वापस नहीं मिलेगा.
हम जिस शेयर की बात कर रहे हैं, उसका नाम जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) है. इसे कुछ समय पहले ही अडानी ग्रुप ने खरीदा है. अब ये कंपनी भारतीय शेयर बाजार से बाहर होने जा रही है. कंपनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की हरी झंडी के बाद अब स्टॉक एक्सचेंजों ने भी डीलिस्टिंग को अंतिम मंजूरी दे दी है.
18 जून को बाहर हो जाएगी ये कंपनी
18 जून 2026 से जयप्रकाश एसोसिएट्स के शेयरों की ट्रेडिंग शेयर बाजार में पूरी तरह बंद हो जाएगी, क्योंकि कंपनी अब दिवालिया हो चुकी है. इसे 17 मार्च को एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 की धारा 31 के तहत रिजॉल्यूशन योजना को मंजूरी दी थी. दिवालिया होने के बाद इसे अडानी ग्रुप ने 14000 करोड़ से ज्यादा रकम में खरीदा है.
6.5 लाख शेयरधारकों का पैसा हुआ जीरो
कंपनी के दिवालिया होने से सबसे बड़ा झटका, उन निवेशकों को लगा है, जिनके पास इस कंपनी के शेयर थे. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी में 71.23% हिस्सेदारी पब्लिक के पास है. लगभग 6.5 लाख शेयरधारकों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा क्योंकि कंपनी के दिवालिया होने के बाद कोई स्टॉक होल्डर्स पैटर्न नहीं रखा जाएगा.
रिजॉल्यूशन प्लान के नियमों के मुताबिक, जयप्रकाश एसोसिएट्स के मौजूदा शेयरधारकों को उनके शेयरों के बदले कोई पैसा नहीं मिलेगा (Zero Consideration). कंपनी का पुराना शेयरहोल्डिंग ढांचा पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. यानी निवेशकों का लगाया गया पैसा पूरी तरह डूब चुका है और उनके पास मौजूद शेयरों की कीमत अब जीरो हो गई है.
क्या करती है ये कंपनी?
जेएएल का कारोबार अलग-अलग सेक्टर्स में फैला हुआ है, जिसमें निर्माण, रियल एस्टेट, बिजली और होटल शामिल हैं. इसके अलावा, इसका एक फॉर्मूला वन सर्किट भी है. शेयर का मार्केट कैपिटलाइजेशन 50,000 करोड़ रुपये था. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक ICICI बैंक की कंपनी में 7.7% हिस्सेदारी थी.
JAL का डीलिस्ट होना निवेशकों के लिए एक सबक है कि कम कीमत वाला शेयर नुकसानदायक साबित हो सकता है और भारी कर्ज एक बड़ा खतरा है. नेटिज़न्स का कहना है कि सिर्फ इसलिए निवेश न करें क्योंकि शेयर की कीमत 80-90% गिर गई है. सस्ते शेयरों के बजाय मजबूत स्टॉक में निवेश के बारे में सोचना चाहिए.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)