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Israel Iran War Impact on India: टेंशन में भारत भी... ईरान के इजरायल पर हमले तेज, इन कंपनियों का अब क्या होगा?

Israel US Iran Tension: तमाम भारतीय कंपनियों का इजरायल में कारोबार है, जहां पर ईरान लगातार टारगेट कर रहा है. ऐसे में भारत को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसके साथ ही शेयर बाजार के लिए भी संकट की घड़ी है, सोमवार को बाजार पर इसका असर दिखने को मिल सकता है.

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इजरायल-ईरान में युद्ध से भारी आर्थिक नुकसान की आशंका. (Photo: ITG)
इजरायल-ईरान में युद्ध से भारी आर्थिक नुकसान की आशंका. (Photo: ITG)

इजरायल और ईरान के बीच युद्ध में अब अमेरिका खुलकर इजरायल का साथ दे रहा है. एक तरफ इजरायल और अमेरिका की जुगलबंदी है, तो दूसरी तरफ फिलहाल अकेला ईरान है. इस जंग के बढ़ने से पूरी दुनिया में अब ये चर्चा हो रही है कि रूस और चीन की क्या भूमिका रहती है. हालांकि आर्थिक तौर पर ये युद्ध दुनिया को और तबाह कर देगा. क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका ने खुद को इस युद्ध में झोंक दिया है.  

भारत के लिए भी आर्थिक तौर पर संकट का दौर है, तमाम भारतीय कंपनियों का इजरायल में कारोबार है, जहां पर ईरान लगातार टारगेट कर रहा है. ऐसे में भारत को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. खासकर ये युद्ध उन भारतीय कंपनियों के लिए भी ये संकट खड़ा कर सकता है, जिनका इजराइल (Indian Companies In Israel) से सीधा कनेक्शन है. सोमवार भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों पर इस युद्ध का निगेटिव असर देखने को मिल सकते हैं. क्योंकि जंग बढ़ने की आशंका से इन कंपनियों के बिजनेस पर संकट बढ़ती जा रही है.

इन कंपनियों का Israel में कारोबार

भारत के साथ इजराइल के अच्छे संबंध हैं और दोनों ही देशों में व्यापारिक रिश्ता भी गहरा है. इसी हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के दौरे से लौटे हैं, दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर समझौते हुए हैं. अगर भारत और इजरायल के बीच कारोबार देखें तो 500 से ज्यादा इजराइली कंपनियों का भारत में बिजनेस हैं, तो कई भारतीय कंपनियां भी इजराइल में बिजनेस कर रही हैं. 

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इजराइल के हाइफा पोर्ट में 70% हिस्सेदारी

गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप को इजरायल में बड़ा निवेश है. दरअसल, साल 2022 में ही अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड (APSEZ) ने ज्वाइंट वेंचर में इजरायल के हाइफा पोर्ट (Haifa Port) के प्राइवेटाइजेशन का टेंडर हासिल किया था. ये टेंडर करीब 1.8 अरब डॉलर का था. इस वेंचर में Adani Port की हिस्सेदारी 70 फीसदी है. 

इजरायल-हमास जंग में भी दिखा था असर

इससे पहले इजरायल और हमास में युद्ध के दौरान भी Adani Port के शेयरों पर असर देखने को मिला था. उस समय भी कंपनी का स्टॉक 5 फीसदी के आसपास टूट गया था. 

इजराइल में बिजनेस करने वाली दूसरी बड़ी कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स (Sun Pharma) है. इजराइल की दिग्गज दवा कंपनी टैरो फार्मास्युटिकल्स में Sun Pharma बड़ी स्टेकहोल्डर है. फार्मा सेक्टर में अन्य भारतीय कंपनियों का भी इजराइल कनेक्शन है, जिसमें डॉ रेड्डी (Dr Reddy) और ल्यूपिन (Lupin) जैसे नाम शामिल हैं.

आईटी कंपनियों का फैला है कारोबार

आईटी सेक्टर में भारत की बड़ी कंपनियों का कारोबार भी इजराइल में फैला हुआ है. इसमें Tata Group की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और विप्रो (Wipro) जैसी कंपनियां शामिल हैं. जंग के हालात में इन कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिल सकता है. टीसीएस के इजराइल में करीब 1000 कर्मचारी काम कर रहे हैं. 

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इंजीनियरिंग और R&D सर्विस में भारतीय कंपनी Larsen & Toubro (L&T) की इजरायल में उपस्थिति है. वहीं Indian Oil Corporation (IOC) की इजरायल के साथ टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में साझेदारी है. 

बैंकिंग-ज्वेलरी कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के सबसे बड़े बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की भी इजराइल में मौजूदगी है और यहां जारी युद्ध से कारोबार प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है. इसके अलावा इस जंग से भारत और इजराइल के बीच रत्न व आभूषण के कारोबार से जुड़ी कंपनियों पर असर पड़ सकता है. इजरायल में भारतीय कंपनियां मुख्य रूप से IT, फार्मा, बैंकिंग, पोर्ट संचालन, डिफेंस, और टेक्नोलॉजी सेक्टर में सक्रिय हैं. अधिकांश कंपनियों से वहां ऑफिस और R&D सेंटर हैं. 

भारत-इजरायल के बीच मजबूत व्यापार

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और इजरायल के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.6 से 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास रहा था. यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्ष की तुलना में कम है, क्योंकि क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक मांग में सुस्ती का असर व्यापार पर पड़ा है. 

इस दौरान भारत का इजरायल को लगभग 2.1 अरब डॉलर का निर्यात रहा, भारत से भेजी जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में हीरे और कीमती रत्न, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कृषि उत्पाद शामिल रहे. वहीं इजरायल से भारत का आयात लगभग 1.5 अरब डॉलर के आसपास रहा. इजरायल से आयात होने वाली मुख्य वस्तुओं में रसायन, उर्वरक, रक्षा उपकरण, हाई-टेक मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स प्रमुख हैं. 

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इससे पहले दोनों देशों के बीच साल 2022-23 के दौरा कुल व्यापार लगभग $10.7 अरब डॉलर था, जिसमें भारत का निर्यात लगभग $8.45 अरब डॉलर और आयात लगभग $2.3 अरब डॉलर रहा. यह साल भारत-इज़रायल व्यापार का इतिहासिक उच्च स्तर माना जाता है. 

लेकिन साल 2023-24 के दौरान व्यापार में गिरावट आई और लगभग $6.5-$6.53 अरब डॉलर रहा. जिसका कारण वैश्विक आर्थिक दबाव, सुरक्षा चुनौतियां और व्यापार रूट में बाधाएं बताई गईं. यानी साल दर साल व्यापार में गिरावट आई हैं. 

लेकिन भारत का व्यापार संतुलन इजरायल के साथ सकारात्मक रहा, यानी भारत का निर्यात आयात से अधिक रहा. इजरायल एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और तकनीकी साझेदार है, खासकर रक्षा, कृषि तकनीक, साइबर सुरक्षा और नवाचार के सेक्टर में. अब दोनों देश भविष्य में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं.

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