उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहा आपराधिक मामला सोमवार को खारिज कर दिया गया. अमेरिकी जज निकोलस गरौफिस ने अडानी पर लगे आरोपों को हटाने की मंजूरी दी, लेकिन साथ ही अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मामले वापस लेने के तरीके पर गंभीर सवाल भी उठाए. जज ने कहा कि केस खत्म करने की प्रक्रिया में जो गड़बड़ियां सामने आई हैं, वे चिंता बढ़ाने वाली हैं.
यह फैसला उस सुनवाई के बाद आया, जिसमें जज गरौफिस ने खुद जस्टिस डिपार्टमेंट से मामला वापस लेने की वजह पूछी थी. अदालत ने यह भी जांचा कि क्या नवंबर 2024 में अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश के गौतम अडानी के वादे का केस खत्म करने के फैसले से कोई संबंध था. बाद में जज ने कहा कि उन्हें संतोष है कि यह निवेश प्रस्ताव मामले को खारिज करने के फैसले का आधार नहीं था.
इस फैसले के बाद गौतम अडानी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. उन्होंने अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट करके अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत किया. गौतम अडानी ने एक्स पर लिखा, 'मैं अमेरिकी अदालत के फ़ैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं. इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और क़ानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट बना रहा. मैं उन सभी लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने हम पर, सिस्टम पर और न्याय दिलाने की भारत की क्षमता पर कभी भरोसा नहीं खोया. हम जरूरी काम करते रहेंगे: अपने देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी बनी रहे और खुद से बढ़कर किसी मकसद के लिए काम करना. यही हमारा संकल्प है. जय हिंद.'
जस्टिस डिपार्टमेंट के फैसले पर जज की टिप्पणी
जज गरौफिस ने कहा कि संघीय अभियोजकों के किसी मामले को आगे बढ़ाने या वापस लेने के फैसले की समीक्षा में अदालत की भूमिका सीमित होती है. इसके बावजूद उन्होंने गौतम अडानी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा केस वापस लेने की प्रक्रिया पर चिंता जताई. जज के मुताबिक, केस वापस लेने का फैसला जांच करने वाले अभियोजकों और एजेंट्स की राय लिए बिना लिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेंट मैककॉट्टर ने कई संघीय कार्यालयों के अधिकारियों की पेशेवर राय को दरकिनार करते हुए अपनी अलग राय के आधार पर फैसला लिया.
अदालत ने कहा कि आरोपपत्र खारिज करने के फैसले में दिखाई देने वाली ये प्रक्रियागत गड़बड़ियां चिंता पैदा करती हैं. हालांकि, जज गरौफिस ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला खारिज करने का उनका आदेश जस्टिस डिपार्टमेंट की कार्रवाई से उनकी सहमति का संकेत नहीं है. बता दें कि रिचर्ड ट्रेंट मैककॉट्टर (Richard Trent McCotter) एक अमेरिकी वकील हैं, जो वर्तमान में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) में प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल के रूप में कार्यरत हैं.
यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने केस क्यों वापस लिया?
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने 4 जुलाई को दाखिल की गई फाइलिंग का हवाला दिया. इसमें ट्रेंट मैककॉट्टर ने बताया कि उन्होंने बचाव पक्ष के वकीलों और जस्टिस डिपार्टमेंट के अन्य वकीलों से मुलाकात की थी. इसके बाद उन्होंने अपनी रिसर्च और कानूनी विश्लेषण के आधार पर गौतम अडानी के खिलाफ मामला वापस लेने का फैसला किया. मैककॉट्टर के मुताबिक, मामला मुख्य रूप से विदेशी गतिविधियों से जुड़ा था, जिसे अदालत में साबित करना मुश्किल हो सकता था. साथ ही, उनके आकलन में यह मामला एजेंसी की मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप भी नहीं था. ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में हाई-प्रोफाइल व्हाइट-कॉलर मामलों को लेकर यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट के रुख में बदलाव की चर्चा के बीच यह फैसला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
गौतम अडानी पर क्या आरोप लगाए गए थे
अमेरिकी अभियोजकों ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और अन्य लोगों पर कथित रिश्वतखोरी से जुड़े आरोप लगाए थे. अभियोजन पक्ष का आरोप था कि भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी, ताकि अडानी ग्रुप की एक सहयोगी कंपनी को सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ी मंजूरी मिल सके. अमेरिकी अभियोजकों का यह भी आरोप था कि अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की एंटी-करप्शन प्रैक्टिसेज के बारे में गलत जानकारी दी गई. अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया. गौतम अडानी इन आपराधिक आरोपों के मामले में अमेरिकी अदालत के सामने पेश नहीं हुए.
$10 अरब के निवेश का क्या कनेक्शन था
गौतम अडानी ने 15 जुलाई को अमेरिकी अदालत में दिए गए एक शपथपत्र में माना कि उन्होंने पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था. उन्होंने बताया कि उनके वकीलों ने यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट के साथ बैठकों में यह कहा था कि यह निवेश प्रस्ताव मामले के समाधान का हिस्सा बन सकता है. अडानी के वकील रॉबर्ट जियुफ्रा ने भी कहा था कि प्रतिवादियों की ओर से जस्टिस डिपार्टमेंट को बताया गया था कि अडानी ग्रुप अमेरिका में इस निवेश प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. हालांकि, जज गरौफिस ने बाद में कहा कि उन्हें संतोष है कि 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा गौतम अडानी के खिलाफ केस खारिज करने के फैसले का कारण नहीं बना.
ईरान सैंक्शन के मामले में अलग समझौते
अडानी से जुड़े कुछ अन्य अमेरिकी मामले अलग समझौतों के जरिए निपटाए गए हैं. एक अलग सिविल मामले में अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के साथ गौतम अडानी 60 लाख डॉलर और सागर अडानी 1.2 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हुए. इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले के निपटारे के लिए अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट को 27.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति जताई.