दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के भविष्य पर एक रोडमैप शेयर किया, जिसपर बाकी देशों ने भी सहमति जाहिर की. ब्रिक्स देशों ने ग्लोबल स्तर पर सभी देशों के समान प्रतिबद्धता और डिसीजन मेकिंग में भागीदारी पर जोर दिया.
ब्रिक्स देशों का रोडमैप रखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को भी फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए, क्योंकि अभी ग्लोबल पावर एक पिरामिड की तरह है, जहां पर ऊपरी भाग वाले ही कुछ देश दुनिया पर फैसला ले रहे हैं और बाकी देश भुगत रहे हैं.
ब्रिक्स देशों ने जंग और टकराव को लेकर भी चिंता जाहिर की. साथ ही BRICS ने वैश्विक मुद्दों पर ऐसा तरीका अपनाने को कहा, जिसमें सभी देशों को समान अधिकार मिले और वो भी ग्लोबल डिसीजन मेकिंग में भूमिका निभा सकें. साथ ही उनके भी हितों का सम्मान किया जाए.
मनमाने टैरिफ को लेकर भी जताई चिंता
ब्रिक्स देशों ने अमेरिका को सीधा संदेश देते हुए मनमाने टैरिफ को लेकर चिंता जाहिर की. ब्रिक्स देशों ने एकतरफा टैरिफ, नॉन-टैरिफ बाधाओं को लेकर आलोचना की. ब्रिक्स के अनुसार, कहा कि टैरिफ से वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन में बाधा आती है. ऐसे में कोई भी देश किसी भी देश पर एकतरफा टैरिफ नहीं लगा सकता है.
इन देशों ने एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की निंदा की और कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और विकास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के लिए नुकसानदेह हैं. घोषणापत्र में WTO के विवाद-निपटान तंत्र को पूरी तरह से और दो-स्तरीय रूप में बहाल करने की मांग की गई, जिसमें नए अपीलीय निकाय सदस्यों की नियुक्ति भी शामिल है.
ब्रिक्स ने WTO में शामिल होने के लिए इथियोपिया और ईरान की कोशिशों का समर्थन किया और उन 53 अफ्रीकी देशों के लिए चीन की जीरो-टैरिफ सुविधा का ज़िक्र किया, जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध हैं.
अमेरिका ने जब लगाया था टैरिफ
ब्रिस देशों के घोषणा में टैरिफ को लेकर ये बातें तब सामने आई हैं, जब अमेरिका ने चीन-भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर सबसे ज्यादा और भारत पर भी अच्छा-खास टैरिफ ऐलान किया था. अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल खरीदने को लेकर भी देशों को धमकी दी है. रूसी तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ और ईरानी तेल खरीदने पर व्यापार बंद करने की बात कही है. इन्हीं चीजों को लेकर ब्रिक्स देशों ने चिंता जाहिर की है.