अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे चोरी के आरोपियों से पाई-पाई वसूलने की तैयारी है. नकद बरामदगी के अलावा आरोपियों की संपत्तियों के जरिये भरपाई की जाएगी.
रिपोर्ट की मानें तो बीएनएसएस की धारा-107 के तहत अयोध्या पुलिस रिकवरी करेगी. इस प्रावधान में अपराध या अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों की रिकवरी की जाएगी. ये जांच की जा रही है कि आखिर ट्रस्ट की कितनी रकम और कितने का सोना-चांदी गायब है.
इस बीच अयोध्या में 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस बैठक में दान में मिली राशि की गिनती में गड़बड़ी, उसकी जांच, कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे और मीडिया में चल रही चर्चाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई. साथ ही आगे की व्यवस्थाओं को लेकर भी विचार किया गया.
ट्रस्ट ने बताया कि 2020 में स्थापना के बाद केवल 6 साल से भी कम समय में भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर का निर्माण पूरा कर लिया गया. इस दौरान मंदिर परिसर में बने अन्य मंदिरों में भी प्राण-प्रतिष्ठा और धार्मिक विधियां पूरी की गईं. ट्रस्ट के अनुसार निधि समर्पण अभियान और दान से अब तक कुल 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य बड़े कार्यों में खर्च किए गए. वहीं 31 मार्च 2026 तक चढ़ावे के रूप में 582 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से 391 करोड़ रुपये संचालन खर्च में उपयोग हुए. बाकी राशि बैंक खातों में सुरक्षित रखी गई है.
चढ़ावा चोरों पर गाज गिरनी तय
वहीं दूसरी ओर चढ़ावा चोरी के सभी आरोपियों की संपत्तियों का आकलन किया जा रहा है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि मंदिर से जुड़ने के बाद किसकी कितनी संपत्ति बढ़ी है. कुछ आरोपियों की संपत्ति में अब तक की जांच में कई गुना संपत्ति बढ़ी पाई गई है.
इस बीच पता चला है कि अब तक गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 वाराणसी की एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारी थे. एजेंसी से ही इन्हें वेतन मिल रहा था. एजेंसी ने मंदिर में नकदी गिनने का काम करने के लिए इन लोगों को भेजा था. रिपोर्ट के मुताबिक इस प्राइवेट एजेंसी का नाम सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज है. इस एजेंसी की शुरुआत दिसंबर 2017 में वाराणसी के रजिस्टर्ड एड्रेस के साथ हुई.
बाकी दो लोग राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को ट्रस्ट से वेतन मिलता था. जबकि सुभाष श्रीवास्तव जो एक बैंक कर्मचारी रहा था, वेतन नहीं लेता था.
सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक और डायरेक्टर गौरव सिंह ने बताया कि उनकी एजेंसी को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या स्थित नया घाट ब्रांच ने कैश गिनने की प्रक्रिया के लिए हायर किया था. यह ब्रांच उन तीन बैंक ब्रांच में से एक है, जहां श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अकाउंट है.
उन्होंने बताया कि SBI ने 19 लोगों को कैश काउंटिंग टीम में शामिल करने के लिए मांगा था. इसके बाद एजेंसी ने इन लोगों को हायर करके बैंक को उपलब्ध कराया. उन्होंने बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट से उनका कोई लेना-देना नहीं है. कैश काउंटिंग टीम में शामिल सभी 19 लोगों को करीब 20 हजार रुपये महीने वेतन मिलता था.
बैंक का ट्रस्ट को लेकर बड़ा खुलासा
वहीं SBI ने बताया है कि इस मामले में वो पूरी तरह से एसआईटी के साथ सहयोग कर रहा है. जनवरी 2024 से SBI ट्रस्ट को बैंकिंग सर्विस दे रहा है. इस बीच पता चला है कि SBI ब्रांच के अधिकारियों का आरोप है कि ट्रस्ट के सदस्यों ने बैंक पर कुछ खास लोगों को काउंटिंग टीम में शामिल करने का प्रेशर बनाया था.
इस मामले में SIT अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, रामशंकर मिश्रा और करुणेश पांडेय शामिल हैं. तलाशी के दौरान इन 7 आरोपियों से करीब 80 लाख रुपये नकदी भी बरामद हुआ है.
वहीं जांच के दौरान एक नया खुलासा हुआ है. खबर ये है कि यह करीब 3 महीने पहले ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मंदिर में दान राशि की गिनती करने वाले कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियों पर चिंता जताई थी. एसबीआई को दान में मिलने वाली राशि और कीमती सामान के रखरखाव में गड़बड़ी का शक था. उसने मंदिर के दान पात्रों में एकत्रित होने वाली रकम गिनने वाले कर्मचारियों को बदलने की सिफारिश की थी. लेकिन आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों के दखल देने से यह कदम नहीं उठाया गया था.
अयोध्या पुलिस ने सात बैंकों से पिछले पांच वर्ष का रिकॉर्ड तलब किया है. इन बैंकों में ही चढ़ावा चोरी के आरोप में पकड़े गए आठ आरोपियों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते हैं. इसके पीछे फाइनेंशियल ट्रेल का पता लगाने की कोशिश वजह बताई जा रही है.
- दस्तावेज बताते हैं कि लवकुश मिश्रा के यहां से 14,25,000 रुपये नकद बरामद हुए.
- रामाशंकर मिश्रा के पास से 7,32,170 रुपये कैश मिलने का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा दो सफेद धातु के सिक्के और लगभग 24.72 ग्राम वजन का बिछुआ भी बरामद होने की जानकारी दस्तावेजों में दर्ज है.
- दस्तावेजों के अनुसार मनीष कुमार यादव के यहां से कुल 2 लाख रुपये कैश मिले हैं.
- अनुकल्प मिश्र के यहां से भी 16,82,040 रुपये नकदी मिलने का उल्लेख किया गया है.
- करुणेश पाण्डेय के यहां से 18 लाख 07 हजार 63 रुपये कैश बरामद किए गए.
- अविनाश शुक्ला के यहां से 20 लाख 39 हजार रुपये कैश बरामद किए गए हैं.
- रामशंकर यादव उर्फ टिंकू के हॉस्टल कमरे से 1,00,000 रुपये नकद बरामद किए गए.
इस नए एंगल से भी जांच जारी
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर से चोरी किए गए आभूषणों को गलाकर सोने के बिस्कुट बनवाने की आशंका की जांच की जा रही है. एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं आरोपियों ने चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को गलवाकर उनकी पहचान मिटाने की कोशिश तो नहीं की.
अब तक की छापेमारी में चोरी से जुड़े आभूषण बरामद नहीं हो सके हैं, जिससे जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया है. एसआईटी अधिकारियों ने रामलला के दर्शन करने के बाद प्रभारी केडी बाबू से आभूषणों, चढ़ावे की बहुमूल्य वस्तुओं और उनके रखरखाव की व्यवस्था पर विस्तृत पूछताछ की.
जांच टीम ने आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं से जुड़े अभिलेख, रिकॉर्ड और भारत सरकार के उपक्रम प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन की जानकारी भी तलब की. अधिकारियों ने बैंकों और मिंट को भेजी गई धातुओं का पूरा ब्यौरा मांगा है और अब तक की प्रक्रिया की जांच की जा रही है.
एसआईटी जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रस्ट की हर तीसरे महीने होने वाली बैठक में नकद दान और आय का विवरण रखा जाता था, लेकिन सोने-चांदी व अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्यौरा नियमित एजेंडे का हिस्सा नहीं था.
ट्रस्ट ने पहले चरण में 944 किलो चांदी की जांच और गलाने के लिए भारत सरकार की संस्था Mint को भेजी थी. भक्तों से प्राप्त सोने-चांदी की गुणवत्ता और मात्रा के मूल्यांकन के लिए ट्रस्ट ने यह प्रक्रिया अपनाई थी. चंपत राय पहले सार्वजनिक रूप से बता चुके हैं कि मंदिर को दान में करीब 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ था.