मुंगेर जिले में गंगा का जलस्तर लगातार लोगों की चिंता बढ़ा रहा है. पिछले कई दिनों से नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर बना हुआ है. मंगलवार को गंगा चेतावनी स्तर से करीब 18 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी. जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच गंगा किनारे बसे निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी फैलने लगा है. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है. गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर सदर प्रखंड के गंगा पार स्थित कुतलुपुर पंचायत में दिखाई दे रहा है. चारों तरफ से गंगा से घिरी इस पंचायत के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है. पानी बढ़ने के साथ ग्रामीणों के सामने आवागमन, पेयजल, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं.
गंगा के बढ़ते पानी के साथ नदी की तेज धारा ने कटाव की चिंता भी बढ़ा दी है. सदर प्रखंड के गंगा किनारे बसे सीताकुंड और लक्ष्मीपुर बिंद टोली में कटाव तेज हो गया है. लक्ष्मीपुर बिंद टोली में पहले कटावरोधी काम कराया गया था, लेकिन गंगा की तेज धारा के कारण एक बार फिर नदी किनारे की जमीन कटने लगी है. कटाव की रफ्तार बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले परिवारों में दहशत है. ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की तेज धारा सिर्फ जमीन को ही नहीं काट रही, बल्कि कई जगहों पर घरों के नीचे की मिट्टी भी अंदर से खिसक रही है. ऐसे में घरों की नींव कमजोर होने और उनके गंगा में समा जाने का खतरा बना हुआ है.
रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझ रहे ग्रामीण
ग्रामीण प्रमिला देवी, इंद्रदेव सिंह और लालो सिंह ने बताया कि उनके घरों के आसपास की जमीन लगातार कट रही है. बाहर से देखने पर भले ही स्थिति सामान्य लगे, लेकिन जमीन के अंदर मिट्टी खिसकने से घरों की नींव कमजोर हो रही है. ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव इसी तरह जारी रहा तो कई घर गंगा की धारा में समा सकते हैं. कटाव प्रभावित इलाकों में ग्रामीण खुद अपने घरों और आसपास की जमीन की निगरानी कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से नियमित निगरानी नहीं की जा रही है. उनका कहना है कि गंभीर स्थिति के बावजूद उन्हें अपने स्तर पर ही घरों को बचाने की कोशिश करनी पड़ रही है.
ग्रामीणों के मुताबिक पूर्व में लगाए गए जियो बैग भी वह खुद उठाकर कटाव वाले स्थानों पर लगा रहे हैं. उनका प्रयास है कि किसी तरह गंगा की तेज धारा को रोका जा सके और घरों के आसपास की जमीन को बचाया जा सके. ग्रामीणों की चिंता सिर्फ गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर नहीं है. जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने भी उनकी परेशानी बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि जब जलस्तर कुछ कम होता है और उसके बाद दोबारा बढ़ता है तो कटाव और तेज हो जाता है. इसी वजह से नदी किनारे रहने वाले परिवार हर समय किसी अनहोनी की आशंका में हैं.
गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटाव के बीच जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है. मुंगेर के डीएम निखिल धनराज निप्पणीकर ने बताया कि गंगा के जलस्तर में फिर से वृद्धि हो रही है. जहां-जहां कटाव की समस्या है, वहां संबंधित अधिकारियों को भेजकर कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है. डीएम ने बताया कि कुछ स्कूलों और रास्तों में पानी भर गया है. इसे देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को ऐसे स्कूलों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर पठन-पाठन जारी रखने का निर्देश दिया गया है. जिला प्रशासन की ओर से गंगा के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है.
गंगा किनारे बसे परिवारों की बढ़ी चिंता
जिला प्रशासन के मुताबिक संभावित बाढ़ को देखते हुए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. अगर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती है तो बाढ़ प्रभावित लोगों को समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी. फिलहाल गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर है और नदी किनारे बसे इलाकों में पानी पहुंचने के साथ कटाव भी तेज हो रहा है. कुतलुपुर पंचायत के ग्रामीण जहां बाढ़ के पानी से परेशान हैं, वहीं सीताकुंड और लक्ष्मीपुर बिंद टोली के लोगों को अपने घरों के गंगा में समाने का डर सता रहा है. ऐसे में ग्रामीणों की नजर गंगा के जलस्तर पर टिकी हुई है.