बिहार की पांच राज्यसभा सीटों को लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. विधायकों की संख्या के आधार पर चार राज्यसभा सीटें एनडीए आसानी से जीत लेगी, लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए मुकाबला करना होगा. आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को जिताने की एक्सरसाइज शुरू कर दी है, लेकिन 'जादुई आंकड़ा' बिना असदुद्दीन ओवैसी के संभव नहीं है?
राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव ने मंगलवार को विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में महागठबंधन के आरजेडी, कांग्रेस, आईआईपी और वामपंथी दलों के नेताओं ने शिरकत किया, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के विधायकों ने दूरी बनाए रखा. यही नहीं बसपा के एकलौते विधायक भी तेजस्वी की बैठक में शामिल नहीं हुए.
तेजस्वी यादव की बैठक से AIMIM विधायकों की दूरी बनाए जाने के बाद सियासी चर्चा तेज है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि ओवैसी की पार्टी राज्यसभा चुनाव में आरजेडी को अपना समर्थन देगी या फिर एनडीए का सियासी गेम बनाएंगे?
तेजस्वी की बैठक से AIMIM विधायकों की दूरी
राज्यसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के बीच एकता बनाने और आगे की रणनीति तय करने के लिए तेजस्वी यादव ने अपने पटना स्थित सरकारी आवास एक पोलो रोड पर दोपहर दो बजे बैठक बुलाई थी. बैठक में महागठबंधन के सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य को बुलाने के साथ-साथ AIMIM और बसपा विधायक को बुलाया गया था. यह बैठक संभावित समर्थन और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा के लिए थी, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से कोई भी विधायक नहीं पहुंचा और न ही बसपा विधायक शामिल हुए.
AIMIM और बीएसपी विधायक के बिना आरजेडी के लिए राज्यसभा चुनाव जीतना संभव नहीं है. ऐसे में अब कयासबाजी तेज होने लगी है. हालांकि, आरजेडी का वा है कि विपक्ष एकजुट है. मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि हम लोगों के साथ 41 विधायक है और हम लोग चुनाव जीतेंगे. पांचवीं राज्यसभा सीट हमारी है और हमारा कैंडिडेट जरूर जीतेंगे.
AIMIM और बसपा के बिना कैसे जीतेगी आरजेडी
आरजेडी ने मौजूदा राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से चुनावी मैदान में है, लेकिन उन्हें जीत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है. आरजेडी के 25 विधायकों सहित महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, जबकि एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए.
असदुद्दीन ओवैसी के 5 विधायक और बसपा के एकलौते विधायक अभी अपना पत्ता नहीं खोल रहे हैं. इन छह विधायकों के बिना आरजेडी के अमरेंद्र सिंह किसी भी सूरत में राज्यसभा चुनाव नहीं जीत सकते हैं. एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की कोई जानकारी नहीं है.
आरजेडी कैंडिडेट के समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व राज्यसभा चुनाव को लेकर फैसला लेगा. अभी तक पार्टी ने कुछ तय नहीं किया है. इसी तरह से बसपा विधायक सतीश कुमार यादव ने कहा कि वो बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं, जैसा पार्टी का निर्देश होगा, हम उसी लिहाज से तय करेंगे.
हालांकि, सतीश यादव आरजेडी प्रत्याशी अमरेंद्र सिंह के नामांकन के समय मौजूद थे, जिसके चलते आरजेडी ने उनके समर्थन की पूरी उम्मीद बनाए हुए, लेकिनअसदुद्दीन ओवैसी की पार्टी पर सस्पेंस बना हुआ है. ऐसे में आरजेडी की बैठक से दूरी बनाए जाने के बाद सियासी कयास लगाए जाने लगे हैं?
ओवैसी क्या एनडीए की राह बनाएंगे आसान
बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने पांच उम्मीदवार उतार रखे हैं, जिसमें बीजेपी और जेडीयू से दो-दो कैंडिडेट हैं. इसके अलावा पांचवीं सीट के लिए एनडीए की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा हैं, लेकिन एनडीए ने अभी अपने उम्मीदवारों की प्राथमिकता क्रम तय नहीं किया. इसका मतलब यह है कि एनडीए किसे पांचवें उम्मीदवार के तौर पर रखती है, ये भी साफ नहीं है.
एनडीए के पास कुल 202 विधायकों का समर्थन है. एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायक चाहिए. इस लिहाज से एनडीए चार राज्यसभा सीटें तो आसानी से जीत लेगी, उसके लिए 164 विधायक लगेंगे. इसके बाद एनडीए के पास 38 वोट बचेंगे और पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे 3 अतरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में एनडीए की नजर विपक्षी वोटों पर है.
वहीं. महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं. ऐसे में उसे 6 अतिरिक्त वोट चाहिए. यह आंकड़ा तभी हासिल किया जा सकता है, जबकि एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के एक विधायक का सपोर्ट मिले. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी किंगमेकर के रोल में है, उसके सियासी फैसले से पांचवीं राज्यसभा सीट के जीत और हार निर्णय होगा. ओवैसी अगर महागठबंधन से दूरी बनाए रखते हैं तो फिर एनडीए की राह आसान हो जाएगी. ऐसे में सभी की निगाहें ओवैसी के सियासी कदम पर टिकी हुई हैं?