पंचायत आजतक बिहार के सेशन 'बिजनेस की बहार है... नया बिहार है!' में बिहार में निवेश, रोजगार और कारोबार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. इस सत्र में मेफेयर होटल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर नितेश कुमार सिंह, आईआईएम बोधगया की डायरेक्टर डॉ. विनिता एस. सहाय और मेदांता पटना के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रवि शंकर सिंह शामिल हुए. चर्चा के दौरान तीनों ने बिहार में निवेश के रास्ते में आने वाली चुनौतियों, बदलते माहौल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संभावित क्षेत्रों तथा बिहार की छवि को लेकर अपनी बात रखी.
मेफेयर होटल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर नितेश कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी कारोबार के लिए उसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता सबसे महत्वपूर्ण होती है. बिहार को निवेश के लिए तैयार करने में पिछले दो दशकों में कई बुनियादी बदलाव हुए हैं. उन्होंने कहा कि किसी उद्योग को सड़क, बिजली और सुरक्षित माहौल चाहिए. उनके मुताबिक बिहार में सड़क और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में काफी काम हुआ है. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संपर्क व्यवस्था और बेहतर होगी. बिजली के क्षेत्र में भी अब स्थिति काफी बदली है और उद्योगों के लिए बिजली उपलब्ध है.
नितेश कुमार सिंह ने कहा कि उनके नजरिए से बिहार अब जाकर निवेश के लिए तैयार हुआ है और यह उसके लिए 'टेक ऑफ टाइम' है. हालांकि इसके लिए उद्योगों के बीच भरोसा पैदा करना जरूरी है. बिहार में कारोबार को लेकर आम लोगों की सोच में बदलाव की जरूरत भी बताई. अक्सर बिजनेसमैन को सिर्फ मुनाफा कमाने वाला व्यक्ति समझा जाता है, जबकि किसी भी कारोबार से कर्मचारियों को रोजगार मिलता है, उन्हें वेतन मिलता है और कंपनी आगे बढ़ती है तो उसका लाभ व्यापक अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है.
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नितेश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में लंबे समय से सरकारी नौकरी को लेकर ज्यादा आकर्षण रहा है. यहां परिवार भी अक्सर विवाह के लिए सरकारी नौकरी वाले युवक को प्राथमिकता देते रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब कारोबार और उद्यमिता को लेकर इस सोच में बदलाव लाना होगा.
बड़े अस्पतालों ने बदली सोच, लेकिन सिस्टम का सहयोग जरूरी
मेदांता पटना के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रवि शंकर सिंह ने बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र के अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में कुछ समय पहले तक जमीन की उपलब्धता एक बड़ी समस्या थी. बड़े भूखंड नहीं मिल पाते थे और जमीन उपलब्ध कराने को लेकर भी कई अड़चनें थीं. लेकिन अब लैंड बैंक बनाए जाने और निवेशकों को आमंत्रित किए जाने से स्थिति बदलती नजर आ रही है. उनके मुताबिक बिहार को यह भी तय करना होगा कि उसके प्राथमिक क्षेत्र कौन से होंगे. हर राज्य हर क्षेत्र में एक साथ आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य को बिहार के लिए बड़े अवसर वाले क्षेत्र बताया.
करीब 14 करोड़ की आबादी वाला बिहार स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा बाजार बन सकता है. इसी तरह मेडिकल शिक्षा और विश्वविद्यालय भी निवेश और रोजगार के बड़े केंद्र बन सकते हैं. हालांकि इसके लिए बड़े भूखंड और निवेशकों के साथ सक्रिय संवाद की जरूरत होगी. डॉ. रवि शंकर सिंह ने कहा कि शुरुआत में यह सवाल था कि क्या यहां बड़ा अस्पताल टिक पाएगा और क्या लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे. लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बदली और बिहार में बड़े अस्पताल स्थापित हुए.
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इन अस्पतालों ने न सिर्फ सफलतापूर्वक काम किया, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के कई नए मानक भी स्थापित किए. उनके मुताबिक यह बदलाव इस बात का संकेत है कि बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने की क्षमता और मांग दोनों मौजूद हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ ईश्वर की कृपा या निजी प्रयास से कारोबार नहीं चलता. उनके मुताबिक किसी भी बड़े निवेश के लिए राज्य की मशीनरी और उसका सहयोग महत्वपूर्ण होता है.
डॉ. रवि शंकर सिंह ने कहा कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का बाजार इतना बड़ा है कि राज्य की अपनी आबादी को ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़े अस्पतालों और संस्थानों की काफी जरूरत है. उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि बिहार में अब डॉक्टर और विशेषज्ञ पहले की तुलना में अधिक उपलब्ध हो रहे हैं. बड़े अस्पतालों के आने से लोगों को राज्य से बाहर इलाज कराने की मजबूरी कुछ हद तक कम हुई है.
आईआईएम बोधगया की डायरेक्टर डॉ. विनिता एस. सहाय ने बिहार की आर्थिक वृद्धि और रोजगार के सवाल को दूसरी दृष्टि से रखा. उन्होंने कहा कि बिहार की जीएसडीपी की वृद्धि दर देखने पर तस्वीर सकारात्मक दिखाई देती है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी समझना जरूरी है. बिहार की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जब प्रति व्यक्ति आय को देखा जाता है तो तस्वीर अलग नजर आती है. इसलिए सिर्फ तेज वृद्धि दर को उपलब्धि मानना पर्याप्त नहीं है.
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आईआईएम बोधगया का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ऐसे राज्य में, जिसे अक्सर उद्योग और कॉरपोरेट क्षेत्र की कमी वाले राज्य के रूप में देखा जाता है, देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र और प्रतिभाएं आईआईएम बोधगया में पढ़ने के लिए आ रही हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थान बिहार के बारे में नैरेटिव बदलने में भूमिका निभा सकते हैं. उनके मुताबिक बिहार के युवाओं और मानव संसाधन को उसकी सबसे बड़ी ताकत के रूप में देखना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों तक बड़ी संख्या में लोग कम कौशल वाले काम के लिए बाहर क्यों जाते रहे. उनके मुताबिक युवाओं को छोटे-छोटे कौशल प्रशिक्षण से भी बेहतर अवसर दिए जा सकते हैं. शिक्षा को बिहार के लिए एक बड़ा क्षेत्र बताते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा पर खर्च का स्तर राष्ट्रीय औसत से ऊपर है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. खासतौर पर प्राथमिक शिक्षा, कौशल विकास और युवाओं की क्षमता बढ़ाने पर अधिक ध्यान देना होगा.
डॉ. विनिता सहाय ने कहा कि बिहार को यह तय करना होगा कि उसका प्रतिस्पर्धी लाभ किस क्षेत्र में है. उनके मुताबिक शिक्षा और स्वास्थ्य दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें बिहार बड़ा नाम बना सकता है. उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को बिहार के लिए विशेष अवसर बताते हुए कहा कि राज्य की बड़ी आबादी अपने आप में बहुत बड़ा घरेलू बाजार है. बेहतर अस्पताल, मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश से न केवल बिहार के लोगों की जरूरतें पूरी हो सकती हैं, बल्कि राज्य के बाहर से भी लोग और निवेश आकर्षित हो सकते हैं.
सरकार की भूमिका और बदलता माहौल
चर्चा के दौरान नितेश कुमार सिंह ने बिहार में निवेश को लेकर सरकार की नीतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सरकार निवेश को लेकर अब ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है और सिंगल विंडो जैसी व्यवस्थाओं के जरिए मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था के तहत कई मंजूरियों के लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है और तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था बनाई गई है.