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भरत तिवारी के मोबाइल में छिपा है कौन सा राज? एनकाउंटर से पहले का वीडियो वायरल, उठ रहे सवाल

बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी के एनकाउंटर से महीनों पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है. इस वीडियो में भरत ने अपने अंगदान करने और मोबाइल में रखे कुछ सबूतों को सुरक्षित रखने की बात कही थी. अब इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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फोन में ऐसा क्या था, जिसे छिपाना चाहते थे भरत तिवारी. (File Photo: ITG)
फोन में ऐसा क्या था, जिसे छिपाना चाहते थे भरत तिवारी. (File Photo: ITG)

बिहार में भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब एक नया और रहस्यमयी मोड़ सामने आया है. पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में भरत अपनी अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए न सिर्फ शरीर दान की बात करते हैं, बल्कि अपने मोबाइल फोन को लेकर भी ऐसा दावा करते हैं, जिसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

वीडियो में भरत तिवारी कहते सुनाई देते हैं कि उनकी मौत के बाद उनके शरीर को सबसे पहले भारतीय सेना को दान किया जाए. यदि ऐसा संभव न हो तो गरीब एवं असहाय लोगों के हित में उनके शरीर का उपयोग किया जाए. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके मोबाइल फोन को लेकर कही गई बात की हो रही है.

Bharat Tiwari video viral before encounter evidence on mobile want to save

भरत वीडियो में साफ कहते हैं कि उनके जाने के बाद उनका मोबाइल माता-पिता के अलावा किसी और के हाथ में नहीं जाना चाहिए. उनका दावा था कि फोन में ऐसे प्रमाण और जानकारियां मौजूद हैं, जिन्हें मिटाया या झुठलाया नहीं जा सकता. भरत का कहना था कि उन्होंने हर महत्वपूर्ण जानकारी और साक्ष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपने मोबाइल का इस्तेमाल किया है.

Bharat Tiwari video viral before encounter evidence on mobile want to save

यह भी पढ़ें: भरत तिवारी की कहानी... जिसे मानसिक विक्षिप्त बताया, उसी का एनकाउंटर, अब होगी न्यायिक जांच

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वायरल वीडियो में भरत तिवारी ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि मेरे जाने के बाद किसी और के हाथ में मोबाइल नहीं लगना चाहिए. यह मेरा साक्ष्य है, मेरा इतिहास है, इसे मिटाया नहीं जा सकता. वीडियो में भरत तत्कालीन मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाते दिखाई देते हैं और यह कहते हैं कि वह किसी दबाव, लालच या धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं.

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अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उस मोबाइल में ऐसा क्या था, जिसे लेकर भरत इतने चिंतित थे? क्या सच में उसमें ऐसे दस्तावेज या जानकारियां थीं, जिनकी जांच जरूरी है? या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत आशंका थी?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे. इधर, भरत तिवारी की मौत के बाद वायरल वीडियो को लेकर ग्रामीणों और परिजनों के बीच चर्चा तेज है. परिजन मोबाइल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की जा चुकी है.

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वायरल वीडियो में किए गए सभी दावे भरत तिवारी के व्यक्तिगत बयान हैं. इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और मोबाइल में मौजूद कथित साक्ष्यों को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है कि क्या भरत तिवारी का मोबाइल इस पूरे विवाद की कोई नई परत खोल सकता है, या फिर यह रहस्य जांच पूरी होने तक रहस्य ही बना रहेगा?

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