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80 साल की उम्र, सिर में चोट और टूटा पैर... ठेले पर घर पहुंचे बुजुर्ग, बिहार की दर्दनाक तस्वीर

आरा सदर अस्पताल में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली तस्वीर सामने आई है. 80 वर्षीय विष्णु शंकर साह बाथरूम में गिरने से घायल हो गए थे. इलाज के बाद परिजनों का आरोप है कि घर जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली. मजबूरन परिवार ने 500 रुपये किराया देकर ठेले का इंतजाम किया और बुजुर्ग को उसी पर लिटाकर घर ले गया.

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बुजुर्ग को अस्पताल से घर ले जाते परिजन. (Photo: Screengrabs)
बुजुर्ग को अस्पताल से घर ले जाते परिजन. (Photo: Screengrabs)

आरा में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तस्वीर में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग मरीज अस्पताल से छुट्टी के बाद एंबुलेंस के बजाय ठेले पर ले जाए जाते नजर आ रहे हैं. दावा है कि परिजनों ने एंबुलेंस की मांग की, लेकिन व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन ठेले का सहारा लेना पड़ा.

दरअसल, नगर थाना क्षेत्र के चरखंभा गली निवासी 80 वर्षीय विष्णु शंकर साह अपने किराये के मकान के बाथरूम में गिर गए थे. इस हादसे में उनके सिर में चोट आई और एक पैर फ्रैक्चर हो गया. इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. बुजुर्ग के साथ उनकी वृद्ध पत्नी मीरा देवी और दामाद कन्हैया प्रसाद भी मौजूद थे. अस्पताल में किसी तरह उनका इलाज तो हुआ, लेकिन परिजनों का आरोप है कि घर लौटने के लिए अस्पताल प्रबंधन से एंबुलेंस की मांग करने के बावजूद उन्हें इसकी सुविधा नहीं मिल सकी.

आखिरकार, बेबस परिजनों ने 500 रुपये किराया देकर एक ठेले की व्यवस्था की और उसी पर बुजुर्ग विष्णु शंकर साह को लिटाकर घर ले जाने को मजबूर हो गए. सोचिए, जिस उम्र में एक बुजुर्ग को बेहतर देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस उम्र में उन्हें अस्पताल से घर तक पहुंचाने के लिए ठेले का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है.

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सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं विष्णु शंकर
परिजनों के मुताबिक विष्णु शंकर साह सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं. वे बीजेपी और संघ से भी जुड़े हैं व लावारिस केंद्र के सदस्य भी बताए जाते हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति की सामाजिक या राजनीतिक पहचान से अलग, सवाल यह है कि आखिर एक बुजुर्ग मरीज को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं मिल सकी? एक तरफ बिहार में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों को सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ आरा सदर अस्पताल की यह तस्वीर उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है.

अब सवाल यह है कि क्या आरा सदर अस्पताल में मरीजों को इलाज के बाद घर पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था नहीं है? अगर व्यवस्था है, तो इस बुजुर्ग मरीज को इसका लाभ क्यों नहीं मिला? फिलहाल, इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है. इलाज के बाद मरीज को घर तक पहुंचाना भी स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है. आखिर कब बदलेगी बिहार के सरकारी अस्पतालों की यह तस्वीर?

पूरे मामले में आरा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन और प्रबंधक से बात कर मामले में जानकारी लेने की कोशिश की गई. लेकिन ना ही उन लोगों ने फोन उठाया और नहीं उनसे मुलाकात हो पाई. जिससे उनका पक्ष रखा जा सके. 

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