जान बचाने को समंदर में कूदे नाविक? ईरान के पास अमेरिकी वॉरशिप में भयावह हालात

ईरान के खिलाफ तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन लंबे समय से समुद्र में है. इस बीच जहाज पर हालात को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई हैं.

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USS अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने की तैयारी करता हुआ EA-18G ग्रोवलर. (Photo: Reuters) USS अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने की तैयारी करता हुआ EA-18G ग्रोवलर. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का एक युद्धपोत महीनों से समुद्र में तैनात है. लंबी तैनाती की वजह से अब नाविकों पर गहरा असर दिखने लगा है. जहाज पर खाने से लेकर जरूरी सुविधाओं तक की शिकायतें आ रही हैं. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कुछ नाविकों ने समुद्र में कूदने की कोशिश तक की है.

यह बात अमेरिकी विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' की है, जो पिछले 210 दिनों से मध्य पूर्व के इलाके में तैनात है. सफर की शुरुआत से गिने तो यह जहाज लगातार 250 दिनों से समंदर में ही बना हुआ है.

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मई में ही इस मिशन को खत्म होना था, लेकिन इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया. आमतौर पर इतने लंबे अभियानों के दौरान जहाजों को राशन जुटाने और मरम्मत के लिए किसी बंदरगाह पर भेजा जाता है, मगर इस बार ऐसा नहीं किया गया.

समुद्र में कूदने लगे परेशान सैनिक

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लंबे समय से समुद्र में रहने के कारण जवानों की दिमागी सेहत पर असर पड़ रहा है. कम से कम 6 नाविकों के पानी में छलांग लगाने के प्रयास का दावा किया गया है. इतना ही नहीं, सैनिकों के परिजनों का कहना है कि ऐन वक्त पर साथी जवानों ने हाथ पकड़कर उनकी जान बचाई. कुछ नाविकों को अब डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है, ताकि वे खुद को कोई नुकसान न पहुंचा लें.

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आधे कप चावल और दो रोटियों पर गुजारा

जहाज पर सुविधाओं की हालत बेहद खराब बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जवानों को खाने में सिर्फ आधा कप चावल और दो रोटियां मिल रही हैं, जबकि साबुन और टूथपेस्ट जैसी जरूरी चीजें तक खत्म हो चुकी हैं. टूटे टॉयलेट, बाथरूम में फैली गंदगी और हफ्तों से कपड़े न धुल पाने की वजह से बदहाली चरम पर है. हालात देखकर जहाज के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इसे किसी पोर्ट पर नहीं ले जाया गया, तो जवान अपना मानसिक संतुलन खोने लगेंगे.

इन तमाम शिकायतों के बाद अमेरिका में जब परिजनों ने नौसेना के अधिकारियों से मुलाकात की, तो उन्हें जल्द ही 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' को भेजने का भरोसा दिलाया गया. 

हालांकि अब तक जहाज की वापसी की कोई पक्की तारीख तय नहीं हो सकी है. नौसेना का दावा है कि सभी जवानों की दिमागी सेहत पर नजर रखी जा रही है. वैसे यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी दो अमेरिकी युद्धपोतों से खाने की किल्लत और बदहाली की ऐसी ही खबरें आ चुकी हैं.

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