बैन लगाएं, RSS के नेताओं से न मिलें... मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे से पहले USCIRF की मांग

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग की है. आयोग ने अमेरिकी सरकार से ये भी अपील की है कि अधिकारियों को आरएसएस नेताओं से नहीं मिलना चाहिए और न ही उनके साथ बैठक करनी चाहिए.

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अमेरिका में RSS पर बैन लगाने की मांग. (Photo: ITG) अमेरिका में RSS पर बैन लगाने की मांग. (Photo: ITG)

रोहित शर्मा

  • वाशिंगटन,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:44 AM IST

धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली एक अमेरिकी एडवाइजरी बॉडी के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाते की मांग की है और अमेरिकी सरकार से कहा कि वह संघ के नेताओं को मुलाकात न करें और न ही उनके साथ हाई लेवल (उच्च-स्तरीय) बैठकें करें.

उनका ये बयान संघ प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स' में भाग लेने के अमेरिकी दौरे से ठीक पहले आया है. इससे पहले USCIRF ने भारत की आलोचना करते हुए RSS और RAW जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जबकि भारत ने इसे खारिज कर दिया था.

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अल्पसंख्यकों पर किए हमले

US कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं. उन्होंने RSS को एक ऐसी 'अंब्रेला संस्था' (मुख्य संगठन) बताया, जिसके उप-समूहों ने मु्स्लिम और ईसाई जैसे- धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं.

महमूद की ये टिप्पणियां RSS प्रमुख मोहन भागवत की US यात्रा से कुछ हफ्ते पहले आई हैं, जहां संघ प्रमुख 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' (सार्वभौमिक एकता समारोह) में भाग लेने वाले हैं.

RSS नेताओं को नहीं किया जाना चाहिए सम्मानित

USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को चाहे वो भारत सरकार से जुड़े हों, उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार से सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए जो FoRB (धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता) के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं.

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वहीं, 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' ने कहा कि भागवत के दौरे को मुसलमानों और ईसाइयो के खिलाफ आएसएस नेटवर्क की हिंसा से अलग नहीं किया सकता. एडवोकेसी ग्रुप ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'एकता का जश्न धार्मिक वर्चस्व की राजनीति को छिपा नहीं सकता.'

भारत ने खारिज की USCIRF की रिपोर्ट 

इसके अलावा मार्च में जारी वार्षिक रिपोर्ट में यूएससीआईआरएफ ने भारत की आलोचना की और RSS तथा 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' (RAW) जैसी संस्थाओं पर  प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, क्योंकि उन्हें इस मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. हालांकि, भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि संस्था ने लगातार देश की विकृत और चुनिंदा तस्वीर पेश की है, जो संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव पर आधारित है.

भारत को निशाना न बनाएं: विदेश मंत्रालय

वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को एक बयान में कहा कि भारत की चुनिंदा आलोचना जारी रखने के बजाय USCIRF को 'US में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और हमलों की परेशान करने वाली घटनाओं, भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने और US में भारतीय मूल के लोगों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं' पर विचार करना चाहिए, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.

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