अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि यूएस और ईरान के बीच एक अहम समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि इस समझौते से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत फिर से खोलने का रास्ता साफ होगा और लंबे वक्त से एक-दूसरे के विरोधी रहे इन दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में एक बुनियादी बदलाव आएगा.
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सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जारी एक बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस आगामी समझौते और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए पिछले समझौते के बीच तीखी तुलना की.
ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अपने पूर्ववर्ती के कार्यकाल में बने ढांचे के उलट, नई बातचीत से तैयार यह समझौता सख्ती से यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने से पूरी तरह प्रतिबंधित रहे. ईरान की Mehr न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते कुछ शर्तों पर आधारित है.
ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल्स और उनसे जुड़े एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियां हटा ली जाएंगी.
ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों का पूरा एक्सेस फिर से मिल जाएगा.
60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी कर दिए जाएंगे. इसमें से 12 अरब डॉलर तो बातचीत शुरू होने से पहले ही जारी कर दिए जाएंगे.
अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करनी होंगी.
लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए बंद हो जाएगा.
अमेरिका ईरान के मामलों में दखल न देने और ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा करेगा.
अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के अंदर पूरी तरह से हटा ली जाएगी.
अमेरिकी सेनाएं ईरान के आसपास के इलाकों से हट जाएंगी.
होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की व्यवस्था के तहत 30 दिनों के अंदर फिर से खोल दिया जाएगा.
परमाणु मुद्दों और पाबंदियों को पूरी तरह हटाने पर आखिरी समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत की अवधि शुरू होगी.
ईरान परमाणु हथियार न बनाने के अपने NPT (परमाणु अप्रसार संधि) के वादे को फिर से दोहराएगा.
अमेरिका बातचीत के दौरान इस क्षेत्र में सेना न बढ़ाने या नई पाबंदियां न लगाने पर सहमत होगा.
एक निगरानी तंत्र इसके कार्यान्वयन पर नज़र रखेगा, और किसी भी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।
ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और रेजिस्टेंस ग्रुप्स (प्रतिरोध समूहों) को समर्थन इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक कि 12 अरब डॉलर जारी नहीं हो जाते, तेल पर लगी पाबंदियां हट नहीं जातीं और नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती.
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