भारत के लिए राहत? पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर दिखाई नरमी

ट्रंप ने कहा कि पुतिन से यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के बाद अलास्का शिखर वार्ता सफल रही और इसे उन्होंने 10 में से 10 नंबर दिए. उन्होंने कहा कि मुझे हो सकता है कि 2-3 हफ्तों में इस (प्रतिबंधों) पर सोचना पड़े, लेकिन अभी तुरंत इसकी जरूरत नहीं है.

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अलास्का में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात हुई (Photo: AP) अलास्का में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात हुई (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 8:53 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह रूस और उसके व्यापारिक साझेदारों पर फिलहाल सेकेंडरी सेंक्शंस (द्वितीयक प्रतिबंध) लगाने पर विचार नहीं कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि आगामी 2 से 3 हफ्तों में इस पर फिर से विचार किया जा सकता है. इसे भारत के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है.

फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि पुतिन से यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के बाद अलास्का शिखर वार्ता सफल रही और इसे उन्होंने 10 में से 10 नंबर दिए. उन्होंने कहा कि मुझे हो सकता है कि 2-3 हफ्तों में इस (प्रतिबंधों) पर सोचना पड़े, लेकिन अभी तुरंत इसकी जरूरत नहीं है.

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ट्रंप ने आगे कहा कि अगर मैं अभी सेकेंडरी सेंक्शंस लगाता हूं तो वह उनके लिए तबाही मचाने जैसा होगा. हालांकि उन्होंने अपने आगे के कदमों को लेकर विस्तार से कुछ नहीं बताया.

बता दें कि ट्रंप ने हाल ही में रूस से तेल खरीद जारी रखने के चलते भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगा दिया था. इससे भारत पर कुल आयात शुल्क (टैरिफ) 50% तक बढ़ गया. ट्रंप ने उन देशों को चेतावनी दी थी जो रूस से तेल खरीदते हैं कि उन पर सेकेंडरी सेंक्शंस लगाए जा सकते हैं. रूस से तेल खरीदने वालों में चीन और भारत सबसे ऊपर हैं.

भारत ने दिखाया था अमेरिका को आईना

अलास्का शिखर वार्ता से कुछ दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि भारत पर लगाए गए दंडात्मक शुल्क ने रूस को उनसे मुलाकात करने के लिए मजबूर किया, क्योंकि रूस अपना दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक खो रहा था. हालांकि भारत ने साफ कर दिया कि अमेरिकी धमकियों के बावजूद रूसी तेल आयात में कोई रुकावट नहीं आई है और उसने अमेरिका की पाखंडपूर्ण नीति की आलोचना भी की.

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ट्रंप ने दी थी पुतिन को चेतावनी

ट्रंप ने पुतिन को चेतावनी भी दी थी कि अगर उन्होंने यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए शांति समझौते पर सहमति नहीं दी, तो रूस को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. ये युद्ध अब चौथे वर्ष में पहुंच चुका है.

ज़ेलेंस्की को समझौता करने की सलाह

तीन घंटे लंबी बैठक के बावजूद अलास्का में ट्रंप और पुतिन यूक्रेन में युद्धविराम पर कोई सहमति नहीं बना सके.फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि अब यह जिम्मेदारी यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और यूरोपीय देशों की है कि वे समझौता करें. उन्होंने ज़ेलेंस्की से अपील करते हुए कहा कि समझौता करो. ट्रंप ने ये भी संकेत दिया कि कैदियों के आदान-प्रदान पर कोई संभावित समझौता हो सकता है. उन्होंने कहा कि आज उन्होंने मेरे सामने हजारों कैदियों की सूची रखी, जो रिहा किए जाएंगे.

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