पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि हर हमले का जवाब उसी तरह देना जरूरी नहीं है. उनके मुताबिक मक्का समझौता खुद एक बड़ा डिटरेंट यानी रोक बन सकता है. उन्होंने साफ किया कि अगर सऊदी अरब पर बेवजह हमला होता है या यमन का मामला सऊदी अरब तक फैल जाता है, तो यह समझौता अपने आप लागू हो जाएगा.
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान इस समझौते से बंधा हुआ है और जरूरत पड़ने पर अपनी जिम्मेदारी जरूर निभाएगा. उनका कहना था कि ईंट का जवाब पत्थर से देना जरूरी नहीं होता, यानी हर आक्रामक कदम के जवाब में उसी तरह से जवाबी कार्रवाई करना जरूरी नहीं है. उन्होंने इसे एक सोची समझी रणनीति बताया, जिसमें बिना वजह तनाव बढ़ाने से बचा जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पूरी तैयारी भी रखी जाती है.
मक्का समझौते को लेकर उन्होंने बहुत साफ शब्दों में बताया कि इसमें किसी तरह की उलझन या शक की गुंजाइश नहीं है. उनके मुताबिक अगर तीन देशों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. यह पूरी तरह से एक साझा रक्षा समझौता है, जिसमें हर देश की जिम्मेदारी बराबर है. उन्होंने कहा कि इस पर किसी अतिरिक्त सफाई की जरूरत नहीं है, क्योंकि समझौते की शर्तें पहले से ही बिल्कुल स्पष्ट हैं.
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उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन में जारी तनाव को लेकर पूरे क्षेत्र में चिंता बनी हुई है. ख्वाजा आसिफ के बयान से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान फिलहाल संयम बरतने के पक्ष में है, लेकिन सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर वह अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगा.
सुबोध कुमार