नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. इस बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह और उनकी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सभी सदस्य आपदा राहत कोष में अपनी एक महीने की सैलरी दान करेंगे. शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया.
सरकार ने बाढ़ से प्रभावित लोगों और कारोबारियों के लिए राहत और पुनर्वास पैकेज तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं. इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में 587 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं.
सरकार बनाएगी राहत और पुनर्वास पैकेज
नेपाल सरकार ने वित्त मंत्रालय को प्रभावित लोगों और कारोबारियों के लिए राहत पैकेज तैयार करने का निर्देश दिया है. इसमें राहत, रियायती वित्तीय मदद और पुनर्वास की व्यवस्था शामिल होगी. बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. घरों के साथ सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है.
सरकार का फोकस अभी प्रभावित लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाने पर है. इसके साथ ही लापता लोगों की तलाश भी जारी है. बचाव दल मुश्किल हालात के बीच प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं.
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रेड क्रॉस के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में हुए भूस्खलन से करीब 93 हजार लोग सीधे प्रभावित हुए हैं. इन लोगों को तत्काल मानवीय मदद की जरूरत है. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के नेपाल प्रतिनिधि डेविड फिशर ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि संगठन को एक और बाढ़ की आशंका है.
भूस्खलन के बाद एक झील बन गई थी. झील का पानी बढ़ने के बाद उसका किनारा टूट गया. इससे कुछ समय के लिए राहत और बचाव अभियान प्रभावित हुआ. राहत सामग्री लेकर जा रहे रेड क्रॉस के ट्रक भी रास्ते में फंस गए. हालात सामान्य होने के बाद राहत पहुंचाने की कोशिश जारी है.
संयुक्त राष्ट्र के आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय के प्रमुख कमल किशोर ने भी खतरे को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इस आपदा का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आगे भी कई तरह के खतरे सामने आ सकते हैं. इनमें अचानक बाढ़ और दूसरे भूस्खलन शामिल हैं.
रेड क्रॉस ने भी दूसरी बाढ़ की आशंका जताई है. भूस्खलन के बाद बनी झील के टूटने से पानी तेजी से नीचे की ओर आया था. इससे राहत अभियान कुछ समय के लिए रोकना पड़ा. इस दौरान बचाव दल को सुरक्षित जगह पर जाना पड़ा.
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स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा असर
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आपदा के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है. डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जसारेविच ने बताया कि भूस्खलन में छह स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है. आठ स्वास्थ्यकर्मी अब भी लापता हैं.
आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने की आशंका है. कई जगहों पर लोगों को सीमित जगह में रहना पड़ रहा है. पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है. ऐसे हालात में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. खास तौर पर डायरिया और सांस से जुड़ी बीमारियां फैलने की आशंका है.
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है. सरकार, सुरक्षा बल और राहत संगठन प्रभावित इलाकों तक मदद पहुंचाने में जुटे हैं. वहीं लापता लोगों की तलाश के साथ आगे होने वाले खतरों पर भी नजर रखी जा रही है.
पंकज दास