नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य जारी हैं. नेपाल के विदेश मंत्रालय की मानें तो अब तक 323 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है. हालांकि, 39 देशों के लगभग 590 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं.
विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या को देखते हुए विदेश मंत्रालय में एक समर्पित 'इमरजेंसी कंट्रोल रूम' बनाया गया है. ये कंट्रोल रूम एजेंसियों और लापता लोगों के परिजनों से लगातार संपर्क साध रहा है.
बाढ़ के कारण कई सुरंगों में लोग फंसे हुए हैं. इन्हें बाहर निकालने के लिए भारत और चीन की स्पेशल टेक्निकल टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं. भारत से 11 और चीन से 9 विशेषज्ञ नेपाली अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर रेस्क्यू में जुटे हैं.
भारतीय टीम मेलुंग और स्याफ्रुबेसी में कमान संभाले हुए है, जबकि चीनी टीम अपर त्रिशूली-3A सुरंग में बचाव कार्य चला रही है. इसके अलावा दक्षिण कोरिया की टीम को भी इस विशेष अभियान में लगाया गया है.
फॉरेंसिक जांच और DNA सैंपल
मृतकों की पहचान एक बड़ी चुनौती बन गई है. पानी में लंबे समय तक रहने के कारण कई शव सड़ चुके हैं. ऐसे शवों को अस्थायी रूप से दफनाया जा रहा है, लेकिन उससे पहले मेडिकल टीमें हर शव का DNA सैंपल सुरक्षित ले रही हैं. बाद में परिजनों के DNA से मिलान कर पहचान तय की जाएगी.
नेपाल सरकार की अपील पर भारत से डीएनए विश्लेषण के 18 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम 29 अगस्त 2026 से नेपाल में मौजूद है और काम कर रही है.
आपदा की इस घड़ी में भारत, चीन, जापान, अमेरिका, यूएई और दक्षिण कोरिया समेत कई देश नेपाल की मदद में आगे आए हैं. राहत सामग्री में प्रीफैब्रिकेटेड ब्रिज यूनिट, फ्रीजर, जनरेटर, सोलर लैंप, डीएनए किट, टेंट, कंबल, दवाएं और फूड पैकेट्स शामिल हैं.
संयुक्त राष्ट्र , WHO, विश्व खाद्य कार्यक्रम और यूनिसेफ (UNICEF) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी राहत अभियानों में सहयोग दे रही हैं.
पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत
नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि सड़कों, पुलों, मकानों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है. नुकसान के सटीक आकलन के लिए पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट किया जाएगा. नेपाल को इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण के लिए बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत होगी.
मंत्रालय ने बताया कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह खुद पूरे राहत, बचाव और अंतरराष्ट्रीय समन्वय अभियान की सीधी निगरानी और समीक्षा कर रहे हैं.
500 शब्दों का एक न्यूज आर्टिकल लिखें. भाषा पर सरल, सहज और वाक्य छोटे होने चाहिए. तथ्य और उद्धरण न बदलें. लिखने का स्टाइल बदला हो. कॉपी इंग्लिश से ट्रांसलेटेड नहीं लगनी चाहिए. कॉपी अगस्त 2026 के हिसाब से अपडेटेड हो.
नेपाल सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों ने एक्सक्लूसिव जानकारी देते हुए बताया कि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों बुसी और तुसू से अब तक 25 लोगों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर निकाल लिया गया है. दुर्गम और कटे हुए इलाकों तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चलाया जा रहा है.
15 हेलीकॉप्टरों की मदद से रेस्क्यू अभियान
नेपाल सेना के सूत्रों के मुताबिक, राहत और बचाव कार्यों को रफ्तार देने के लिए कुल 15 हेलीकॉप्टरों को मैदान में उतारा गया है. इसमें नेपाल सेना के 7 हेलीकॉप्टर और अन्य बचाव एजेंसियों और निजी ऑपरेटरों के 8 हेलीकॉप्टर शामिल हैं.
मछली ट्रेनिंग कैंप बना जीवन रक्षक केंद्र
घायलों के तुरंत और बेहतर इलाज के लिए प्रशासन ने मछली ट्रेनिंग कैंप में एक अस्थाई मेडिकल सेंटर स्थापित किया गया है. आपदा स्थल से रेस्क्यू कर लाए जा रहे घायलों को सीधे इसी केंद्र पर लाकर प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा दी जा रही है. नेपाल सरकार और नेपाल सेना की मेडिकल टीमें 24 घंटे मरीजों के इलाज में जुटी हुई हैं.
नेपाल सेना के जवानों के साथ-साथ 'स्पेशल ऑपरेशंस' की टीमों और डॉक्टरों को मौके पर लगाया गया है. नेपाल सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, आपदा में जान-माल के नुकसान का सटीक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं हो पाया है.
यह भी पढ़ें: नेपाल की तबाही में खड़ा रहा घर, चमत्कार नहीं इंजीनियरिंग का कमाल! कैसे बनता है ऐसा मकान
भारतीय क्षेत्र पर पड़े असर को लेकर सेना प्रवक्ता ने कहा कि उनके पास फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि वाली जानकारी नहीं है. हालांकि, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और स्थानीय प्रशासन को जलस्तर और संभावित खतरे को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया है.
पंकज दास / शिवानी शर्मा