'US नाकेबंदी नहीं हटी तो एक्शन लेंगे...', होर्मुज पर ईरान की अमेरिका को नई धमकी

मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक रस्साकशी तेज हो गई है. ईरान ने जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए IRGC की मंजूरी और यूएस प्रतिबंधों में फंसे फंड को फ्री करने की शर्त रखी है.

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होर्मुज से गुजरने से पहले IRGC की मंजूरी जरूरी. (File Photo: Reuters) होर्मुज से गुजरने से पहले IRGC की मंजूरी जरूरी. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:10 AM IST

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने शुक्रवार को ऐलान किया कि होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग की आजादी बहाल करने के लिए एक दर्जन से ज्यादा देश रक्षा मिशन में शामिल होने को तैयार हैं. फ्रांस और ब्रिटेन ने पेरिस में 49 देशों की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें बहुराष्ट्रीय सुरक्षा मिशन की तैयारियों पर चर्चा हुई. लेबनान सीजफायर के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जलमार्ग को कमर्शियल जहाजों के लिए खुला घोषित किया है लेकिन इसके साथ ही ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की अनुमति जरूरी कर दी है. 

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ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए फंड को फ्री करना भी इस सौदे का हिस्सा है. उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर ईरान द्वारा जलमार्ग खोलने के ऐलान का जिक्र किया है. 

हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने अभी भी समुद्री सुरंगों के जोखिम की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही है. यह रणनीतिक जलमार्ग दुनिया के 20 फीसदी कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का मार्ग है, जो 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद अवरुद्ध हो गया था.

स्टार्मर का मिलिट्री प्लान और लंदन कॉन्फ्रेंस

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि होर्मुज को फिर से खोलना एक वैश्विक जरूरत और जिम्मेदारी है. इसे आगे ले जाने के लिए अगले हफ्ते लंदन में एक सैन्य योजना सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इस सम्मेलन में मिशन की संरचना और इसमें शामिल होने वाले देशों की संपत्ति और संसाधनों का ऐलान किया जाएगा. स्टार्मर ने फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं के साथ मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है.

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग सिर्फ ईरान द्वारा निर्धारित मार्ग से ही मुमकिन होगी. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने निर्देश दिया है कि सभी जहाजों को गुजरने के लिए उनकी अनुमति लेनी होगी. नागरिक जहाजों को निर्धारित ईरानी रास्तों से जाने दिया जाएगा, लेकिन सैन्य जहाजों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. ईरान खुद को इस जलमार्ग का संरक्षक मानता है.

यह भी पढ़ें: 'रास्ता हम तय करेंगे', होर्मुज खोलने के लिए ईरान की थीं ये शर्तें! अमेरिकी जहाजों पर क्या कहा?

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों पर यूएस की समुद्री नाकेबंदी जारी रहती है, तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अगर ईरान के आर्थिक हितों और बंदरगाहों को निशाना बनाना बंद नहीं किया गया, तो वे अपनी कूटनीति में कठोर रुख अपनाएंगे. हालांकि, लेबनान में सीजफायर के बाद ईरान ने कुछ नरमी दिखाने के इशारे किए हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा शर्तों पर वह अडिग बना हुआ है.

वैश्विक इकॉनमी और ऊर्जा संकट का साया

होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है. शिपिंग एसोसिएशन BIMCO ने चेतावनी दी है कि जहाजों के गुजरने वाले लेन की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है. इस तनाव के बीच ग्लोबल मार्केट की निगाहें लंदन में होने वाली अगली सैन्य बैठक पर टिकी हैं, जहां से यह तय होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव और सैन्य मिशन के जरिए तेल की ग्लोबल सप्लाई लाइन को सुरक्षित किया जा सकेगा.

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