'भूकंप की तरह करेंगे पलटवार', ट्रंप के 'इकोनॉमिक D-Day' की धमकी पर भड़का ईरान... तेल की सप्लाई रोकने की दी चेतावनी

अमेरिका ने ईरान पर नई आर्थिक पाबंदियां लगाते हुए उसके प्रतिबंध चोरी करने वाले नेटवर्क को निशाना बनाया है, लेकिन बड़ी नई पाबंदियां न लगने से यह कदम कमजोर माना जा रहा है. जवाब में ईरान ने होर्मुज समेत पूरे खाड़ी क्षेत्र से तेल सप्लाई रोकने, यूरोपीय देश बुल्गारिया जैसे नाटो सदस्यों तक जंग फैलाने और परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने की धमकी दी है.

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ईरान ने फारस की खाड़ी से तेल निर्यात पूरी तरह रोकने की धमकी दी (Photo: AFP) ईरान ने फारस की खाड़ी से तेल निर्यात पूरी तरह रोकने की धमकी दी (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को तोड़ने के लिए एक नई योजना शुरू की है, जिसके जवाब में ईरान ने पूरी दुनिया को हिला देने वाली चेतावनी दी है. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका उस पूरे नेटवर्क को निशाना बनाएगा, जिसे ईरान ने सालों में बनाया है ताकि वह अमेरिकी प्रतिबंधों से बच सके. यह ऐलान उस जंग के छह महीने बाद आया है, जो अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ शुरू की थी और अब यह जंग बिना किसी हल के अटकी हुई है.

नई पाबंदियां डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी और शिपिंग जैसे सेक्टरों में ईरान के कारोबारी साझेदारों पर लगाई जाएंगी. हालांकि लोग इस ऐलान से खुश नहीं हुए क्योंकि जिसे ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' कहा जा रहा था, उसमें कोई बड़ी नई पाबंदी नहीं लगाई गई, बल्कि पुराने प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू करने की बात कही गई. साथ ही चेतावनी दी गई कि जो देश ईरान से रिश्ते नहीं तोड़ेंगे, उन पर आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है. इसके जवाब में ईरान डरने की बजाय पलटवार करने की धमकी दे रहा है. ईरान ने कहा है कि वह खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देशों और यूरोपीय देशों पर हमले बढ़ा सकता है, और अपने परमाणु कार्यक्रम को हथियार बनाने का इशारा भी दे चुका है.

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हम लंबे समय से शतरंज खेल रहे हैं और अब पोकर भी सीख गए हैं, यानी अब हम दोनों का मिला जुला खेल खेल रहे हैं. सबसे बड़ा खतरा तेल की सप्लाई को लेकर है. ईरान पहले से ही होर्मुज से जहाजों को गुजरने से रोक रहा है, जो जंग से पहले दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब बीस प्रतिशत हिस्सा संभालता था.

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यमन में ईरान समर्थित हूती गुट ने भी लाल सागर में सऊदी तेल निर्यात और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. अब ईरान के सैन्य अधिकारी होर्मुज से आगे बढ़कर उन नए रास्तों पर भी हमला करने की धमकी दे रहे हैं, जिनका इस्तेमाल जलडमरूमध्य को बायपास करने के लिए किया जा रहा है. सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रज़ाई ने कहा कि अगर आर्थिक जंग जारी रही तो होर्मुज से या खाड़ी के किसी भी हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होने देंगे, और हम भूकंप की तरह पलटवार करेंगे. इस धमकी का असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे अमेरिका में पेट्रोल के दाम भी बढ़ सकते हैं.

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अमेरिकी नेवी की मदद से सऊदी, कुवैत, कतर और यूएई की तेल कंपनियां अपने जहाजों के ट्रांसपोंडर बंद करके ईरान की नजरों से बचने की कोशिश कर रही हैं. सऊदी अरब ने रोजाना करीब पचास लाख बैरल तेल अपनी ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर से भेजना शुरू कर दिया है. अन्य खाड़ी देशों ने भी बीस लाख बैरल तेल का रास्ता बदला है. लेकिन ईरान ने पैंतालीस जहाजों की एक लिस्ट जारी करते हुए कहा है कि जो जहाज उसके नियम नहीं मानेंगे, उन्हें जुर्माना, हिरासत या जब्ती जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह जंग का दायरा बढ़ा सकता है. सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुल्गारिया से उड़ान भरने वाले अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों का जिक्र करते हुए कहा कि नाटो सदस्य होने के बावजूद बुल्गारिया भी निशाने पर आ सकता है. बघई ने कहा कि हमला करने वाले देश या अड्डे को निशाना बनाना ईरान का कानूनी अधिकार है. जंग के दौरान ईरान अब तक ग्यारह देशों पर हमला कर चुका है, जिनमें ज्यादातर खाड़ी क्षेत्र के देश हैं, और साइप्रस स्थित ब्रिटिश अड्डे पर भी हमला होने की बात कही जा रही है.

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ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हमले में मौत के बाद परमाणु हथियार को लेकर ईरान का रुख बदलता दिख रहा है. खामेनेई परमाणु हथियार के सख्त खिलाफ थे, लेकिन अब ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने पर बहस चल रही है.

ईरान के पास करीब पांच सौ किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद बताया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल हथियार बनाने में हो सकता है. रज़ाई ने कहा कि जब अमेरिका ऐसी जंग लड़ रहा है तो लोग पूछ रहे हैं कि हम खुद परमाणु हथियार क्यों न बनाएं.

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के प्रतिबंध, नाकाबंदी और सैन्य कार्रवाई से ईरान अपनी मुख्य मांगों से पीछे नहीं हटेगा. सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के सीनियर फेलो सिना तूसी के मुताबिक ईरान के पास क्षेत्रीय स्तर पर ऊर्जा और व्यापार को निशाना बनाकर दबाव बनाने की ताकत बनी हुई है, और जितनी सख्ती अमेरिका दिखाएगा, ईरान उतने ही और देशों पर दबाव बनाएगा.

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