UAE पर मिसाइल हमले की तैयारी कर रहा ईरान? खाड़ी देशों में बढ़ी हलचल

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अगले 24 घंटे में यूएई को निशाना बना सकता है. इसी बीच अमेरिका ने वैश्विक सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. दोनों देशों के बीच लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है.

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अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान यूएई पर मिसाइल हमले कर सकता है. (Photo: X/@iranwatch.org) अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान यूएई पर मिसाइल हमले कर सकता है. (Photo: X/@iranwatch.org)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन/तेहरान,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने सऊदी अरब और ओमान को संकेत दिया है कि वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को बड़े पैमाने पर निशाना बनाने की योजना बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 24 घंटे के भीतर यूएई पर मिसाइल हमले की आशंका जताई गई है. हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल इस दावे पर ईरान या यूएई की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

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इधर, अमेरिकी विदेश विभाग ने मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए ग्लोबल सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विभाग ने कहा है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति बेहद जटिल और अस्थिर बनी हुई है. दुनिया भर में मौजूद अमेरिकी नागरिकों, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट में रह रहे या वहां यात्रा की योजना बना रहे लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने और सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की गई है.

इस बीच अमेरिका ने लगातार आठवें दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई इन कार्रवाइयों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को निशाना बनाना है.

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ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिकी सेना ने शादेगन, बंदर अब्बास, केशम, हाजियाबाद और सिरिक समेत कई इलाकों में बमबारी और मिसाइल हमले किए हैं. दूसरी ओर, ईरान ने जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाबी हमला करने का दावा किया है. रिपोर्टों के अनुसार, जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि ईरान ओमान की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करेगा, लेकिन होर्मुज पर अपनी संप्रभुता किसी भी कीमत पर बनाए रखेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ किसी नई वार्ता की कोई योजना नहीं है और ईरान तथाकथित दक्षिणी समुद्री मार्ग को स्वीकार नहीं करेगा. उधर, ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी गई है. सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा कि यदि अमेरिकी हमले अगले कुछ दिनों तक जारी रहे तो ईरान पूर्ण आक्रामक अभियान शुरू करेगा. 

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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमले जारी रहे तो ऐसा जवाब मिलेगा, जिसे अमेरिका कभी नहीं भूल पाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने करीब एक महीने पहले हुए अंतरिम समझौते का सम्मान नहीं किया, जो यह बताता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दस्तखत की अब कोई कीमत नहीं रह गई है. अमेरिका के लगातार हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. 

ईरान ने जॉर्डन की ओर दागीं मिसाइलें

इजरायल की सेना ने दावा किया है कि ईरान ने पड़ोसी देश जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागी हैं और चेतावनी दी है कि इस हमले की आग उसकी सीमाओं तक भी पहुंच सकती है. आईडीएफ (Israel Defence Forces) ने रविवार को कहा कि लोगों को कई हफ्तों बाद पहली बार एयर रेड सायरन सुनाई दे सकते हैं. सेना के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन के बंदरगाह शहर अकाबा (Aqaba) की दिशा में मिसाइलें दागी हैं. बता दें कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल ने ईरान पर हवाई हमलों की शुरुआत की थी. 

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हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष दोबारा भड़कने के बाद से इजरायल ने सीधे सैन्य कार्रवाई से फिलहाल दूरी बनाए रखी है. पिछले सप्ताह अमेरिका के साथ युद्धविराम टूटने के बाद ईरान ने अपने हमलों का फोकस इजरायल के बजाय अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों और जॉर्डन पर रखा है. यदि ईरान इजरायली क्षेत्र को सीधे निशाना बनाता है, तो इससे मौजूदा संघर्ष और व्यापक हो सकता है तथा पूरे क्षेत्र में युद्ध के और फैलने का खतरा बढ़ जाएगा.
 

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