होर्मुज खुलते ही भरभराकर गिरीं तेल-गैस की कीमतें! भारत पर क्या होगा असर?

ईरान ने 49 दिन बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को युद्धविराम के दौरान सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली है. तेल की कीमतों में लगभग 11% और गैस की कीमतों में 8.5% की गिरावट दर्ज की गई है.

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सभी कमर्शियल जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है (Photo: AFP) सभी कमर्शियल जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है (Photo: AFP)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:44 PM IST

ईरान ने बड़ी घोषणा करते हुए शुक्रवार को पूरे 49 दिन बाद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दिया. यानी सीजफायर के बाकी दिनों के लिए अब जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुल चुका है. यह खबर ऊर्जा बाजार में बड़ी राहत लेकर आई है और तेल-गैस की कीमतें भरभराकर गिर पड़ी हैं. तेल की कीमतों में करीब 11% और गैस की कीमतों में 8.5 फीसदी की गिरावट आई है.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के होर्मुज खोलने के ऐलान के तुरंत बाद तेल कीमतों में करीब 11 फीसदी की गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि युद्धविराम की शेष अवधि के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से सभी कमर्शियल जहाजों की आवाजाही अब खुली रहेगी.

इसके बाद वैश्विक कच्चा तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 10.59 डॉलर यानी 10.7 फीसदी गिरकर 88.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. सेशन के दौरान यह गिरकर 87.71 डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया.

वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 10.80 डॉलर यानी 11.4 फीसदी टूटकर 83.89 डॉलर प्रति बैरल रह गया. कारोबार के दौरान यह 83 डॉलर तक फिसल गया. दोनों प्रमुख तेल कॉन्ट्रैक्ट 11 मार्च के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं.

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यूरोप के बेंचमार्क गैस कॉन्ट्रैक्ट में भी भारी गिरावट आई है. गैस करीब 8.5 फीसदी गिर गई है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में युद्ध खत्म करने के लिए जल्द समझौता हो सकता है, हालांकि इसकी समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन इन खबरों से ऊर्जा बाजार में सकारात्मक संदेश गया है और कीमतें गिर रही हैं.

होर्मुज का खुलना भारत के लिए बड़ी राहत

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होर्मुज स्ट्रेट से होता है. भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट का खुलना बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि देश की कुल कच्चे तेल आयात का 40-50 प्रतिशत (लगभग 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन) खाड़ी देशों- इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत से होर्मुज के जरिए आता है.

युद्ध के दौरान होर्मुज में रुकावट की वजह से मार्च 2026 में भारत का कुल कच्चा तेल आयात करीब 15 प्रतिशत घट गया था.

इसे देखते हुए भारत को एक बार फिर रूस की तरफ रुख करना पड़ा था. इस वजह से रूस से आयात में 90 प्रतिशत की उछाल आई और यह 1.9-2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया.

वहीं खाड़ी देशों से तेल-गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई. भारत होर्मुज स्ट्रेट के जरिए अपने एलपीजी आयात का 90% मंगाता था लेकिन यह गिरकर 40 प्रतिशत रह गया था. एलएनजी आपूर्ति भी बाधित रही. इससे देश में कुकिंग गैस की भारी किल्लत देखने को मिली है.

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होर्मुज खुलने के तुरंत बाद तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत की खबर है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रति 10 डॉलर कीमत में गिरावट से भारत का वार्षिक तेल आयात बिल 1.5-2 अरब डॉलर तक कम हो सकता है. अप्रैल में भारत ने पहले चरण में महंगा तेल (125 डॉलर/बैरल के आसपास) खरीदा था, अब कीमतें स्थिर होने से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव कम होगा.

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