'नहीं देंगे 1 अरब डॉलर...', ईरान जंग के बीच इस मुस्लिम देश ने ट्रंप को दिया करारा झटका!

इंडोनेशिया ने अमेरिकी 'बोर्ड ऑफ पीस' की स्थायी सदस्यता के लिए मांगी गई 1 अरब डॉलर की फीस देने से साफ मना कर दिया है. राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा कि देश ने केवल शांति स्थापना के लिए सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई थी और फीस देने के लिए कभी सहमति नहीं दी.

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प्रबोवो सुबियांतो ने बोर्ड ऑफ पीस के लिए पैसे देने से इनकार किया है (Photo: AFP) प्रबोवो सुबियांतो ने बोर्ड ऑफ पीस के लिए पैसे देने से इनकार किया है (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:47 PM IST

दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले इस्लामिक देश इंडोनेशिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' का स्थायी सदस्य बनने से साफ मना कर दिया है. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से जुड़ने को लेकर देश में भारी आलोचना का सामना कर रहे हैं. इन आलोचनाओं के बीच सुबियांतो ने साफ किया है कि उनका देश स्थायी सदस्यता के लिए मांगी जा रही 1 अरब डॉलर की फीस नहीं देगा.

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रविवार को राष्ट्रपति के यूट्यूब चैनल पर जारी बयान में प्रबोवो सुबियांतो ने कहा कि इंडोनेशिया ने इस पहल के तहत केवल शांति-स्थापना के लिए सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई थी.

ट्रंप प्रशासन ने कतर और मिस्र के साथ मिलकर अक्टूबर में गाजा में दो साल से जारी युद्ध को रोकने के लिए युद्धविराम कराया था. इसी युद्धविराम के तहत बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की गई.

इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता चाहने वाले देशों को 1 अरब डॉलर का भुगतान करना होगा. इसकी काफी आलोचना हो रही है और कहा जा रहा है कि पैसे देकर सदस्य बनने का कोई मतलब नहीं है.

मुस्लिम समूहों की आलोचना भी झेल रहे हैं सुबियांतो

पूर्व जनरल प्रबोवो को इंडोनेशिया के मुस्लिम ग्रुप्स की आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्होंने इस बोर्ड में शामिल होने और गाजा में 8,000 शांति सैनिक भेजने का वादा किया है.

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प्रबोवो ने पिछले महीने अमेरिका में 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में हिस्सा लिया था. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि अगर यह पहल फिलिस्तीनियों के लिए फायदेमंद साबित नहीं होती या इंडोनेशिया के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं होती, तो वो इससे बाहर निकल जाएंगे.

रविवार को अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक बयान में प्रबोवो ने कहा, 'हमने कभी ये नहीं कहा कि हम 1 अरब डॉलर का योगदान देंगे.' उन्होंने साफ किया कि वो पैसे देने के लिए कभी राजी नहीं हुए.

पिछले महीने प्रबोवो ने अमेरिका के साथ एक टैरिफ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन रविवार को उन्होंने कहा कि अगर किसी समझौते की शर्तें या उसे लागू करना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ जाता है तो इंडोनेशिया उससे पीछे हट सकता है.

इंडोनेशिया की समाचार एजेंसी अंतारा के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वहद नबील अचमद मुलाचे ला ने बताया कि गाजा में किसी भी शांति मिशन को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत फिलहाल स्थगित कर दी गई है.

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