नेपाल और चीन की सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड को लेकर चीन ने बड़ा बयान दिया है. चीन के मुताबिक, नेपाल में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने से यह विनाशकारी बाढ़ आई हो सकती है. इस बाढ़ में अब तक 547 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. बाढ़ ने सड़क, पुल, घर और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों ने आपदा के कारणों का शुरुआती आकलन किया है. उनके मुताबिक, शुरुआती जांच में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने को बाढ़ की वजह माना जा रहा है.
ग्लेशियर टूटने के बाद नदी में आया तेज उफान
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा ल्हेंदे नदी में गिरा होगा. इससे कुछ समय के लिए नदी का रास्ता बंद हो गया. मलबे से नदी में एक तरह की प्राकृतिक दीवार बन गई. जब यह दीवार टूटी तो पानी बहुत तेजी से नीचे की ओर बहा.
तेज पानी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की ओर पहुंचा. इसके बाद कई इलाकों में तबाही मच गई. बुधवार को रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में पानी का तेज बहाव आया था. इसकी चपेट में कई पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं आ गईं.
शुरुआत में इस आपदा की वजह ग्लेशियल झील के फटने या हिमस्खलन को माना जा रहा था. लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों की जांच के बाद वैज्ञानिकों का अनुमान बदल गया है. अब बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के नदी में गिरने को मुख्य वजह माना जा रहा है.
चीन में 5 लोगों की मौत, 558 लापता
चीन ने बताया कि तिब्बत में बाढ़ से पांच लोगों की मौत हुई है. वहीं 558 लोग अब भी लापता हैं. इनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी की पुष्टि की जा रही है.
प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि संबंधित देशों के दूतावासों को जानकारी दी गई है. चीन उनके साथ लगातार संपर्क बनाए रखेगा. चीन के अधिकारियों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी से 1,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. इनमें करीब 555 पर्यटक शामिल हैं. अब इस इलाके में कोई पर्यटक फंसा नहीं है.
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद भोटेकोशी नदी के आसपास पानी का स्तर फिर बढ़ा है. इसे देखते हुए अधिकारियों ने नई चेतावनी जारी की है. लोगों को नदी के आसपास जाने से बचने को कहा गया है. बाढ़ के कारण नेपाल में कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है. सड़कें और पुल टूट गए हैं. बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है. राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं.
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चीन ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को आपदा पर संवेदना संदेश भेजा है. उन्होंने इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के प्रति दुख जताया.
शी की अध्यक्षता में हुई कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में भी आपदा को लेकर चर्चा हुई. बैठक में कहा गया कि यह इलाका बेहद ठंडा और ऊंचाई वाला है. यहां घाटियां बहुत खड़ी हैं. आसपास कई ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलें हैं. मौसम भी तेजी से बदलता है. ऐसे हालात में राहत और बचाव अभियान चलाना काफी चुनौतीपूर्ण है.
चीन ने सभी संबंधित विभागों को प्रभावी तरीके से राहत और बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. लापता चीनी और विदेशी नागरिकों की तलाश पर जोर दिया गया है. चीन ने नेपाल को आपातकालीन मदद देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बचाव अभियान में सहयोग करने की बात भी कही है.
नेपाल और चीन के अलावा अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की शुरुआती जांच में भी ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहाव को बाढ़ की वजह माना गया है. वैज्ञानिक सैटेलाइट तस्वीरों और दूसरी जानकारियों की मदद से घटना को समझने में जुटे हैं.
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फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना है. वहीं भोटेकोशी और दूसरी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है. अधिकारियों को आशंका है कि ऊंचाई वाले इलाकों में बने प्राकृतिक जलस्रोतों और मलबे के कारण आगे भी अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है.
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