चीन में गुरुवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई. भारतीय समयानुसार, भूकंप 5 नवंबर की सुबह 06:19 बजे आया.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 32.592 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 94.291 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था. इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई.
फिलहाल इसमें किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है.स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
कैसे हिलती है धरती?
हमारी पृथ्वी बाहर से भले ही एक ठोस गोले जैसी दिखाई देती हो, लेकिन इसके अंदर कई परतें मौजूद हैं. पृथ्वी की आंतरिक संरचना को मुख्य रूप से चार हिस्सों में बांटा गया है. सबसे अंदरूनी परत इनर कोर (Inner Core), उसके बाहर आउटर कोर (Outer Core), फिर मैंटल (Mantle) और सबसे ऊपर क्रस्ट (Crust) होती है. क्रस्ट पृथ्वी की सबसे बाहरी और ठोस परत है. इसके नीचे मैंटल मौजूद है. पृथ्वी की ऊपरी कठोर परत को लिथोस्फीयर (Lithosphere) कहा जाता है, जिसमें क्रस्ट और मैंटल का ऊपरी हिस्सा शामिल होता है. यह कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) कहते हैं.
ये टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं. जब दो प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर हलचल पैदा होती है. प्लेटों के बीच जमा तनाव जब अचानक ऊर्जा के रूप में बाहर निकलता है, तो धरती कांपने लगती है. इसी हलचल को भूकंप कहा जाता है.
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल का इस्तेमाल किया जाता है. यह भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा बताता है. इसकी तीव्रता को किसी तय सीमा में 1 से 9 तक बांधना सही नहीं है, क्योंकि इस पैमाने पर 9 से अधिक तीव्रता भी दर्ज की जा सकती है. भूकंप की तीव्रता जितनी अधिक होती है, उतना ही ज्यादा नुकसान भी होगा.
भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर वह स्थान होता है, जहां से भूकंपीय ऊर्जा निकलती है. इसे हाइपोसेंटर या फोकस कहते हैं. इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को एपीसेंटर कहा जाता है. भूकंप से निकलने वाली तरंगें चारों ओर फैलती हैं. केंद्र से दूरी बढ़ने के साथ आमतौर पर इनकी तीव्रता कम होती जाती है. हालांकि, झटकों का असर भूकंप की गहराई, जमीन की बनावट और इमारतों की स्थिति पर भी निर्भर करता है.
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