नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर अपने नेताओं के बयान से बंगाल में घिरी बीजेपी, ममता ने भी खोला मोर्चा

पश्चिम बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के इतिहास और योगदान पर बीजेपी के कुछ नेताओं ने विवादित बयान दिए हैं. इसे लेकर राज्य की सियासत में हंगामा हो गया है. ममता बनर्जी ने सड़क पर उतरकर इन बयानों का विरोध किया है. खुद बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले पर अपनी नाराजगी जताई है.

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बीजेपी नेताओं ने सुभाष चंद्र बोस पर विवादित बयान दिया. (Photo- ITGD) बीजेपी नेताओं ने सुभाष चंद्र बोस पर विवादित बयान दिया. (Photo- ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST

देश अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में डूबा हुआ है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जगह-जगह 'तिरंगा यात्रा' निकाल रहे हैं. वो पूरे प्रदेश में 'हर घर तिरंगा' अभियान को सफल बनाने की अपील कर रहे हैं. हालांकि, इस राष्ट्रीय पर्व के माहौल के बीच बंगाल की राजनीति में एक बड़ा विवाद पैदा हो गया है.

दरअसल कूचबिहार के स्वघोषित महाराज और ग्रेटर कूच बिहार पीपुल्स एसोसिएशन के शीर्ष नेता नागेन रॉय ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के इतिहास और उनके योगदान पर विवादित टिप्पणी की है. नागेन रॉय को 'अनंत महाराज' के नाम से भी जाना जाता है.

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पिछले महीने बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्थापित राजनीतिक दल 'फॉरवर्ड ब्लॉक' को लेकर तीखा बयान दिया था. ऐसे में बंगाल की सियासत में घमासान छिड़ गया है.

'हिंदुस्तान और पाकिस्तान अस्तित्व में ही नहीं आते'

BJP से राज्यसभा सांसद अनंत महाराज लंबे समय से अलग राज्य 'ग्रेटर कूच बिहार' की मांग कर रहे हैं. उन्होंने हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, 'कूच बिहार के महाराजा जगद्दीपेंद्र नारायण ने ही भारत और पूरी दुनिया को आजाद कराया था. अगर उस समय हमारे महाराजा को देश का सम्राट बना दिया जाता, तो भारत और पाकिस्तान का बंटवारा ही नहीं होता. हिंदुस्तान और पाकिस्तान अस्तित्व में ही नहीं आते.'

उन्होंने गांधी-नेहरू के आंदोलनों और आजादी के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा, 'हमारे महाराजा को उनके अपने ही महल में रहने की अनुमति नहीं दी गई थी. उनका पानी और बिजली तक काट दिया गया था. लोग कहते हैं कि गांधी और नेहरू के आंदोलनों से देश आजाद हुआ. लेकिन अन्य राज्यों को आजादी कैसे मिली? कौन सा गांधी था और कौन सा नेहरू? सच तो ये है कि हमारे महाराजा ने हिटलर और आजाद हिंद फौज को युद्ध में हराया और उनका नाश किया.'

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'नेताजी ने उस मौके का सरासर गलत इस्तेमाल किया'

नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की प्रासंगिकता को खारिज करते हुए अनंत महाराज ने आगे कहा, 'क्या नेताजी के पिता के पास कोई सत्ता थी? या वो खुद आजाद हिंद फौज बना रहे थे? वो सभी असल में ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिक थे. जर्मनों ने उन ब्रिटिश सैनिकों को बंदी बनाया और बाद में नेताजी को सौंप दिया. नेताजी ने उस मौके का सरासर गलत इस्तेमाल किया.

उन्होंने ब्रिटिश कालीन कानून व्यवस्था की तारीफ की और कहा, 'हमारे पूर्वजों ने आजाद हिंद फौज के किसी भी व्यक्ति को सजा नहीं दी थी. अगर आज कोई सरकार के खिलाफ हथियार उठाता है, तो उसे मेरा सामना करना पड़ेगा. ब्रिटिश शासन में भी कड़े नियम-कानून थे. तो फिर आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार क्यों उठाए? उस समय उन्हें मृत्युदंड क्यों नहीं दिया गया?'

शमिक भट्टाचार्य की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

वहीं, शमिक भट्टाचार्य ने दावा किया था कि फॉरवर्ड ब्लॉक के कार्यकर्ता उस दौर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर हुए हमलों में शामिल थे. उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक को 'गुंडों का गिरोह' तक कह डाला. शमिक ने आरोप लगाया था कि उस समय जब बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे थे, तब मुखर्जी की अपीलों और चेतावनियों पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनके भाई शरत चंद्र बोस ने कोई ध्यान नहीं दिया था.

नेताजी जैसी शख्सियत के अपमान पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अब तक कोई बयान जारी नहीं किया गया है. जब एक प्रमुख बंगाली दैनिक समाचार पत्र ने शमिक भट्टाचार्य से अनंत महाराज के बयान के बारे में पूछा, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा, 'पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम और बयानों पर बहुत बारीक नजर बनाए हुए है.'

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हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने इस मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर खुलकर अपनी नाराजगी जताई. उन्होंने लिखा, 'मैंने इस स्वघोषित महाराज के बारे में पहले कभी नहीं सुना था. बंगालियों और राजबंगशी समुदाय के बीच दरार पैदा करने के मकसद से इसे राजनीति में आगे लाया गया है.'

उन्होंने आगे कहा, 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में की गई ये भद्दी और अमर्यादित टिप्पणियां इसी गहरी साजिश का हिस्सा हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व इस गंभीर स्थिति से वाकिफ है और इस राज्यसभा सांसद से निपटने के लिए उनके पास कोई न कोई रणनीति जरूर होगी.'

उधर, उत्तर बंगाल विकास विभाग के मंत्री निशीत प्रमाणिक ने भी सांसद के बयान से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया. उन्होंने कहा, 'मुझे बिल्कुल समझ नहीं आ रहा कि अनंत महाराज ने ऐसा बयान क्यों दिया. मैं व्यक्तिगत स्तर पर उनके इस बयान का कभी समर्थन नहीं कर सकता. नेताजी सुभाष चंद्र बोस हमारे देश के सबसे महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं और उनका स्थान सर्वोच्च है.'

ममता बनर्जी ने सड़कों पर उतरकर जताया विरोध

नेताजी के खिलाफ लगातार आ रहे विवादित बयानों के खिलाफ राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने सीधे सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है. मंगलवार को ममता बनर्जी कोलकाता के श्यामबाजार पांच माथा मोड़ पहुंचीं और वहां स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

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ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, 'हम उन ताकतों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं जो हर दिन, हर पल हमारे राष्ट्रनायकों- रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद का अपमान कर रहे हैं. इसी अनादर और अपमान के विरोध में मैं आज खुद यहां नेताजी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करने आई हूं. आज 11 अगस्त का ऐतिहासिक दिन है, जो महान क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस का जन्मदिन भी है.'

वहीं, बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पूरे देश का महानायक मानते हैं. लेकिन अफसोस की बात है कि BJP के लोग लगातार नेताजी के नाम और उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचा रहे हैं. हम उनके इस आचरण की घोर निंदा करते हैं. इसीलिए हमने आज यहां जमा होकर जय हिंद का नारा बुलंद किया है. हम अपने देश के उन तमाम महापुरुषों के सम्मान के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी.'

यह भी पढ़ें: EXCLUSIVE: नेताजी बोस के परपोते बनाएंगे नई पार्टी, Gen-Z प्रोटेस्ट का असर, हाल ही में छोड़ी थी TMC

'बांग्ला पक्ष' ने दी तीखी प्रतिक्रिया

बंगाली भाषा और संस्कृति के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'बांग्ला पक्ष' के नेता गर्ग चटर्जी ने भी इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने कहा, 'अगर महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज का इस तरह अपमान किया गया होता, जिस तरह बंगाल में BJP के दो सांसद और उनके समर्थक लगातार नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान कर रहे हैं, तो वहां की जनता की प्रतिक्रिया आने से पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पुलिस में FIR दर्ज करवा चुके होते और गुनहगारों को एक घंटे के अंदर सलाखों के पीछे डाल दिया गया होता.'

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ऐसे में साफ है कि नेताजी के इतिहास और उनके योगदान पर बीजेपी नेताओं की टिप्पणियों से पार्टी को धर्मसंकट में डाल दिया है. 

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