EXCLUSIVE: नेताजी बोस के परपोते बनाएंगे नई पार्टी, Gen-Z प्रोटेस्ट का असर, हाल ही में छोड़ी थी TMC

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस नई 'आजाद हिंद पार्टी' बनाने जा रहे हैं. उनका कहना है कि जंतर-मंतर के Gen-Z आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने यह फैसला लिया. हाल ही में उन्होंने TMC भी छोड़ दी थी.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा पर बनेगी आजाद हिंद पार्टी (Photo: ITG) नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा पर बनेगी आजाद हिंद पार्टी (Photo: ITG)

अनिर्बन सिन्हा रॉय

  • कोलकाता,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:00 AM IST

देश की राजनीति में एक नए दल की एंट्री की तैयारी शुरू हो गई है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने 'आजाद हिंद पार्टी' बनाने का ऐलान किया है. हाल ही में TMC छोड़ने वाले चंद्र कुमार बोस का कहना है कि यह पार्टी देश के युवाओं को साथ लेकर चलेगी और नेताजी की विचारधारा को आगे बढ़ाएगी.

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आजतक से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि नई पार्टी Gen-Z यानी आज की युवा पीढ़ी के साथ मिलकर खड़ी की जाएगी. उनका कहना है कि इसका मकसद नेताजी की समावेशी और धर्मनिरपेक्ष सोच के आधार पर देश को नई दिशा देना है.

जंतर-मंतर के प्रदर्शन से मिली प्रेरणा

चंद्र कुमार बोस ने बताया कि आजादी के 80 साल बाद एक बार फिर देश का युवा आगे आ रहा है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के हालिया विरोध प्रदर्शन ने उन्हें काफी प्रभावित किया.

देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासनिक व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार आम लोगों को परेशान कर रहा है. हर तरफ फैली इस गड़बड़ी से आज का युवा पूरी तरह परेशान हो चुका है. इसी वजह से युवाओं को अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए आजाद हिंद फौज की तर्ज पर एक साफ-सुथरे मंच की जरूरत महसूस हो रही थी.

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BJP और TMC छोड़ने की वजह बताई

चंद्र कुमार बोस का यह राजनीतिक सफर अचानक शुरू नहीं हुआ है. साल 2016 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने 7 साल तक काम किया. उनका कहना है कि पार्टी ने उनसे आजाद हिंद मोर्चा बनाने का वादा किया था, ताकि नेताजी के विचारों को देश भर में फैलाया जा सके. लंबे इंतजार के बाद भी जब यह मोर्चा नहीं बना, तो उन्होंने दूरी बना ली.

इसके बाद अप्रैल 2026 में बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वे तृणमूल कांग्रेस में गए. चुनाव नतीजों के तुरंत बाद 4 मई को उन्होंने वहां से भी इस्तीफा दे दिया. उनका आरोप है कि पार्टी बहुत ही निचले स्तर की राजनीति में उलझ गई थी.

युवाओं के भरोसे नई शुरुआत

दोनों मुख्य दलों के कड़वे अनुभवों के बाद अब उन्होंने खुद का रास्ता चुनने का मन बना लिया है. उनका मानना है कि देश का प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष युवा इस नई सोच का साथ जरूर देगा.

इस नई शुरुआत से वे उन पहली बार वोट देने वाले युवाओं को जोड़ना चाहते हैं, जो मौजूदा राजनीति और भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं. नेताजी के नाम और आदर्शों के सहारे बनी यह पार्टी चुनावी मैदान में कितनी सफल होती है, यह आने वाला वक्त बताएगा.

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