बेल्जियम से लाई गई यूपी, 10 करोड़ भाड़ा... जानिए क्या है वो विशालकाय मशीन, जिसे आगे बढ़ाने के लिए बिछानी पड़ रही हैं लोहे की चादरें

Varanasi News: बेल्जियम से लाया गया 10 करोड़ रुपये के भाड़े वाला विशाल रिएक्टर वाराणसी के कच्चे रास्ते में धंसा. 3000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से चीनी से बनेगा बायोप्लास्टिक. जानिए 260 पहियों वाले इस महाकाय ट्रक की पूरी कहानी...

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बेल्जियम से 6 महीने की यात्रा के बाद वाराणसी पहुंची 'सायक्लाजेसन रिएक्टर' मशीन. बेल्जियम से 6 महीने की यात्रा के बाद वाराणसी पहुंची 'सायक्लाजेसन रिएक्टर' मशीन.

रोशन जायसवाल / उदय गुप्ता

  • वाराणसी/चंदौली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:07 PM IST

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की कुंभी चीनी मिल में देश का पहला और सबसे बड़ा बायो पॉलीमर प्लांट स्थापित किया जा रहा है. 3000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्लांट में चीनी के दानों से पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) यानी बायोडिग्रेडेबल बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए बेल्जियम से 'सायक्लाजेसन रिएक्टर' नामक विशालकाय मशीन मंगाई गई है, जो लगभग 6 महीने की लंबी यात्रा तय करके वाराणसी पहुंच चुकी है. इसे ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से सड़क मार्ग द्वारा उत्तर प्रदेश लाया गया है, जिस पर 10 करोड़ रुपये से अधिक का परिवहन खर्च आया है.

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हालांकि, वाराणसी के डाफी टोल प्लाजा के पास बने वैकल्पिक कच्चे रास्ते में यह भारी-भरकम ट्रेलर धंस गया. इसे निकालने के लिए मिट्टी पर लोहे की चादरें बिछाई जा रही हैं और दो ट्रेलर, क्रेन, हाइड्रा मशीनों तथा टेक्निकल टीमों की मदद से इसे पीछे करके आगे बढ़ाने का काम जारी है.

260 पहियों का ट्रक, देखने उमड़ी हजारों की भीड़

वाराणसी के लंका और डाफी टोल प्लाजा पर खड़े इस विशालकाय ट्रेलर को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुट रही है. लोग इस 'बाहुबली' ट्रेलर के साथ सेल्फी ले रहे हैं और सोशल मीडिया के लिए रील्स बना रहे हैं.

NHAI अधिकारियों के अनुसार, परिवहन की सभी व्यवस्थाएं कंपनी की अपनी हैं और वे टोल शुल्क देकर आगे बढ़ रहे हैं. इस मशीन को सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी भारत की प्रमुख लॉजिस्टिक्स कंपनी जेएम बक्शी हैवी कंपनी संभाल रही है. Senior Project Manager अनेक भारती के नेतृत्व में 62 से अधिक कर्मचारियों की टीम लगातार साथ चल रही है, जिनके लिए पिछला कई महीना यह ट्रक ही उनका अस्थायी घर बना हुआ है.

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ओडिशा से यूपी तक का मार्ग और तकनीकी विशेषताएं

ट्रक के पहिए: ओडिशा से निकलते समय इस मल्टी-एक्सल ट्रक में 308 पहिए थे, लेकिन बाद में सुविधा के अनुसार इसे घटाकर वर्तमान में 260 पहिए कर दिया गया है.

इंजन क्षमता: इस भारी-भरकम ट्रेलर को खींचने के लिए 3 एक्स्ट्रा इंजन साथ चल रहे हैं. समतल रास्ते पर एक इंजन और चढ़ाई वाले इलाकों में एक से अधिक इंजन का उपयोग किया जाता है.

परिवहन रूट: बेल्जियम से समुद्री मार्ग से पारादीप पोर्ट (ओडिशा) पहुंचने के बाद यह झारखंड और बिहार होते हुए वाराणसी पहुंचा है. अब राजातालाब रिंग रोड से गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती और बलरामपुर होते हुए इसे लखीमपुर के कुंभी ले जाया जाएगा.

वाराणसी में 6 फुटब्रिज हटाने की चुनौती और 1 महीने में इंस्टॉलेशन

वाराणसी में इस अति-विशालकाय मशीन के आवागमन के लिए मार्ग में आने वाले करीब 6 ओवरहेड फुटब्रिज को हटाने की चुनौती सामने आई है. अगले 2 से 3 हफ्तों में इसके लखीमपुर पहुंचने की उम्मीद है, जहां विदेशी टेक्निकल विशेषज्ञों की देखरेख में लगभग 1 महीने के भीतर इसके इंस्टॉलेशन का लक्ष्य रखा गया है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस पूरी परियोजना की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है.

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