शारदीय नवरात्रि के पहले दिन उत्तर प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. मिर्जापुर के विंध्याचल धाम से लेकर कौशांबी के कड़ा स्थित मां शीतला मंदिर, प्रयागराज के मां अलोप शंकरी मंदिर और झांसी के ऐतिहासिक पंचकुइया मंदिर तक सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. कहीं माता रानी के जयकारे गूंजे, तो कहीं श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर मां के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की.
विंध्याचल धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब
मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा किया गया. सुबह से ही भक्त माता रानी के जयकारे लगाते हुए दर्शन-पूजन के लिए कतारों में खड़े नजर आए. विंध्याचल को प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां विंध्यवासिनी के दर्शन मात्र से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने बताया कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं. पार्किंग और आरओ वाटर की व्यवस्था भी की गई है, ताकि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को परेशानी न हो.
कड़ा धाम में मां शीतला के दर्शन को पहुंचे भक्त
कौशांबी जिले के कड़ा धाम स्थित मां शीतला मंदिर में भी नवरात्रि के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. पूर्वांचल की आराध्य देवी मानी जाने वाली मां शीतला के दर्शन के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे.
मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन भक्त मां शैलपुत्री के स्वरूप की आराधना करते हैं. श्रद्धालुओं ने मां शीतला के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं. मंदिर में स्थित पवित्र कुंड में जल अर्पित करने के लिए भी भक्त अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए. मान्यता है कि इस कुंड में जल या दूध अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है.
प्रयागराज में पालने के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु
संगम नगरी प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी मंदिर में भी नवरात्रि के दौरान विशेष उत्साह देखने को मिला. देश के 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां माता की कोई पारंपरिक प्रतिमा नहीं है. श्रद्धालु गर्भगृह में स्थापित दिव्य पालने की पूजा-अर्चना करते हैं.
पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां माता सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरने के बाद अदृश्य हो गया था. इसी वजह से इस स्थान का नाम अलोप शंकरी पड़ा. मंदिर में श्रद्धालु चुनरी, नारियल, फूल और फल चढ़ाकर मां का आशीर्वाद लेते हैं. मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुंड को दूध, दही और मेवों से भरवाकर आभार व्यक्त करते हैं. नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
झांसी के पंचकुइया मंदिर में भी लगी लंबी कतारें
बुंदेलखंड के ऐतिहासिक झांसी स्थित पंचकुइया मंदिर में भी नवरात्रि के पहले दिन सुबह तड़के से ही देवी भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे. मंदिर परिसर माता रानी के जयकारों से गूंज उठा.
इस मंदिर की खास मान्यता है कि यहां देवी मां की पांच कन्याओं के रूप में पूजा की जाती है. नवरात्रि शुरू होते ही भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना की और सुख-समृद्धि, खुशहाली की कामना की. महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं में दर्शन को लेकर खासा उत्साह नजर आया. प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं के इंतजाम किए गए हैं.
नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में दिखा भक्ति का उत्साह
नवरात्रि के पहले दिन उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख देवी मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना दिया. विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी, कड़ा धाम में मां शीतला, प्रयागराज में मां अलोप शंकरी और झांसी में पंचकुइया मंदिर में भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की. मंदिरों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया.
(प्रयागराज से पंकज श्रीवास्तव, कौशांबी से अखिलेश कुमार, मिर्जापुर से सुरेश कुमार सिंह और झांसी से प्रमोद कुमार गौतम की रिपोर्ट)
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