सड़क पर मनचलों का खौफ हो या घर की चारदीवारी में रोज-रोज का कलेश, थाने की दहलीज लांघने में आज भी कई महिलाएं झिझकती हैं. इसी हिचक को तोड़ने और आधी आबादी को महफूज माहौल देने के लिए यूपी में मिशन शक्ति केंद्र के अंतर्गत पिंक बूथ जमीन पर मोर्चा संभाले हुए हैं. राजधानी के दिल हजरतगंज में यह व्यवस्था कागजों से निकलकर कितनी कारगर साबित हो रही है, इसकी इनसाइड स्टोरी खुद वहां तैनात महिला पुलिस अफसरों की जुबानी सामने आई है.
हजरतगंज कोतवाली की मिशन शक्ति प्रभारी, सब-इंस्पेक्टर शारदा सिंह बताती हैं कि उनके पूरे इलाके में चार पिंक बूथ एक्टिव हैं. इन्हें शहर के उन व्यस्त और संवेदनशील प्वाइंट्स पर तैयार किया गया है, जहां महिलाओं की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है. यह सिर्फ शिकायत दर्ज करने का ठिकाना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित शेल्टर भी है. अगर कोई लड़की देर रात अकेली है, किसी सवारी या परिवार का इंतजार कर रही है और खुद को असहज महसूस कर रही है, तो वह सीधे पिंक बूथ के भीतर बैठ सकती है. हर बूथ पर 24 घंटे महिला पुलिसकर्मी मुस्तैद रहती हैं.
पिंक बूथ की डायरी में दर्ज होने वाले मामलों की फेहरिस्त भी बेहद हैरान करने वाली है. एसआई शारदा सिंह के मुताबिक, यहां सबसे ज्यादा मामले घरेलू कलह और पतियों की शराबखोरी व मारपीट के आते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि ज्यादातर महिलाएं तुरंत कानूनी कार्रवाई नहीं चाहतीं. वे पुलिस के पास आकर गुहार लगाती हैं कि मुकदमा न किया जाए, बस उन्हें थोड़ा डांट-डपट दिया जाए, ताकि वे सुधर जाएं और हाथ न उठाएं.
इस तरह की शिकायतें आती हैं
इसी तरह कॉलेज छात्राओं या कामकाजी महिलाओं के मोबाइल पर अनचाहे कॉल्स और मैसेज से तंग किए जाने की शिकायतें भी बड़ी तादाद में आती हैं, जहां पीड़िताएं पहले चेतावनी देकर मामला सुलझाना चाहती हैं. हालांकि, हर मामला सिर्फ समझाइश तक सीमित नहीं रहता. छेड़खानी और गंभीर उत्पीड़न के मामलों में जब पीड़िता सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करती है, तो बिना देर किए तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर एक्शन लिया जाता है.
वहीं, जिन पारिवारिक विवादों में महिला खुद सुलह चाहती है, वहां पुलिस दोनों पक्षों की काउंसलिंग कर समझौते की राह निकालती है. महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से फरियादी अपनी वो निजी बातें भी खुलकर बयां कर पाती हैं, जिन्हें वे पुरुष अधिकारियों के सामने कहने से कतराती थीं.
हजरतगंज वीवीआईपी जोन होने के चलते यहां सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि पूरे सूबे के अलग-अलग जिलों से अपनी फरियाद लेकर महिलाएं पहुंचती हैं. मिशन शक्ति हेल्प डेस्क पर दिन और रात की शिफ्ट में महिला सिपाहियों की राउंड-द-क्लॉक तैनाती रहती है. कई बार दूर-दराज से आई बेसहारा महिलाओं को रात में सुरक्षित रुकने की जगह नहीं मिलती, ऐसे में यह केंद्र उनके लिए एक सुरक्षित पनाहगाह का काम करता है, जहां पूरी सुरक्षा के बीच उनकी समस्याओं की सुनवाई होती है.
शक्ति हेल्प डेस्क और मिशन शक्ति केंद्र
मिशन शक्ति हेल्प डेस्क और मिशन शक्ति केंद्र दोनों ही हैं. यहां रात में भी दो-दो महिला कांस्टेबल्स की ड्यूटी होती है. बहुत बार ऐसा होता है कि क्षेत्र से कहीं महिला आती है या कहीं और से. यहां वीवीआईपी क्षेत्र होने के चलते महिलाएं अलग-अलग जगह से, पूरे प्रदेश से अपनी समस्याओं को लेकर आती हैं. कई बार महिलाओं को लेने के लिए वहां से कोई नहीं आ पाता है, तो उन्हें यहां रखा जाता है. यहां महिलाओं की ड्यूटी दिन और रात की शिफ्ट में लगाई जाती है.
अंकित मिश्रा