पीएम मोदी के 'विशेष दूत' बनकर रूस पहुंचे यूपी के डिप्टी CM केशव मौर्य, जानिए मामला

दरअसल, 11 से 18 अक्टूबर तक रूस में एक भव्य बौद्ध प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है. इस विशेष अवसर पर रूस जाने वालों में केशव मौर्य के साथ 11 वरिष्ठ भारतीय भिक्षुओं का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- 'यह मेरे जीवन का अत्यंत सौभाग्यशाली क्षण है. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से धन्यवाद करता हूं.'

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केशव प्रसाद मौर्य भगवान गौतम बुद्ध के अवशेष लेकर रूस पहुंचे (Photo- ITG) केशव प्रसाद मौर्य भगवान गौतम बुद्ध के अवशेष लेकर रूस पहुंचे (Photo- ITG)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ ,
  • 12 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 9:02 PM IST

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भगवान गौतम बुद्ध के अवशेष लेकर रूस के कलमीकिया गणराज्य की राजधानी एलिस्टा पहुंचे हैं. मौर्य पीएम नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के तौर पर वहां गए हैं, जहां सात दिनों तक बुद्ध के अवशेषों को लोगों के दर्शनार्थ रखा जाएगा.

यह यात्रा भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से प्रेरित है, और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है. केशव प्रसाद मौर्य ने नई दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रूस के लिए प्रस्थान किया. 

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सात दिनों तक होंगे दर्शन

रूस में भगवान बुद्ध के अवशेषों को सात दिनों तक, यानी 11 से 18 अक्टूबर तक, लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा. इस दौरान एक भव्य बौद्ध प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जा रहा है. इस ऐतिहासिक पहल के तहत, पहली बार भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को रूस लाया गया है. केशव मौर्य के साथ, 11 वरिष्ठ भारतीय भिक्षुओं का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस यात्रा में शामिल है. 

पीएम मोदी का जताया आभार

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए, केशव प्रसाद मौर्य ने इस अवसर को अपने जीवन का अत्यंत सौभाग्यशाली क्षण बताया. उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से धन्यवाद किया. रूस के कलमीकिया प्रांत में करीब 300 साल पहले भारत से गए लोगों ने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी. इस यात्रा से वहां के बौद्ध समुदाय में भारी उत्साह है और उन्होंने भारत सरकार की जमकर तारीफ की है. 

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'युद्ध नहीं बुद्ध' की नीति से प्रभावित रूसी नागरिक

यह यात्रा भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना को दर्शाती है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल से रूसी नागरिक भी काफी प्रभावित हुए हैं, खासकर भारत की ‘युद्ध नहीं, बुद्ध’ की नीति से. यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सद्भावना को भी बढ़ाएगी.

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