मेरठ के दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित सिवाया गांव में रविवार को इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल देखने को मिली. यहां एक व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत के बाद जब उसका जनाजा कब्रिस्तान ले जाने के लिए हाईवे पर पहुंचा तो कांवड़ियों ने खुद आगे बढ़कर रास्ता बनवाया. जनाजे को रास्ता देने के लिए हजारों कांवड़िए कुछ देर के लिए रुक गए. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
दरअसल, सिवाया गांव निवासी 40 वर्षीय निजाम की रविवार को अचानक हार्ट अटैक आने से मौत हो गई. मौत के बाद परिजन शव को दफनाने के लिए जनाजा लेकर कब्रिस्तान की ओर निकले. गांव का कब्रिस्तान दिल्ली-देहरादून हाईवे के दूसरी ओर स्थित है. इस समय हाईवे पर कांवड़ यात्रा अपने अंतिम चरण में है और बड़ी संख्या में शिवभक्त लगातार गुजर रहे हैं. ऐसे में परिजनों के सामने जनाजे को हाईवे के दूसरी ओर ले जाने की चुनौती खड़ी हो गई.
तब तक रुके रहे कांवड़िए, जब तक कब्रिस्तान नहीं पहुंचा शव
इसी दौरान थाना दौराला प्रभारी भी मौके पर पहुंच गए. लेकिन जैसे ही जनाजा हाईवे के पास पहुंचा, वहां मौजूद कांवड़ियों को स्थिति का पता चल गया. जिसके बाद कुछ कांवड़िए तुरंत आगे आए और उन्होंने दूसरे कांवड़ियों को रोककर जनाजे के लिए रास्ता बनाने का फैसला किया. कांवड़ियों ने आपस में एक तरह की मानव श्रृंखला बना ली और हाईवे पर चल रही कांवड़ यात्रा को कुछ देर के लिए रोक दिया.
देखते ही देखते हजारों कांवड़िए शांतिपूर्वक सड़क पर रुक गए. जब तक निजाम का जनाजा सुरक्षित रूप से हाईवे पार कर कब्रिस्तान की ओर नहीं चला गया, तब तक कांवड़िए वहीं खड़े रहे. जनाजा गुजरने के बाद कांवड़ यात्रा दोबारा शुरू हुई. कांवड़ियों ने 'हर हर महादेव' के जयघोष के साथ अपनी यात्रा आगे बढ़ाई. इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि धर्म और आस्था से ऊपर इंसानियत और भाईचारा है.
उस्मान चौधरी