धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में उतरे मथुरा के संत, श्रीकृष्ण के स्वरूप वाले बयान पर कही ये बात

वृंदावन के ऐतिहासिक श्री राधाकांत मंदिर में ब्रज तीर्थ देवालय न्यास और धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में संतों और धर्माचार्यों की एक विशाल सभा आयोजित की गई. इस बैठक में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप पर दिए गए बयान का संतों ने खुलकर समर्थन किया है.

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मथुरा-वृंदावन के संतों का रिएक्शन (Photo- ITG) मथुरा-वृंदावन के संतों का रिएक्शन (Photo- ITG)

मदन गोपाल शर्मा

  • मथुरा ,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:26 PM IST

मथुरा के वृंदावन में स्थित ऐतिहासिक श्री राधाकांत मंदिर में संतों, धर्माचार्यों एवं सनातन धर्मावलंबियों की एक विशाल सभा आयोजित हुई. ब्रज तीर्थ देवालय न्यास और धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में हुई इस बैठक की अध्यक्षता महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने की. बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर दिए गए बयान पर उपजे विवाद के बीच संतों ने यह सभा बुलाई थी. बैठक में वक्ताओं ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को ब्रज की रसिक परंपरा से जोड़ते हुए उनके समर्थन में एकजुटता दिखाई और सनातन समाज से एकजुट रहने की अपील की.

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रसिक और भक्ति परंपरा का हिस्सा है बयान

भागवताचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा का अंग है, जिसका वर्णन भक्त कवियों और आचार्यों ने सदियों से किया है. अखाड़ा परिषद वृंदावन के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने कहा कि ठाकुरजी की बांकी चितवन और त्रिभंगी मुद्रा का वर्णन रसिक संत करते आए हैं, इसलिए इसे विवाद बनाने के बजाय भक्तिभाव के संदर्भ में समझना चाहिए. 

वहीं, धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री सनातन समाज को जागृत कर रहे हैं और किसी के कथन को उसके संदर्भ से अलग कर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है. कुल मिलाकर राम-कृष्ण बयान के बाद उपजे के बीच धीरेंद्र शास्त्री को मथुरा का संतों का साथ मिल गया है. 

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ब्रजभूमि और संतों का संदेश

उधर, ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के महामंत्री आर.के. पांडेय ने कहा कि ब्रज के कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण का वास है और बांके बिहारी का अर्थ उनके त्रिभंगी स्वरूप से जुड़ा है. सभा की अध्यक्षता कर रहे महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि जब तक किसी कथन में दुर्भावना न हो, उसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए. ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के अध्यक्ष रमाकांत गोस्वामी ने सनातन समाज से अपनी ऊर्जा आपसी विवादों के बजाय संस्कृति के संरक्षण में लगाने की बात कही. स्वामी देवानंद परमहंस और ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष आनंद बल्लभ गोस्वामी ने भी संवाद व संयम बनाए रखने पर जोर दिया.

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