गाजियाबाद: फर्जी बीमा पॉलिसी और गूगल विज्ञापनों से 40 लाख की साइबर ठगी, 7 गिरफ्तार

गाजियाबाद में क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसी और Google विज्ञापनों के जरिए ठगी करने वाले गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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पुलिस गिरफ्त में आरोपी. (Photo: Screengrabs) पुलिस गिरफ्त में आरोपी. (Photo: Screengrabs)

मयंक गौड़

  • गाजियाबाद ,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:18 AM IST

गाजियाबाद में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें लोगों को बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण और प्रीमियम पर छूट दिलाने का लालच देकर लाखों रुपये लूटे जा रहे थे. ठग इसके लिए Google पर विज्ञापन चलाते, बीमा कंपनी के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी बनाते और पैसे ऐंठने के बाद लोगों को नकली बीमा प्रमाणपत्र भेज देते थे. क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक गिरोह ने महज चार महीने में करीब 40 लाख रुपये की ठगी की है. हालांकि, गिरोह का कथित सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे अभी फरार है.

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Google विज्ञापन के जरिए बिछाते थे ठगी का जाल
पुलिस उपायुक्त मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी के मुताबिक आरोपी टाटा एआईजी इंश्योरेंस के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी ई-मेल आईडी और Google विज्ञापन तैयार करते थे. इन विज्ञापनों में दिए गए मोबाइल नंबरों पर जब लोग बीमा पॉलिसी रिन्यू कराने या प्रीमियम पर छूट लेने के लिए संपर्क करते, तो उन्हें भरोसे में लेकर गिरोह के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते थे.

लोगों को शक न हो, इसके लिए आरोपी फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से नकली बीमा प्रमाणपत्र तैयार करते और ई-मेल के जरिए पीड़ितों को भेज देते थे. फर्जी दस्तावेज मिलने के बाद लोगों को लगता था कि उनकी पॉलिसी का नवीनीकरण हो गया है. इसी वजह से उन्हें ठगी का पता भी देर से चलता था.

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डासना जेल में हुई मुलाकात, फिर बना ठगी का नेटवर्क
पुलिस की जांच में गिरोह के काम करने के तरीके को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह के कथित सरगना दीपक और राहुल की मुलाकात डासना जेल में हुई थी. इसके बाद कॉल सेंटर में काम कर चुके कुछ अन्य लोग भी इस नेटवर्क से जुड़ गए.

गिरोह में विक्रम उर्फ विक्की की भूमिका बैंक खाते उपलब्ध कराने की थी. इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी. इसके बदले विक्रम और संबंधित खाताधारकों को पांच-पांच प्रतिशत कमीशन दिया जाता था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं.

सात गिरफ्तार, कई राज्यों से जुड़ी शिकायतें
पुलिस ने नीरज भाटी, नीरज सोलंकी, विक्रम सिंह, नितिन, सुशील कुमार, विक्रांत सिंह और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया है. इनके पास से चार मोबाइल फोन, दो एटीएम/डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, एक पासबुक और तीन हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं.

पुलिस के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर केरल और झारखंड समेत अन्य राज्यों से संबंधित शिकायतें भी मिली हैं. फिलहाल बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है. फरार सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे की तलाश भी जारी है.

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बीमा रिन्यू कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण या प्रीमियम में छूट के नाम पर किसी अनजान नंबर पर भरोसा न करें. Google पर दिखने वाले हर विज्ञापन को बीमा कंपनी का आधिकारिक विज्ञापन मानकर भुगतान करना भी जोखिम भरा हो सकता है.

पैसे ट्रांसफर करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा से संपर्क कर पॉलिसी और भुगतान की पुष्टि जरूर करें. किसी संदिग्ध खाते में रकम भेजने या फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर तुरंत साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं.

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