अयोध्या के राम मंदिर में व्यवस्था को और अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है. मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती अब पूरी तरह या बड़े स्तर पर मशीनों के जरिए कराने की तैयारी है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इस व्यवस्था को लेकर विस्तार से मंथन हुआ है.
मंदिर में रोजाना आने वाले चढ़ावे में नोटों के साथ बड़ी संख्या में सिक्के भी शामिल होते हैं. अभी इसकी गिनती में ट्रस्ट और बैंक के कर्मचारियों की भूमिका रहती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद हाई-स्पीड नोट काउंटिंग मशीन, सिक्के गिनने वाली ऑटोमेटिक मशीन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए दो बैंकों और IIT के विशेषज्ञों से प्रस्ताव लिए गए हैं. अब इन प्रस्तावों का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन किया जा रहा है. यानी राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ चुका है.
CEO की नियुक्ति के बाद व्यवस्था में बदलाव की शुरुआत
राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को CEO की नियुक्ति के बाद अब व्यवस्थाओं को अधिक संस्थागत और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिखाई दे रहा है. इसी क्रम में चढ़ावे की गणना व्यवस्था को लेकर भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं. ट्रस्ट का मानना है कि चढ़ावे की गणना में मानवीय हस्तक्षेप जितना कम होगा, प्रक्रिया उतनी ही पारदर्शी और सुरक्षित बनाई जा सकेगी. मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद दान भी आता है. ऐसे में नोट और सिक्कों की मैनुअल गिनती अपने आप में लंबी प्रक्रिया है. मशीनों के इस्तेमाल से इस काम को कम समय में पूरा करने के साथ-साथ रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था भी बेहतर हो सकती है.
क्यों जरूरी महसूस हुई मशीन से चढ़ावा गिनने की जरूरत
राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की मात्रा लगातार बढ़ रही है. नकद राशि में अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों के साथ सिक्के भी बड़ी संख्या में आते हैं. इन्हें अलग करना, गिनना, दोबारा सत्यापित करना और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कर्मचारियों को काफी समय लग सकता है. मैनुअल गिनती में कर्मचारियों की संख्या भी अधिक रखनी पड़ती है. इसके अलावा किसी भी मानवीय प्रक्रिया में गलती की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती. नई तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना है. मशीनें नोटों को तेजी से अलग-अलग मूल्यवर्ग में गिन सकती हैं. वहीं सिक्कों के लिए अलग ऑटोमेटिक काउंटिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे पूरी प्रक्रिया तेज होने के साथ रिकॉर्ड तैयार करने में भी आसानी होगी.
दो बैंकों और IIT के प्रस्तावों पर हो रहा मूल्यांकन
राम मंदिर में चढ़ावे की नई गणना व्यवस्था के लिए दो बैंकों और IIT के विशेषज्ञों से प्रस्ताव मांगे गए हैं. इन प्रस्तावों में केवल मशीन लगाने की बात नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और डिजिटल बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. अब ट्रस्ट इन प्रस्तावों की तकनीकी क्षमता और वित्तीय व्यवहार्यता की जांच कर रहा है. कौन सी मशीन बेहतर होगी? उसकी क्षमता कितनी होगी? सिक्कों की गिनती कितनी तेजी से होगी? नोटों की गिनती के साथ रिकॉर्ड कैसे तैयार होगा? डेटा की सुरक्षा कैसे होगी? इन तमाम पहलुओं को देखकर अंतिम फैसला लिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था को लेकर आने वाले एक-दो महीनों में निर्णय लिया जा सकता है. हालांकि अंतिम फैसला तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद ही होगा.
हर नोट और सिक्के का डिजिटल रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ मशीन से गिनती नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्डिंग होगा. ट्रस्ट की योजना है कि चढ़ावे की राशि के मंदिर परिसर में जमा होने से लेकर उसकी गणना और बैंक में जमा किए जाने तक की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड किया जाए. इसके लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है. अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो किसी दिन कितनी नकदी आई, कितनी राशि की गिनती हुई और कितनी रकम बैंक में जमा की गई इन सभी चरणों का डिजिटल डेटा तैयार किया जा सकेगा. इससे बाद में रिकॉर्ड का मिलान और ऑडिट भी पहले की तुलना में आसान हो सकता है.
CCTV की निगरानी में होगी पूरी प्रक्रिया
चढ़ावे की सुरक्षा के लिहाज से निगरानी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी. प्रस्तावित सिस्टम में चढ़ावा जमा होने से लेकर गणना कक्ष तक की प्रक्रिया CCTV की निगरानी में रखने पर जोर है. इसका उद्देश्य केवल चोरी या गड़बड़ी रोकना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना भी है. अगर किसी चरण में राशि को लेकर कोई सवाल उठता है तो रिकॉर्ड और CCTV फुटेज के जरिए प्रक्रिया की जांच करना आसान होगा. यानी मशीन से गिनती और CCTV निगरानी को एक साथ जोड़कर चढ़ावे की पूरी व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है.
कर्मचारियों की संख्या और काम का दबाव भी घटेगा
मशीनों के इस्तेमाल का एक असर मंदिर में चढ़ावे की गणना करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ेगा. अभी नोटों और सिक्कों को अलग करने, गिनने और दोबारा जांचने में काफी मानव संसाधन की जरूरत पड़ती है. ऑटोमेटेड सिस्टम आने के बाद कर्मचारियों को मुख्य रूप से मशीनों की निगरानी, सत्यापन और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे कामों में लगाया जा सकता है. इससे गणना कक्ष में कर्मचारियों की संख्या कम करने की संभावना है. साथ ही बड़ी मात्रा में चढ़ावे की गणना के लिए लगने वाला समय भी कम हो सकता है.
चढ़ावा चोरी के मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
चढ़ावे की नई व्यवस्था पर मंथन के पीछे चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है. ट्रस्ट अब ऐसी किसी भी गुंजाइश को खत्म करना चाहता है, जिससे मंदिर में आने वाली दान राशि की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठें. इसी वजह से नई व्यवस्था में सिर्फ मशीन लगाने के बजाय पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. मकसद यह है कि नकद राशि की गिनती में कम से कम मानवीय हस्तक्षेप हो और प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड मौजूद रहे.
समर्थ श्रीवास्तव