गाजियाबाद में वकीलों की हड़ताल से रुकी रजिस्ट्री, राजस्व का हो रहा नुकसान

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में वकील पिछले 20 दिन से हड़ताल पर हैं. वकीलों की हड़ताल के कारण तहसीलों में संपत्तियों की रजिस्ट्री से लेकर विवाह पंजीकरण तक, सभी काम ठप पड़े हुए हैं.

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गाजियाबाद में वकीलों की हड़ताल (Photo: Screengrab) गाजियाबाद में वकीलों की हड़ताल (Photo: Screengrab)

मयंक गौड़

  • गाजियाबाद,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:17 AM IST

उत्तर प्रदेश सरकार ने बैनामे यानी संपत्तियों की रजिस्ट्री ऑनलाइन कराने का ऐलान किया है. इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों ने मोर्चा खोल दिया है. बैनामों के ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था के विरोध में तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ता और बैनामा लेखक हड़ताल पर हैं. ये हड़ताल 20वें दिन भी जारी रही.

वकीलों ने 30 जून को तहसील परिसर में धरना दिया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता और बैनामा लेखक मौजूद रहे. लगातार जारी धरना-प्रदर्शन के कारण यहां सभी तहसील में अधिवक्ताओं से जुड़े सभी काम भी प्रभावित हुए हैं, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले वकीलों और बैनामा लेखकों ने मानव शृंखला बनाकर सरकार के निर्णय का विरोध किया.

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प्रदर्शन कर रहे वकीलों और बैनामा लेखकों ने हाथों में तख्तियां लेकर ई-पंजीकरण व्यवस्था को वापस लेने की मांग की. प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से पारंपरिक पंजीकरण प्रणाली प्रभावित होगी और इससे वकीलों और बैनामा लेखकों के साथ ही उनसे जुड़े अन्य लोगों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा.

तहसील बार एसोसिएशन सदर के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने कहा कि सरकार ने वकीलों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किए बिना ई-पंजीकरण व्यवस्था लागू करने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि इससे वकीलों के कार्य प्रभावित होंगे और आम लोगों को भी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. अशोक वर्मा ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार ई-पंजीकरण संबंधी आदेश वापस नहीं लेती, उसमें जरूरी संशोधन नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा.

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बार एसोसिएशन के सचिव दीपक वार्ष्णेय ने कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था का सीधा असर वकीलों और बैनामा लेखकों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि स्टांप विक्रेताओं, टाइपिस्टों, फोटोकॉपी दुकान संचालकों, चाय विक्रेताओं और तहसील परिसर में रोजगार से जुड़े अन्य लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी. उनका कहना है कि यदि रजिस्ट्री का काम निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित किया गया तो भविष्य में आम लोगों पर भी इसका आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.

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गौरतलब है कि 20 दिन से वकीलों और बैनामा लेखकों की हड़ताल के कारण राजस्व से संबंधित कामकाज प्रभावित हुआ है. अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 10 हजार से अधिक बैनामे, अभिलेख और अन्य दस्तावेज विभिन्न स्तरों पर लंबित हो चुके हैं. जिले की तहसीलों में हर रोज औसतन 500 से 600 बैनामे पंजीकृत होते हैं, इनमें आवासीय फ्लैट, प्लॉट, दुकान, किरायानामा, विवाद पंजीकरण सहित अन्य दस्तावेज शामिल रहते हैं.

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हड़ताल के चलते इनका पंजीकरण पूरी तरह प्रभावित है. हड़ताल का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो अन्य जिलों और राज्यों से संपत्ति संबंधी काम के लिए गाजियाबाद पहुंचे हैं. इसके अलावा विवाह पंजीकरण सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं. अधिवक्ताओं का कहना है कि पिछले दो सप्ताह से बड़ी संख्या में विवाह पंजीकरण लंबित हैं, जिससे नवविवाहित दंपतियों को विभिन्न सरकारी और निजी कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
 

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