308 पहिए, 200 टन वजन और 100 फीट लंबाई... बस्ती पहुंचा 'बाहुबली ट्रक' तो देखने उमड़ा हुजूम

308 पहियों और करीब 200 टन वजन वाला बाहुबली ट्रक उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले पहुंच गया है. बेल्जियम से लाया गया विशाल वैक्यूम वेसल बलरामपुर चीनी मिल के संयंत्र तक पहुंचाया जा रहा है. धीमी रफ्तार से चल रहे इस काफिले को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुट रही है.

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बेल्जियम से यूपी के बस्ती पहुंचा 300 टायरों वाला बाहुबली ट्रक (Photo-ITG) बेल्जियम से यूपी के बस्ती पहुंचा 300 टायरों वाला बाहुबली ट्रक (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:03 AM IST

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक अजीबो गरीब और हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों की जुबान पर इस समय सिर्फ एक ही नाम छाया हुआ है और वह है 'बाहुबली ट्रक'. यह बाहुबली ट्रक अब बस्ती पहुंच गया है, इस विशालकाय हाइड्रॉलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर को देखने के लिए हर जिले की तरह बस्ती जिले में सड़कों के किनारे भारी जनसैलाब उमड़ पड़ रहा है. 

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इस सफर की शुरुआत बेल्जियम से होती है, जहां से समुद्री रास्ते के जरिए इस भारी-भरकम मशीन को ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर उतारा गया था. वहां से सड़क मार्ग के जरिए झारखंड और बिहार के विभिन्न रास्तों को पार करते हुए यह भारी भरकम काफिला उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ.

 ट्रक के साथ चल रहे मैनेजर ने बताया कि इस विशालकाय हाइड्रॉलिक ट्रेलर में 308 पहिए लगे हुए हैं, जो करीब 20 विशेष ट्रॉलियों को आपस में जोड़कर तैयार किए गए हैं. इस ट्रक पर कोई आम सामान नहीं बल्कि एक विशाल वैक्यूम वेसल यानी बॉयलर लदा हुआ है. इस मशीन का वजन लगभग 200 टन, लंबाई करीब 100 फीट और ऊंचाई 20 फीट से भी ज्यादा है. 

बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट जाएगा ट्रक

इस महाकाय वेसल को बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट में ले जाया जा रहा है, जहां इसका उपयोग एथेनॉल और एशिया के पहले बायोपॉलीमर यानी बायोप्लास्टिक के निर्माण कार्य में किया जाएगा. इस बाहुबली ट्रक की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार और इसके पहियों की खास तकनीक है. इसके पहियों को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ा जा सकता है, जिसकी मदद से इतने बड़े ट्रेलर को तंग और संकरे रास्तों से भी सुरक्षित निकाला जा रहा है.

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यह भी पढ़ें: चीनी के दानों से बनेगा प्लास्टिक... यहां जानिए क्यों लाई गई 'बाहुबली मशीन', बेल्जियम से यूपी तक लाने में लगा ₹10 करोड़ किराया  

हालांकि, इसका वजन इतना ज्यादा है कि ट्रक की रफ्तार चींटी की तरह बेहद धीमी है. यह रोजाना सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पाता है और रात के समय इसे रोक दिया जाता है. इस ट्रक में करीब 400 लीटर क्षमता का डीजल टैंक है, और इसे चलाने में रोजाना भारी मात्रा में ईंधन खर्च हो रहा है. इसके साथ करीब 14 गाड़ियों का एक पूरा काफिला चल रहा है, जिसमें क्रेन, हाइड्रा, जेसीबी और सिविल सहित टेक्निकल एक्सपर्ट्स की टीम शामिल है.

ट्रक निकालने के लिए करनी पड़ रही है मशक्कत

बस्ती जिले और उसके आसपास के इलाकों से गुजरते वक्त इस ट्रक को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. रास्ते में आने वाले बिजली के हाई-टेंशन तारों को हटाना, पेड़ों की छंटाई करना और कई जगहों पर पुल या फुट-ओवर ब्रिज के हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाना या उठाना पड़ रहा है. जहां कहीं भी सड़क संकरी मिलती है, वहां पहले तकनीकी टीम पहुंचकर रास्ता तैयार करती है, उसके बाद ही ट्रेलर को आगे बढ़ाया जाता है. 

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जैसे ही यह बाहुबली ट्रक बस्ती जिले से गुजरा, इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया. आलम यह है कि लोग इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए बेताब दिखे. हाईवे के किनारे खड़े होकर सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर रील्स बना रहे हैं और कई लोग तो दूर-दूर से सफर तय करके इस विशालकाय ट्रक की एक झलक पाने के लिए खींचे चले आ रहे हैं. उत्तर प्रदेश की सड़कों से गुजरता हुआ यह सफर देश भर में एक बड़ा आकर्षण बन चुका है और इसकी हर एक मूवमेंट पर लोगों की पैनी नजर बनी हुई है.


(रिपोर्ट- सतीश श्रीवास्तव)

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