अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन के करीब छह साल बाद राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है. राम मंदिर ट्रस्ट को अब अपना पहला सीईओ मिल गया है. पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ होंगे.
सीईओ की नियुक्ति तक का यह सफर सामान्य प्रशासनिक जरूरत से शुरू होकर चढ़ावे की चोरी के विवाद, एसआईटी जांच और व्यवस्था में खामियों की पड़ताल से गुजरा है. सीईओ की इस नियुक्ति से राम मंदिर के संचालन का पूरा मॉडल बदल जाएगा.
अब तक ट्रस्ट पदाधिकारी, समितियां और अलग-अलग अधिकारी मिलकर मंदिर की व्यवस्थाएं संभालते रहे हैं. सीईओ के आने के बाद नीति और क्रियान्वयन के बीच स्पष्ट विभाजन, अलग अलग जवाबदेही, वित्तीय निगरानी, कर्मचारी प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाओं और परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए एक केंद्रीकृत कार्यकारी व्यवस्था चनने की संभावना है.
एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट से गिनती कक्ष में निगरानी की कमियों और चढ़ावे में सेंध की घटनाओं से जुड़े कई तथ्य सामने आए. सूत्रों के मुताबिक, सीईओ की कई जिम्मेदारियों तय की जाएंगी। सूत्रों के मुताबिक, सीईओ के अधीन आयोजन, दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाएं, कर्मचारी और उनसे जुड़े सभी मामले, वित्त एवं लेन देन, आयोजनों के लिए खरीद और टेंडर, सुरक्षा समन्वय, आईटी और डिजिटल निगरानी, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग करेंगे.
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निर्माण कार्यों की प्रगति, दान और चढ़ावे की व्यवस्था, सनातन परंपरा का संचालन भी सीईओ की जिम्मेदारी होगी. सूत्रों के मुताबिक, सीईओ व्यवस्था का सबसे अहम पहलू धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारी का स्पष्ट विभाजन होगा. पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपरा, अनुष्ठान और आध्यात्मिक विषय ट्रस्ट की धार्मिक समिति देखेगी.
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संबंधित धार्मिक कार्य भी व्यवस्था के दायरे में रहेंगे. वहीं कर्मचारियों की तैनाती, सुविधाओं का संचालन रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्था सीईओ के अधीन रहेगी.
प्रवक्ता की तलाश अभी पूरी नहीं हुई
राम मंदिर ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि के प्रवक्ता के लिए जिस उपयुक्त नाम की तलाश है, वह अभी पूरी नहीं हुई है. इसके कारण प्रवक्त्ता का चयन स्थगित रखा गया है. उन्होंने कहा कि जैसे ही उपयुक्त नाम की तलाश पूरी होगी, वैसे ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी.
समर्थ श्रीवास्तव