आगरा के बाथरूम मर्डर केस में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब तक सामने आई पुलिस जांच, आरोपी रूबी की पूछताछ और मृतक सुरेंद्र शर्मा के भाई के बयानों को जोड़ें तो पूरी कहानी एक सुनियोजित टाइमलाइन की तरह सामने आती है. इस टाइमलाइन की अहम कड़ी है वह फोन कॉल, जिसमें रूबी ने जेठ अनिल शर्मा से कहा था- घर के अंदर मत आना... बच्चों को बाहर से ही ले जाना. उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस घर में जाने से मना किया जा रहा है, उसी के बाथरूम के नीचे सुरेंद्र शर्मा का शव दफन है.
18 मई: पुलिस के मुताबिक, इसी दिन सुरेंद्र शर्मा की हत्या हुई. पूछताछ में रूबी ने कथित तौर पर बताया कि उसने पहले पति को खीर में 15-16 नींद की गोलियां मिलाकर खिलाईं. जब वह बेसुध हो गया तो उसकी हत्या कर दी. यहीं से उस साजिश की शुरुआत हुई, जो अगले डेढ़ महीने तक पुलिस, रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आंखों में धूल झोंकती रही.
मृतक के भाई अनिल शर्मा के मुताबिक, हत्या के बाद 18 मई की सुबह रूबी का कॉल आया. उसने कहा कि घर में पुलिस का कोई मामला हो गया है, इसलिए मां और दोनों बच्चियों को अपने साथ ले जाएं. लेकिन उसने एक और बात कही, जिसने अब जाकर पूरी कहानी का मतलब समझाया. 'घर के अंदर मत आना... बच्चों को बाहर से ही ले जाना.' उस वक्त यह बात नॉर्मल लगी, लेकिन अब माना जा रहा है कि वह किसी को घर में नहीं आने देना चाहती थी. क्योंकि घर के भीतर ही उसका सबसे बड़ा राज छिपा था.
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19 मई: पुलिस के अनुसार, अगले दिन रूबी ने दोनों बेटियों और सास को जेठ के घर भेज दिया. अब घर में वह अकेली थी. पूछताछ में उसने बताया कि उसने अकेले ही शव को घसीटकर बाथरूम तक पहुंचाया. वहां पहले से तैयार गड्ढे में शव दबाया, ऊपर मिट्टी डाली और उसे समतल कर दिया.
इसके बाद अगला कदम था- इस राज को हमेशा के लिए सीमेंट के नीचे दबा देना. रूबी ने राजमिस्त्री रवि कुमार को फोन किया. उसे बताया गया कि बाथरूम का फर्श ऊंचा करना है. मिस्त्री ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचा तो रूबी खुद बाथरूम में मलबा डाल रही थी. उसने कहा भी कि लेबर लगा लो...लेकिन रूबी ने जवाब दिया कि मैं कर लूंगी.
करीब चार बाई छह फुट के बाथरूम में सीमेंट का नया फर्श तैयार कर दिया गया. मिस्त्री और मजदूर को यह अंदाजा तक नहीं था कि जिस जगह वे प्लास्टर कर रहे हैं, उसके नीचे एक इंसान का शव दफन है.
26 मई: हत्या के करीब आठ दिन बाद सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी दर्ज कराई गई. रूबी की कहानी तैयार थी. वह सबको यही बताती रही कि पति झगड़ा करके घर छोड़कर चले गए हैं और जल्द लौट आएंगे. पुलिस ने भी गुमशुदगी के आधार पर जांच शुरू की. यहीं से शुरू हुआ डेढ़ महीने का वह दौर, जिसने इस केस को और सनसनीखेज बना दिया.
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पुलिस के मुताबिक, रूबी खुद जांच के दौरान पुलिस के साथ सीसीटीवी फुटेज देखती रही. वह रिश्तेदारों के सामने पति की चिंता जताती रही. कभी कहती कि वह पैसे लेकर गया है. कभी कहती कि जल्द लौट आएगा. कभी खुद रोने लगती. हर सवाल पर उसका जवाब बदल जाता था.
सुरेंद्र के बड़े भाई अनिल शर्मा ने कहा कि उन्हें लगातार लग रहा था कि रूबी कुछ छिपा रही है. उन्होंने बैंक स्टेटमेंट निकलवाए. हर बयान को जोड़कर देखा. फिर उन्होंने रूबी से कहा कि अगर कोई परेशानी है तो सच बता दो, तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा. इसी बातचीत ने रूबी का मानसिक दबाव बढ़ा दिया.
3 जुलाई: करीब 45 दिन बाद कहानी अचानक बदल गई. अनिल शर्मा को रूबी का फोन आया कि वह घर आएं. वह पहुंचे और पूछा- सुरेंद्र कहां है? रूबी ने जवाब दिया कि घर में है. भाई ने पूछा कि कहां? रूबी ने कहा कि बाथरूम में. जब बाथरूम में कुछ नहीं दिखा तो रूबी ने कहा कि फर्श के नीचे. यहीं से पूरा मामला खुल गया.
सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची. बाथरूम का सीमेंट तोड़ा गया. नीचे गड्ढे में सुरेंद्र शर्मा का शव मिला. करीब डेढ़ महीने पुराना शव पूरी तरह गल चुका था. पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. फॉरेंसिक टीम बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.
हालांकि पूछताछ में रूबी ने हत्या की बात कबूल करने का दावा पुलिस कर रही है, लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या हत्या में कोई और भी शामिल था? गड्ढा किसने खोदा? क्या शव अकेले दफनाया गया? हत्या की असली वजह क्या थी?
उस दिन रूबी का वो फोन कॉल अहम था, अगर संदेह हुआ होता और जांच शुरू हो गई होती तो ये कहानी पहले ही सामने आ जाती. रूबी ने अपने जेठ से कॉल पर कहा था कि घर के अंदर मत आना... जिस घर के अंदर किसी को आने नहीं दिया गया, उसी घर के बाथरूम के नीचे 45 दिनों तक सुरेंद्र शर्मा का शव दफन रहा और ऊपर सामान्य जिंदगी चलती रही. पुलिस की जांच, परिवार के शक और आखिरकार रूबी के कथित कबूलनामे ने उस राज से पर्दा उठाया, जिसने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया.
अरविंद शर्मा